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Shimla News: रिहायशी भवनों में दुकानें चलाने की मंजूरी देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा
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नगर निगम के सदन में पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने रखा प्रस्ताव, बोले-राहत नहीं मिली तो सैकड़ों गरीब परिवारों पर पड़ेगी इससे मार
सरकार से नियमों में बदलाव कर राहत देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के रिहायशी इलाकों में बने मकानों में दुकानें और ढाबे चला रहे भवन मालिकों को राहत देने के लिए नगर निगम ने सरकार को प्रस्ताव भेजने का फैसला लिया है। सदन में शुक्रवार को सर्वसम्मति से इसका प्रस्ताव पारित कर दिया गया। अब सरकार से राहत दिलाने की तैयारी है।
नगर निगम सदन में पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने यह प्रस्ताव रखा। पार्षद कल्याण धीमान ने भी रिहायशी इलाकों को लेकर किए जा रहे सर्वे पर सवाल उठाए। दोनों पार्षदों ने कहा कि शहर में ऐसे सैकड़ों भवन हैं, जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कई रिहायशी मकान ऐसे हैं, जो दशकों पहले बने हैं। मर्ज एरिया में बने मकानों में तब से दुकानें चल रही हैं, जब से वह पंचायत का हिस्सा थे। ऐसे में अब उन पर कार्रवाई की जा रही है। आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि यह नगर निगम का फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में आदेश जारी किए हैं। इसमें ऐसे रिहायशी भवनों की सूची तैयार करने को कहा गया था जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। नगर निगम ने डेवलपमेंट प्लान में चिह्नित रिहायशी क्षेत्रों का निरीक्षण कर ऐसे भवनों की सूची तैयार की है। इसे अब सुप्रीम कोर्ट को भी भेज दिया है। चार अगस्त को मामले में आगामी सुनवाई होनी है। इसके बाद स्पष्ट होगा कि इन पर क्या कार्रवाई करनी है। सदन में सभी पार्षदों ने कहा कि ऐसे लोगों पर सख्ती नहीं होनी चाहिए। इससे गरीब परिवारों पर असर पड़ेगा। सदन ने प्रस्ताव पारित किया कि सरकार राहत देने के लिए नियमों में बदलाव करे।
इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
पार्षद सिमी नंदा ने प्रस्ताव रखा कि शहर में अपने सभी स्रोतों से होने वाली आय सीधे नगर निगम को मिलनी चाहिए। उप महापौर ऊमा कौशल ने नरेंद्र हाउस सड़क का नाम रविंद्र सिंह ठाकुर के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा। निशा ठाकुर ने बिजली पोल की नंबरिंग करने और खाली मकानों के कूड़ा बिल जारी न करने का प्रस्ताव रखा। पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने नई पेयजल लाइनों के साथ हाइड्रेंट लगाने का प्रस्ताव रखा। इन्हें सदन ने मंजूरी दे दी।
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सरकार से नियमों में बदलाव कर राहत देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के रिहायशी इलाकों में बने मकानों में दुकानें और ढाबे चला रहे भवन मालिकों को राहत देने के लिए नगर निगम ने सरकार को प्रस्ताव भेजने का फैसला लिया है। सदन में शुक्रवार को सर्वसम्मति से इसका प्रस्ताव पारित कर दिया गया। अब सरकार से राहत दिलाने की तैयारी है।
नगर निगम सदन में पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने यह प्रस्ताव रखा। पार्षद कल्याण धीमान ने भी रिहायशी इलाकों को लेकर किए जा रहे सर्वे पर सवाल उठाए। दोनों पार्षदों ने कहा कि शहर में ऐसे सैकड़ों भवन हैं, जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कई रिहायशी मकान ऐसे हैं, जो दशकों पहले बने हैं। मर्ज एरिया में बने मकानों में तब से दुकानें चल रही हैं, जब से वह पंचायत का हिस्सा थे। ऐसे में अब उन पर कार्रवाई की जा रही है। आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि यह नगर निगम का फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में आदेश जारी किए हैं। इसमें ऐसे रिहायशी भवनों की सूची तैयार करने को कहा गया था जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। नगर निगम ने डेवलपमेंट प्लान में चिह्नित रिहायशी क्षेत्रों का निरीक्षण कर ऐसे भवनों की सूची तैयार की है। इसे अब सुप्रीम कोर्ट को भी भेज दिया है। चार अगस्त को मामले में आगामी सुनवाई होनी है। इसके बाद स्पष्ट होगा कि इन पर क्या कार्रवाई करनी है। सदन में सभी पार्षदों ने कहा कि ऐसे लोगों पर सख्ती नहीं होनी चाहिए। इससे गरीब परिवारों पर असर पड़ेगा। सदन ने प्रस्ताव पारित किया कि सरकार राहत देने के लिए नियमों में बदलाव करे।
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इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
पार्षद सिमी नंदा ने प्रस्ताव रखा कि शहर में अपने सभी स्रोतों से होने वाली आय सीधे नगर निगम को मिलनी चाहिए। उप महापौर ऊमा कौशल ने नरेंद्र हाउस सड़क का नाम रविंद्र सिंह ठाकुर के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा। निशा ठाकुर ने बिजली पोल की नंबरिंग करने और खाली मकानों के कूड़ा बिल जारी न करने का प्रस्ताव रखा। पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने नई पेयजल लाइनों के साथ हाइड्रेंट लगाने का प्रस्ताव रखा। इन्हें सदन ने मंजूरी दे दी।
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