फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Aerial journey stuck in paperwork; ropeway costs soar.

Shimla News: आसमान का सफर फाइलों में अटका, रोपवे की लागत ने भरी उड़ान

Sat, 22 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
Aerial journey stuck in paperwork; ropeway costs soar.
सात साल बाद भी जमीन पर नहीं उतरा शिमला रोपवे प्रोजेक्ट, हर महीने बढ़ रही 20 करोड़ रुपये की लागत, जाम से मिलनी है राहत
विज्ञापन

पीपीपी मोड पर प्रोजेक्ट को शुरू करने का है फैसला

देवेंद्र ठाकुर
शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला की ढाई लाख आबादी और हर साल आने वाले 20 लाख से अधिक सैलानियों को यातायात जाम से निजात दिलाने के लिए बना शिमला रोपवे प्रोजेक्ट सात साल बाद भी जमीन पर नहीं उतर सका है।
वर्ष 2019 से प्रोजेक्ट को लेकर चली आ रही जद्दोजहद आज तक खत्म नहीं हो सकी है। प्रोजेक्ट में देरी के कारण हर महीने इसकी कीमत 15 से 20 करोड़ रुपये बढ़ रही है। अब सरकार ने फिर से इस प्रोजेक्ट को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर शुरू करने का फैसला लिया है। वर्ष 2019 से 2021 तक पीपीपी मोड पर इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के प्रयास असफल हो चुके हैं। प्रोजेक्ट के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक ने 80 फीसदी राशि खर्च करने की मंजूरी दी है, जबकि 20 फीसदी खर्च प्रदेश सरकार को वहन करना था। रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकास निगम इस प्रोजेक्ट के निर्माण पर कार्य कर रहा है, लेकिन सालों की औपचारिकताओं के बावजूद प्रोजेक्ट शुरू भी नहीं हो सका है। शिमला रोपवे के प्रथम चरण में 13 स्टेशनों का निर्माण होना है। यहां ट्रॉलियां विभिन्न लाइनों पर रुकेंगी और इनमें यात्री चढ़ और उतर सकेंगे। इसके अलावा एक टर्निंग स्टेशन भी बनाया जाएगा। इसे विक्ट्री टनल के समीप बनाने की योजना है। तारादेवी से शुरू होकर रोपवे पूरे शिमला शहर को कवर करेगा।
विज्ञापन


खास बात यह है कि लोगों को बस किराये पर इसकी सुविधा मिलनी थी। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से लोगों को शिमला शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम से निजात मिलनी थी, वहीं कम समय में गंतव्य तक भी पहुंच सकेंगे। रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकास निगम की योजना है कि इसमें 600 ट्रॉलियां चलेंगी, जिससे हर घंटे 6,000 लोग सफर कर सकेंगे। हालांकि यह प्रोजेक्ट चरणबद्ध तरीके से पूरा होना है। पहले चरण में 2,000, दूसरे में 2,500 से 3,000 और अगले चरणों में 6,000 लोगों के सफर के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन



पीपीपी मोड पर 18 बार हुए टेंडर, कोई नहीं आया लेने
शिमला रोपवे प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2019 के आसपास हुई थी। रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकास निगम ने इसको लेकर प्रोजेक्ट तैयार किया और इसकी मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के समक्ष ले जाया गया लेकिन यहां नीति आयोग ने इसे पीपीपी मोड पर करने के लिए कहा। इसके बाद निगम ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में शुरू करने की प्रक्रिया शुरू की। इसको लेकर 18 बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी भी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इसकी मुख्य वजह यह थी कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ पर्यटन कारोबार को बढ़ावा देने वाला नहीं था, बल्कि शहर की लाखों की आबादी को बेहतर परिवहन की सुविधा देने के लिए तैयार किया जाना था। सरकार बस कम किराये पर इसकी सुविधा देना चाहती थी। वर्ष 2021 में नीति आयोग की टीम शिमला पहुंची और जब उन्होंने यहां ट्रैफिक जाम की समस्या को करीब से देखा तो पाया कि यह प्रोजेक्ट शहरवासियों के साथ ही यहां आने वाले सैलानियों के लिए बेहद जरूरी है। इसके बाद प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने आर्थिक मदद करने की हामी भरी।


वर्ष 2022 में हैदराबाद कंपनी का हुआ चयन
नीति आयोग की हामी के बाद प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की गई और वर्ष 2022 में इसको सैद्धांतिक मंजूरी मिली। इसके बाद औपचारिकताओं को पूरा करने का काम शुरू किया गया। इसमें वन भूमि समेत अन्य विभागों की जमीन को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की गई। निगम ने इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर आमंत्रित किए, जिसमें दो कंपनियां आईं। इसमें एक कंपनी बाहर हो गई, लेकिन एक कंपनी का चयन करके मामला प्रदेश सरकार को भेजा गया। हैदराबाद की यह कंपनी वाराणसी में भी रोपवे प्रोजेक्ट के निर्माण का कार्य कर रही है। सरकार का लक्ष्य था कि वर्ष 2029 तक प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा, लेकिन यह दावे खोखले ही साबित हुए हैं।



1546 करोड़ से 2296 करोड़ पहुंची परियोजना की लागत
शिमला रोपवे प्रोजेक्ट में होने वाली कई सालों की देरी के कारण इसकी लागत भी लगातार बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर साल प्रोजेक्ट में देरी होने पर लागत में दस फीसदी तक इजाफा हो जाता है। यही वजह है कि शुरुआत में जिस प्रोजेक्ट की लागत 1546.40 करोड़ रुपये थी, वह साल-दर-साल पहले 1734 करोड़ से लेकर 2296 करोड़ तक पहुंच गई। यानी जितनी देरी प्रोजेक्ट में होगी, उसकी लागत भी उतनी ही बढ़ती रहेगी। अब देखना यह है कि शहर की जनता को आसमान से सफर करने के दावे कब जमीन पर उतरते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article