{"_id":"6aec92815d1ca16e0e0479ba","slug":"a-digital-library-will-now-be-developed-on-the-archives-portal-shimla-news-c-19-sml1002-816314-2026-11-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: अब आर्काइव्स पोर्टल पर तैयार होगी डिजिटल लाइब्रेरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: अब आर्काइव्स पोर्टल पर तैयार होगी डिजिटल लाइब्रेरी
विज्ञापन
हिमाचल की दुर्लभ पुस्तकों को मिलेगी नई पहचान, 1807 से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज पढ़ सकेंगे लोग
अनमोल किताबें एक क्लिक पर होंगी उपलब्ध
भारती शर्मा
शिमला। प्रदेश की 219 साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को अब डिजिटल दुनिया में नई पहचान मिलने जा रही है। प्रदेश के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों, दुर्लभ पुस्तकों और ऐतिहासिक अभिलेखों को सहेजने के लिए राज्य सरकार डिजिटल आर्काइव्स पोर्टल के साथ डिजिटल लाइब्रेरी भी तैयार कर रही है।
इसके शुरू होने से हिमाचल के इतिहास को जानना और उस पर शोध करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा। अब तक राज्य अभिलेखागार की ओर से अत्याधुनिक डिजिटल आर्काइव्स पोर्टल शुरू करने की तैयारी की जा रही थी लेकिन योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें डिजिटल लाइब्रेरी को भी शामिल किया जा रहा है। दोनों प्लेटफॉर्म पर ऐतिहासिक धरोहर को अलग-अलग स्वरूप में संरक्षित किया जाएगा। डिजिटल लाइब्रेरी में हिमाचल प्रदेश की दुर्लभ और महत्वपूर्ण पुस्तकों को संग्रहित किया जाएगा जबकि आर्काइव्स पोर्टल पर पुराने सरकारी रिकॉर्ड, फाइलें और ऐतिहासिक दस्तावेज डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखे जाएंगे। केंद्र सरकार की केंद्रीय वित्तीय सहायता योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी से पहले चरण में करीब 17 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है। इस डिजिटल पहल के माध्यम से वर्ष 1807 से जुड़े ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेजों को भी ऑनलाइन उपलब्ध करवाने की योजना है। इसके तहत ऐतिहासिक अभिलेख, दुर्लभ पुस्तकें, गजेटियर, सेटलमेंट रिपोर्ट, पांडुलिपियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश के 219 वर्षों के इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही डिजिटल मंच पर मिल सकेंगी। पुराने दस्तावेजों और पुस्तकों को देखने के लिए लोगों को अब अभिलेखागार के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इंटरनेट के माध्यम से ही इन ऐतिहासिक धरोहरों तक पहुंच बनाई जा सकेगी।
नए साल से पहले शुरू होंगी दोनों योजनाएं
वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के अनुरूप इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य सरकार से आवश्यक स्वीकृति भी मिल चुकी है। नए साल से पहले शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और शिक्षाविदों को यह सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। आर्काइव्स पोर्टल के लिए विभाग की ओर से तैयार किया गया सर्चेबल डिजिटाइज्ड अभिलेखीय डाटा आईटी विभाग को उपलब्ध करवाया जाएगा, जो पोर्टल का संचालन करेगा।
विज्ञापन
-मोहन ठाकुर, सहायक निदेशक, हिमाचल राज्य अभिलेखागार
विज्ञापन
अनमोल किताबें एक क्लिक पर होंगी उपलब्ध
भारती शर्मा
शिमला। प्रदेश की 219 साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को अब डिजिटल दुनिया में नई पहचान मिलने जा रही है। प्रदेश के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों, दुर्लभ पुस्तकों और ऐतिहासिक अभिलेखों को सहेजने के लिए राज्य सरकार डिजिटल आर्काइव्स पोर्टल के साथ डिजिटल लाइब्रेरी भी तैयार कर रही है।
इसके शुरू होने से हिमाचल के इतिहास को जानना और उस पर शोध करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा। अब तक राज्य अभिलेखागार की ओर से अत्याधुनिक डिजिटल आर्काइव्स पोर्टल शुरू करने की तैयारी की जा रही थी लेकिन योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें डिजिटल लाइब्रेरी को भी शामिल किया जा रहा है। दोनों प्लेटफॉर्म पर ऐतिहासिक धरोहर को अलग-अलग स्वरूप में संरक्षित किया जाएगा। डिजिटल लाइब्रेरी में हिमाचल प्रदेश की दुर्लभ और महत्वपूर्ण पुस्तकों को संग्रहित किया जाएगा जबकि आर्काइव्स पोर्टल पर पुराने सरकारी रिकॉर्ड, फाइलें और ऐतिहासिक दस्तावेज डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखे जाएंगे। केंद्र सरकार की केंद्रीय वित्तीय सहायता योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी से पहले चरण में करीब 17 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है। इस डिजिटल पहल के माध्यम से वर्ष 1807 से जुड़े ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेजों को भी ऑनलाइन उपलब्ध करवाने की योजना है। इसके तहत ऐतिहासिक अभिलेख, दुर्लभ पुस्तकें, गजेटियर, सेटलमेंट रिपोर्ट, पांडुलिपियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश के 219 वर्षों के इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही डिजिटल मंच पर मिल सकेंगी। पुराने दस्तावेजों और पुस्तकों को देखने के लिए लोगों को अब अभिलेखागार के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इंटरनेट के माध्यम से ही इन ऐतिहासिक धरोहरों तक पहुंच बनाई जा सकेगी।
विज्ञापन
नए साल से पहले शुरू होंगी दोनों योजनाएं
वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के अनुरूप इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य सरकार से आवश्यक स्वीकृति भी मिल चुकी है। नए साल से पहले शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और शिक्षाविदों को यह सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। आर्काइव्स पोर्टल के लिए विभाग की ओर से तैयार किया गया सर्चेबल डिजिटाइज्ड अभिलेखीय डाटा आईटी विभाग को उपलब्ध करवाया जाएगा, जो पोर्टल का संचालन करेगा।
विज्ञापन
-मोहन ठाकुर, सहायक निदेशक, हिमाचल राज्य अभिलेखागार