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Shimla News: भालू और तेंदुए के हमलों से प्रभावित क्षेत्रों के लिए बनेगा प्लान

Sat, 19 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 11:59 PM IST
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A plan will be formulated for areas affected by bear and leopard attacks.
प्रदेश के 10 संवेदनशील मंडलों का चयन, मानव-वन्यजीव संघर्ष का होगा त्वरित मूल्यांकन, राहत के लिए बनेगी योजना
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अध्ययन कर वन्यप्राणी प्रभाग को सौंपा जाएगा एक्शन प्लान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग के वन्यप्राणी प्रभाग ने बड़ा कदम उठाया है। वन्यप्राणी प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (सैकॉन), कोयंबटूर की संयुक्त टीम मानव-वन्यजीव संघर्ष का त्वरित मूल्यांकन करेगी। इसके बाद जंगलों में ऐसे फल लगाए जाएंगे ताकि भालू रिहायशी इलाकों की तरफ कम आए।

यह एक्शन प्लान विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर तैयार होगा। इसके तहत सबसे पहले मानव-भालू और मानव-तेंदुआ संघर्ष के लिए ऐसे 10 मंडलों का चयन किया है, जहां संघर्ष के मामले सबसे अधिक पाए गए हैं। इस सिलसिले में शनिवार को शिमला स्थित फॉरेस्ट हेडक्वार्टर में डब्ल्यूआईआई और सैकॉन की टीम ने वन्यप्राणी प्रभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल आलोक प्रेम नागर (आईएफएस) के साथ बैठक की। बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इस मूल्यांकन के लिए एक टीम गठित की है। यह टीम चयनित क्षेत्रों में वर्तमान स्थिति का त्वरित मूल्यांकन कर प्रबंधन कार्ययोजना तैयार करेगी और विभाग को इससे अवगत कराएगी। गौरतलब है कि अपर शिमला के कई हिस्सों में भालुओं के हमले के मामले सामने आते हैं। इसमें अभी तक एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। अब विभाग के प्लान से इन हमलों से राहत मिलने की उम्मीद है।
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प्रधान मुख्य अरण्यपाल आलोक प्रेम नागर (आईएफएस) ने कहा कि इस त्वरित मूल्यांकन से हिमाचल में भालू और तेंदुए के कारण होने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों का पता चलेगा। भविष्य में इन कारणों को कम करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मूल्यांकन संघर्ष के कारणों को जानने और उन्हें कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा जिसके निवारण के लिए वन्यप्राणी प्रभाग ठोस कदम उठाएगा।
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जानवरों के हिसाब से तय होंगे प्लान
अरण्यपाल शिमला दक्षिण एवं आईएफएस अधिकारी प्रीति भंडारी ने बताया कि इस अध्ययन में भालू और तेंदुए सहित विभिन्न प्रजातियों और प्रत्येक क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग एक्शन प्लान तैयार किए जाएंगे। संघर्ष के प्रमुख कारणों के निवारण के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अध्ययन के दौरान स्थानीय लोगों से संवाद कर उन्हें मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।
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