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एडीजीपी बोले, किसकी जेब में जा रहे चार हजार करोड़

Sat, 10 Oct 2015 12:05 PM IST
Updated Sat, 10 Oct 2015 12:05 PM IST
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ADGP Sanjay Kundu questioned over apple season income in himachal.

ऊपरी शिमला में सेब से हर साल होने वाली कमाई करीब चार हजार करोड़ आंकी गई है। आखिर इतने हजारों करोड़ कहां चले जाते हैं? अगर यह भी मान लें कि इसमें से दो हजार करोड़ बगीचों, ट्रांस्पोर्टेशन और बागवानी से ही संबंधित दूसरे कामों में खर्च हो जाते हैं तो भी बागवानों की जेब में करीब दो हजार करोड़ आता है। अब यह पैसा कहां खर्च होता है? क्या बैंकों में जमा होता है?

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या कोई प्रॉपर्टी खरीदी जाती है? या फिर इस टैक्स फ्री कमाई का कहीं दूसरी जगह इस्तेमाल होता है। एडीजीपी (कानून व्यवस्था) संजय कुंडू ने यह सवाल शिमला पुलिस की मासिक अपराध बैठक में मौजूद पुलिस अफसरों से किए। इसके सवाल में कई अफसरों ने कहा कि ज्यादातर रकम राज्य से बाहर प्रापर्टी में खर्च की जाती है।
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लेकिन क्या हर सीजन में एक बागवान प्रॉपर्टी में ही निवेश करता होगा, यह भी संभव नहीं है। ऊपरी शिमला में ऐसा भी कोई बागवान उभर कर नहीं आया है, जिसने सेब के पैसों की कमाई से कोई बड़ा व्यापार शुरू किया हो और उसकी गिनती टॉप के व्यवसायियों में हो।
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शराबखोरी या अन्य किसी बुरे व्यसनों पर तो खर्च नहीं हो रही कमाई

ADGP Sanjay Kundu questioned over apple season income in himachal.

कहीं इस कमाई का एक हिस्सा जुए, शराबखोरी या अन्य किसी बुरे व्यसनों पर तो खर्च नहीं हो रही? यह सवाल भी पुलिस अधिकारियों से किया गया। ऊपरी शिमला में पुलिस गाहे बगाहे जुआ के बड़े मामले भी पकड़ती है। शराब पर भी खूब पैसा बहाया जाता है। दस साल तक इस रकम को जोड़ा जाए तो सरकार के वार्षिक बजट से ज्यादा पैसा जुट जाएगा।

इतना पैसा आने के बावजूद अधिकांश बागवानों का आर्थिक ग्राफ उस तरह से नहीं बढ़ पा रहा है, जिस तरह हर साल उनके पास सेब की कमाई आ रही है। इस दिशा में भी शिमला पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने स्तर पर इस दिशा में छानबीन करे।

इन इलाकों में बढ़ रही नशाखोरी और नशे के सौदागरों पर शिकंजा कसा जाए। बागवानों को बरगलाने वाले असामाजिक तत्वों पर निगरानी रखी जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि बागवानों की मेहनत की कमाई को अप्रत्यक्ष तौर पर असामाजिक तत्व छीन न पाएं।

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