जनजातीय क्षेत्रों में कर्मचारियों को फिर मिलेगा एडवांस वेतन, सरकार ने दी सैद्धांतिक मंजूरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में तैनात हजारों कर्मचारियों को प्रदेश सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। पूर्व सरकार में बंद की गई छह माह के एडवांस वेतन व्यवस्था को फिर से लागू करने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग जल्द ही इसके बारे में अधिसूचना जारी करेगा। वित्त सचिव श्रीकांत बाल्दी ने इसकी पुष्टि की है।
विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व कांग्रेस सरकार ने चुनाव आचार संहिता के बीच अधिसूचना जारी कर जनजातीय इलाकों में दशकों से चली आ रही अग्रिम वेतन व्यवस्था को खत्म कर दिया था।
चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी एवं वर्तमान में मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कर्मचारियों को भरोसा दिया था कि सत्ता में आने के बाद एडवांस वेतन व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी। बीते दिनों लाहौल-स्पीति कर्मचारी महासंघ का प्रतिनिधिमंडल इसके बारे में कृषि मंत्री डॉ. मारकंडा से मिला।
जल्द अधिसूचना भी जारी कर दी जाएगी
इसके बाद मंत्री ने मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष और कैबिनेट में उठाया। कृषि मंत्री ने बताया कि हिमाचल सरकार ने इस मामले में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और जल्द अधिसूचना भी जारी कर दी जाएगी।
गौरतलब है कि 70 के दशक में जनजातीय क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर तत्कालीन सरकार ने इन इलाकों में तैनात कर्मचारियों को साल में 2 बार 6-6 महीने का एकमुश्त एडवांस वेतन देने की व्यवस्था शुरू की थी।
तभी से कर्मचारियों को अप्रैल और सितंबर में 6-6 महीने का एकमुश्त एडवांस वेतन दिया जाता रहा है, लेकिन पूर्व सरकार ने पिछले साल इस व्यवस्था को बंद करने का आदेश जारी कर दिया। राज्य सरकार के वित्त सचिव श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि सरकार इस संदर्भ में जल्द अधिसूचना जारी करेगी।
उधर, जिला लाहौल-स्पीति कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मेघचंद प्रभु ने एडवांस वेतन व्यवस्था बहाल करने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और कृषि मंत्री डॉ. मारकंडा का आभार जताया है।