सभी पंचायतों और शहरी निकायों को खरीदना होगा प्लास्टिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य तय
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हिमाचल की सभी पंचायतों और शहरी निकायों को प्लास्टिक खरीदना होगा। जयराम सरकार ने पंचायतों और शहरी निकायों को प्लास्टिक खरीदने के लिए संग्रह केंद्रों स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं।
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को प्लास्टिक कचरा मुक्त करने में सभी की सहभागिता जरूरी हो, इसके लिए सरकार ने कचरा बीनने वालों और घरों से निकलने वाले गैर-पुन: नवीनीकरण और एकल उपयोग वाले प्लास्टिक कचरे को वापस खरीदने को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी लागू की है।
पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, शहरी विकास, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास, राज्य प्रदूषण बोर्ड और सीमेंट कंपनियां इस बाय-बैक पॉलिसी के प्रभावी कार्यान्वयन को समन्वित प्रयास करेंगी।
प्लास्टिक कचरा इकट्ठा कर संग्रह केंद्रों में जमा करवाने पर 75 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाएगा। एकत्रित प्लास्टिक कचरे का उपयोग सड़क निर्माण और सीमेंट उद्योगों में ईंधन के लिए किया जाएगा। इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।
भारी प्लास्टिक नहीं खरीदेंगे
पंचायत व शहरी निकाय दूध, ब्रेड, बिस्कुट, नमकीन, चिप्स, आइसक्रीम, दालों व बेकरी तथा कन्फेक्शनरी उत्पादों में प्रयुक्त होने वाले प्लास्टिक वेस्ट को खरीदा जाएगा। इसके अलावा तेल, शैंपू, साबुन, दही व जूस आदि के प्लास्टिक की भी खरीद की जाएगी।
भारी प्लास्टिक कचरे जैसे प्लास्टिक फर्नीचर, खिलौने, इलेक्ट्रानिक व इलेक्ट्रिक प्लास्टिक, मिनरल वाटर बोतलें, प्लास्टिक के डिब्बे व टिफिन सहित प्लास्टिक बाल्टी व टब की खरीद नहीं की जाएगी।
डीआरडीए कांगड़ा के परियोजना अधिकारी मुनीष शर्मा ने कहा कि सभी पंचायतें और शहरी निकाय प्रदेश को को प्लास्टिक मुक्त करने में सहयोग करेंगे। इसके लिए पंचायत और शहरी निकायों में संग्रह केंद्रों स्थापित किए जाएंगे।