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Shimla News: पुराने नोटों से बना चित्र बना आकर्षण का केंद्र
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गेयटी में चित्र देखने उमड़ रही भीड़
प्रदर्शनी में चित्र का मूल्य 40 हजार रुपये रखा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में चल रहे एचसी राय कला उत्सव में सिम्फनी कला में पुराने नोट के बनाए चित्र आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रदर्शनी को देखने के लिए काफी संख्या में लोग आ रहे हैं।
प्रदर्शनी में डॉ. रंजन कुमार मल्लिक के चित्र आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उन्होंने एक चित्र में एक व्यक्ति को पुराने नोटों के कपड़े पहने हुए दिखाया है। व्यक्ति ने सिर पर साफा बांध रखा है। डॉ. मल्लिक ने बताया कि समय के साथ हर चीज में बदलाव आ जाता है। पहले जिन पैसों की कीमत होती थी वह वर्तमान में एक फैशन बनकर रह गए हैं। वहीं जिन नोटों की आज कीमत है हो सकता है कि वह भी आने वाले समय में फैशन ही बन जाए। प्रदर्शनी में इस चित्र का मूल्य 40 हजार रुपये निर्धारित किया है। इसके अलावा उन्होंने अपने चित्रों में सोसायटी, भाव और इंसानियत को दर्शाया है। डॉ. मलिक ने चंडीगढ़ ललित कला अकादमी पुरस्कार सहित 22 से अधिक राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ भारत तथा विदेशों में व्यापक प्रदर्शनियां लगाई हैं। इनके पोर्टफोलियो में 16 एकल प्रदर्शनियां और 70 से अधिक समूह प्रदर्शनियां शामिल हैं। प्रदर्शनी में प्रो. मल्लिक के अलावा प्रो. हरीश चंद्र राय (एचसी राय), जगजीत निशांत, केवल कृष्ण, हिम चटर्जी, डैनी बलबीर सिंह, तिम्सी गुप्ता, सयुनी चटर्जी, आदित्य सिंह ठाकुर के बनाए चित्र प्रदर्शित किए हैं। संस्था की संयोजक अमला राय ने बताया कि यह गेयटी में उनका तीसरा उत्सव है। प्रदर्शनी 29 सितंबर तक चलेगी।
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प्रदर्शनी में चित्र का मूल्य 40 हजार रुपये रखा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में चल रहे एचसी राय कला उत्सव में सिम्फनी कला में पुराने नोट के बनाए चित्र आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रदर्शनी को देखने के लिए काफी संख्या में लोग आ रहे हैं।
प्रदर्शनी में डॉ. रंजन कुमार मल्लिक के चित्र आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उन्होंने एक चित्र में एक व्यक्ति को पुराने नोटों के कपड़े पहने हुए दिखाया है। व्यक्ति ने सिर पर साफा बांध रखा है। डॉ. मल्लिक ने बताया कि समय के साथ हर चीज में बदलाव आ जाता है। पहले जिन पैसों की कीमत होती थी वह वर्तमान में एक फैशन बनकर रह गए हैं। वहीं जिन नोटों की आज कीमत है हो सकता है कि वह भी आने वाले समय में फैशन ही बन जाए। प्रदर्शनी में इस चित्र का मूल्य 40 हजार रुपये निर्धारित किया है। इसके अलावा उन्होंने अपने चित्रों में सोसायटी, भाव और इंसानियत को दर्शाया है। डॉ. मलिक ने चंडीगढ़ ललित कला अकादमी पुरस्कार सहित 22 से अधिक राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ भारत तथा विदेशों में व्यापक प्रदर्शनियां लगाई हैं। इनके पोर्टफोलियो में 16 एकल प्रदर्शनियां और 70 से अधिक समूह प्रदर्शनियां शामिल हैं। प्रदर्शनी में प्रो. मल्लिक के अलावा प्रो. हरीश चंद्र राय (एचसी राय), जगजीत निशांत, केवल कृष्ण, हिम चटर्जी, डैनी बलबीर सिंह, तिम्सी गुप्ता, सयुनी चटर्जी, आदित्य सिंह ठाकुर के बनाए चित्र प्रदर्शित किए हैं। संस्था की संयोजक अमला राय ने बताया कि यह गेयटी में उनका तीसरा उत्सव है। प्रदर्शनी 29 सितंबर तक चलेगी।
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