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Shimla News: आभा का काम आधा, अस्पतालों में लाइनों में धक्के खा रहे मरीज

Wed, 25 Feb 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 11:59 PM IST
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Abha's work is half done, patients are jostling in lines at hospitals
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आभा एप से पर्ची का टोकन जनरेट करने के बाद फिर से लाइनों में खड़े होकर जमा करना पड़ता है शुल्क
मरीजों को आभा के जरिये लाइनों से दिलानी थी राहत

अभी टोकन जनरेट कर काउंटर पर बतानी पड़ती है बीमारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अस्पतालों में मरीजों को लाइनों से राहत दिलाने के लिए शुरू की गई व्यवस्था कागजी साबित हो रही है। मरीज अभी भी लाइनों में धक्के खाने को मजबूर हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल से आभा आईडी का उपयोग कर पर्ची बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी ताकि मरीजों को लाइनों में नहीं लगना पड़े। लेकिन मरीजों को आभा एप में आईडी डालने के बाद मिलने वाले टोकन को दिखाकर पर्ची काउंटर पर जाकर बीमारी लिखवाना पड़ रही है। इसके साथ सरकार ने दस रुपये पर्ची शुल्क भी थोप रखा है। इसे जमा करवाने के लिए भी मरीजों को लाइनों में लगना पड़ रहा है। इससे ऑनलाइन आभा आईडी से पर्ची बनवाने का मरीजों को कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा है।
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राजधानी के दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) क्षेत्रीय अस्पताल में भी आभा आईडी से कुछ लोग बुधवार को पर्ची का टोकन जनरेट करके आए थे। सुबह साढ़े ग्यारह बजे मरीज काउंटर पर कतारों में पर्ची बनवाने के लिए खड़े थे। इनमें से कुछ ने आभा आईडी का उपयोग कर टोकन नंबर तो जनरेट किए थे लेकिन उसके बाद उन्हें भी ओपीडी में दिखाने के लिए बीमारी के अनुसार ओपीडी नंबर दर्ज करवाने और पर्ची का प्रिंट लेने के लिए कतार में खड़े होना पड़ा। दस रुपये शुल्क चुकाने पर इन मरीजों को पर्ची मिली। ऐसे में अस्पताल में आभा आईडी से पर्ची बनाने का यह कार्य महज कागजी साबित हो रहा है। इससे मरीजों को लाइनों में होने वाली दिक्कतों से कोई राहत नहीं मिल पाई है।
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आभा एप से टोकन बनने से सिर्फ मरीज का नाम, उम्र आदि ही दर्ज हो रही है। इसमें बीमारी के उपचार को ओपीडी में दिखाना है, उसका ब्योरा काउंटर पर दर्ज करवाना पड़ रहा है। अस्पताल के एमएस डाॅ. लोकेंद्र शर्मा ने कहा कि अस्पताल में आभा आईडी के माध्यम से भी पर्ची बनाई जा रही है। धीरे-धीरे व्यवस्था को और बेहतर बनाकर ऑनलाइन पर्ची बनाने की सुविधा शुरू की जाएगी।



आभा आईडी का कोई लाभ नहीं
ननखड़ी निवासी राजन खाची ने कहा कि आभा का उन्हें कोई लाभ नहीं लगता है, पर्ची की फीस और प्रिंट के लिए काउंटर पर लगी कतार में लगना पड़ा। सिस्टम को ऑनलाइन करना है, तो पूरी तरह से किया जाना चाहिए।


नहीं है आभा आईडी की जानकारी
गंगा राम ने कहा कि पत्नी को ऑर्थो ओपीडी में दिखाने को लाया हूं, पर्ची काउंटर पर कतार में देर तक खड़े रहकर ही पर्ची बनाई है। मुझे आभा आईडी के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

काम नहीं कर रहा नया सिस्टम
सरगम ने कहा कि आभा आईडी से पर्ची बनवाने के लिए जो सिस्टम चाहिए, वह अस्पताल प्रबंधन ने अभी लागू नहीं किया है। अभी भी लाइन में खड़े रहकर काउंटर पर शुल्क जमा करवाकर पर्ची बनवाई है। अस्पताल प्रबंधन इस सिस्टम में सुधार कर इसे लागू करें।



पर्ची के लिए लगना पड़ा कतार में
घणाहट्टी निवासी शिव कुमार ने कहा कि सुबह दस बजे पर्ची काउंटर पर लंबी कतार में लगकर ही पर्ची बन पाई। आभा आईडी बनी है, लेकिन इसके माध्यम से पर्ची बनवाने पर सिर्फ टोकन मिलता है। बीमारी के बारे काउंटर पर ही बताना पड़ता है, वहीं शुल्क भी काउंटर में ही जमा होता है।
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