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Shimla News: बंगाल की मिट्टी से तैयार होगी मां दुर्गा की भव्य मूर्ति
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कालीबाड़ी समेत शहर के मंदिरों में नवरात्र के लिए तैयारियां शुरू, मूर्ति बनाने का काम शुरू
मां सरस्वती, महिषासुर और कार्तिकेय की मूर्तियां भी बनेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के देवी मंदिरों में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के प्रमुख मंदिरों में साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम तेजी से किया जा रहा है। कालीबाड़ी मंदिर के गर्भगृह की बुधवार को सफाई की गई। वहीं मंदिर के गुंबद में रंग-रोगन का काम भी जारी है।
कालीबाड़ी मंदिर में इस बार भी बंगाल की परंपरा और कला की झलक देखने को मिलेगी। प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए विशेष तौर पर बंगाल की मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बंगाल के ही कलाकार पारंपरिक तरीके से मिट्टी को आकार देकर प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इसके बाद इन पर रंग-रोगन और साज-सज्जा का काम किया जाएगा। तैयार की जा रही प्रतिमाओं में मां दुर्गा के साथ मां सरस्वती, महिषासुर, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाएं शामिल हैं। प्रतिमाओं की बनावट और सजावट में बंगाल की पारंपरिक शैली को प्रमुखता दी जा रही है।
श्रद्धालुओं की बढ़ने वाली आवाजाही को देखते हुए मंदिर प्रबंधन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटा है। प्रतिमाओं के निर्माण के दौरान कलाकार बारीकी से हर आकृति को आकार दे रहे हैं। नवरात्र के दौरान इन प्रतिमाओं को विधि-विधान के साथ मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को बंगाल की पारंपरिक कला और शिमला की धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
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मां सरस्वती, महिषासुर और कार्तिकेय की मूर्तियां भी बनेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के देवी मंदिरों में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के प्रमुख मंदिरों में साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम तेजी से किया जा रहा है। कालीबाड़ी मंदिर के गर्भगृह की बुधवार को सफाई की गई। वहीं मंदिर के गुंबद में रंग-रोगन का काम भी जारी है।
कालीबाड़ी मंदिर में इस बार भी बंगाल की परंपरा और कला की झलक देखने को मिलेगी। प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए विशेष तौर पर बंगाल की मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बंगाल के ही कलाकार पारंपरिक तरीके से मिट्टी को आकार देकर प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इसके बाद इन पर रंग-रोगन और साज-सज्जा का काम किया जाएगा। तैयार की जा रही प्रतिमाओं में मां दुर्गा के साथ मां सरस्वती, महिषासुर, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाएं शामिल हैं। प्रतिमाओं की बनावट और सजावट में बंगाल की पारंपरिक शैली को प्रमुखता दी जा रही है।
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श्रद्धालुओं की बढ़ने वाली आवाजाही को देखते हुए मंदिर प्रबंधन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटा है। प्रतिमाओं के निर्माण के दौरान कलाकार बारीकी से हर आकृति को आकार दे रहे हैं। नवरात्र के दौरान इन प्रतिमाओं को विधि-विधान के साथ मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को बंगाल की पारंपरिक कला और शिमला की धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
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