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झूठा शपथपत्र दायर करने पर एसीएस मनीषा नंदा को हाईकोर्ट की फटकार

Tue, 13 Mar 2018 11:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 13 Mar 2018 11:16 AM IST
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acs manisha nanda filed false affidavit in hp high court

झूठा शपथपत्र दायर करने पर एसीएस मनीषा नंदा को हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है।बद्दी में स्थापित उद्योगों की ओर से प्रदूषण फैलाने की शिकायत पर चल रहे मामले में हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा को झूठा शपथपत्र दाखिल करने पर कड़ी फटकार लगाई है।

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कोर्ट ने शपथपत्र का अध्ययन करने पर पाया कि यह हाईकोर्ट के निर्देशानुसार दायर नहीं किया गया। कोर्ट ने आदेशों में कहा कि जब तक शपथपत्र दायर नहीं किया गया था, तब तक बोर्ड कोर्ट को गुमराह करने में लगा रहा।
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यह दर्शाने का प्रयास करता रहा कि जमीनी स्तर पर सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा है। कागजों में बताया जाता रहा कि बोर्ड के कर्मी ईमानदारी से पर्यावरण कानूनों की अनुपालना करवा रहे हैं। कोर्ट ने ऐसे झूठे शपथपत्र दायर करने वालों से उचित समय पर निपटने के आदेश भी दिए। 

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अतिरिक्त मुख्य सचिव के शपथपत्र में यह कहीं नहीं बताया

acs manisha nanda filed false affidavit in hp high court

कोर्ट ने खेद जताया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव के शपथपत्र में यह कहीं नहीं बताया गया कि बोर्ड के दोषी कर्मियों के खिलाफ  क्या कार्रवाई की। यह भी नहीं बताया है कि बद्दी तहसील के बटेड़ गांव में मैसर्ज हरिपुर क्राफ्ट कंपनी, गांव गुरु माजरा में मैसर्ज नॉक्सपर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड व बद्दी में मैसर्ज सिलान ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास पर्यावरणीय मंजूरी न होने के बावजूद किसने इन उद्योगों को काम

करने की इजाजत दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कहा कि शपथपत्र में नहीं बताया है कि कितनी बार प्रदेश में लगे उद्योगों का निरीक्षण करना जरूरी है। बोर्ड के संबंधित कर्मियों ने इन नियमों का कितना पालन किया।

डिफाल्टर उद्योगों की बिजली काटना और वह भी कोर्ट के दखल के बाद पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मकसद उद्योगों को बंद करवाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि दोषी उद्योग अथवा अधिकारी और कर्मचारी बिना सजा के न छूट जाए।

कोर्ट ने शपथ पत्र एक सप्ताह में दायर करने के आदेश दिए। बीबीएन प्रदूषण नियंत्रण समिति के अध्यक्ष दर्शन सिंह सैनी ने कोर्ट को पत्र लिखकर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण की शिकायत की थी। मामले पर सुनवाई 20 मार्च को होगी।

ठोस कचरा फेंकने के मामले में हाईकोर्ट नाराज

acs manisha nanda filed false affidavit in hp high court

प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोलन के धर्मपुर क्षेत्र में अवैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरा फेंकने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लताड़ लगाई है। कार्यवाहक  मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामले में क्यों ऐसा होता है कि हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के बाद ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नींद से जागता है।

कहा कि आखिर क्यों बोर्ड खुद अपने आप किसी भी तरह का कदम उठाने के लिए तैयार नहीं रहता। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से न्यायालय के समक्ष दायर शपथ पत्र में यह माना गया कि धर्मपुर क्षेत्र में वेस्ट को खुले में व स्कूल के नजदीक डंप किया जा रहा है क्योंकि डंपिंग के लिए कोई भी जगह चिह्नित नहीं की गई है।

न्यायालय ने कहा कि अधिकतर मात्रा में पर्यटक इसी जगह से होते हुए कसौली, सोलन, चायल व शिमला के लिए आते हैं। साथ ही इन क्षेत्रों में काफी सारे ढाबे होटल व फास्ट फ़ूड कार्नर हैं। इसके बावजूद बोर्ड ने कचरा प्रबंधन को लेकर कोई भी ठोस काम नहीं किया है।

गौरतलब है कि धर्मपुर स्थित शिर्डी मुसलमाना वाशिंदों ने हाईकोर्ट के नाम लिखें पत्र में यह आरोप लगाया था कि ठोस कचरे को अवैज्ञानिक तरीके से खुले में फेंका जा रहा है जिस वजह से यहां के बाशिंदों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मामले पर सुनवाई 26 मार्च को होगी। 

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