कमला को सलाम, हरा भरा जंगल बचाने के लिए दे दी जान
शिमला के रामपुर उपमंडल के ननखड़ी क्षेत्र की एक महिला का जान देकर हरे-भरे जंगल बचाने के प्रयास का देश में मिसाल पेश करने वाला वाक्या पेश आया है। जंगल में लगी आग को बुझाते महिला की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसके देवर और देवरानी बुरी तरह से झुलस गए हैं।
दोनों को गंभीर हालत में रामपुर के खनेरी अस्पताल में दाखिल करवाया है। सरकारी वन संपदा को बचाने के लिए आग में कूदने वाले इस परिवार को अमर उजाला सलाम करता है। घटना शुक्रवार दोपहर 2.00 बजे के बाद की है। ननखड़ी के थारूवा गांव के जंगल में आग लग गई।
46 वर्षीय कमला देवी, उसका देवर-देवरानी, परिवार के अन्य सदस्य और गांव के लोग एकजुट होकर आग बुझाने के लिए जंगल पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बीच ग्रामीण आग बुझाने का प्रयास कर रहे थे। कमला देवी पत्नी अमर सिंह आग में घिर गई। इससे पहले ग्रामीण महिला को बचा पाते उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
आग बुझाते देवर-देवरानी भी बुरी तरह झुलसे
जंगल में आग की सूचना क्षेत्र में आग की ही तरह फैल गई, लेकिन वन विभाग के कर्मचारी दफ्तरों में ही सोए रहे। मौके पर एक भी कर्मचारी आग बुझाने या मदद करने नहीं पहुंचा। दुर्गम क्षेत्र में आग लगने के चलते अग्निशमन विभाग की मदद को भी किसी ने गुहार नहीं लगाई।
आग में कमला का देवर धर्मपाल और देवरानी गुड्डी भी बुरी तरह से झुलस गए हैं। दोनों की हालत गंभीर है। अस्पताल में उपचार चल रहा है। जानकारी के अनुसार देर रात तक जंगल की आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। ननखड़ी पुलिस चौकी प्रभारी श्याम तोमर ने बताया कि थारूवा के जंगल में आग बुझाने के लिए ग्रामीण मौके पर गए थे।
इसी दौरान यह हादसे में महिला की मौत हो गई है। रामपुर के तहसीलदार मुकेश शर्मा घायलों की मदद के लिए खनेरी अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें फौरी राहत दी गई। शिमला के कंजरवेटर आलोक नागर ने बताया कि मामला गंभीर है। जांच कराई जाएगी। अगर कर्मचारियों की लापरवाही हुई तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।