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Shimla News: इंजीनियरिंग के हुनर सिखाएगी 123 साल पुरानी लेथ मशीन

Tue, 21 Jul 2026 11:52 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:52 PM IST
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A 123-year-old lathe machine will teach engineering skills.
अमर उजाला असर
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अब आईटीआई शिमला में वर्ष 1903 की लेथ मशीन को मिलेगा नया जीवन, महापौर सुरेंद्र चौहान ने दिए निर्देश
पेयजल कंपनी आईटीआई चौड़ा मैदान को सौंपेगी मशीन

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी की पेयजल व्यवस्था की रीढ़ रही अंग्रेजों के समय शिमला लाई गई लेथ मशीन अब पेयजल कंपनी के स्टोर में जंग नहीं खाएगी। यह ऐतिहासिक मशीन अब नई पीढ़ी को इंजीनियरिंग का हुनर सिखाएगी।
नगर निगम कई वर्षों से स्टोर में पड़ी इस मशीन को आईटीआई चौड़ा मैदान को सौंपने जा रहा है। आईटीआई में टर्नर, फीटर समेत अन्य तकनीकी विषयों का प्रशिक्षण ले रहे छात्र अब इस 123 वर्ष पुरानी मशीन से भी तकनीकी बारीकियां सीख सकेंगे। यह मशीन कई वर्षों से पेयजल कंपनी के सब्जी मंडी स्थित स्टोर में बंद पड़ी थी। आईटीआई चौड़ा मैदान के प्रधानाचार्य और छात्रों ने मंगलवार को नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान से मुलाकात कर मशीन को संस्थान में स्थापित करने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने बताया कि इस मशीन के माध्यम से तकनीकी विषयों के छात्र पुर्जे बनाने और मरम्मत जैसे कार्यों की बारीकियां सीख सकेंगे।
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महापौर सुरेंद्र चौहान ने इस मामले में तुरंत पेयजल कंपनी के प्रबंध निदेशक से फोन पर बात की और मशीन को सुरक्षित रूप से आईटीआई शिमला को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। पहले नगर निगम इस मशीन को रानी झांसी पार्क में स्थापित करने की योजना बना रहा था लेकिन अब इसे आईटीआई शिमला को देने का फैसला लिया गया है। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि इस मशीन से युवा पीढ़ी को लाभ मिलेगा। पहले तकनीकी कार्य किस तरह किए जाते थे, इसकी जानकारी और प्रशिक्षण छात्र इस ऐतिहासिक मशीन के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे।
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इंग्लैंड से शिमला लाई गई थी मशीन
पेयजल योजनाओं की पंपिंग मशीनरी में आने वाली खराबियों को दूर करने के लिए अंग्रेज वर्ष 1903 में इस लेथ मशीन को इंग्लैंड से शिमला लाए थे। उस समय शिमला की आबादी काफी कम थी और शहर को सियोग समेत दो-तीन छोटी पेयजल योजनाओं से पानी की आपूर्ति होती थी। इन योजनाओं से पानी शिमला तक पहुंचाने और शहर में वितरण के लिए पंपिंग मशीनरी का इस्तेमाल किया जाता था। मशीनरी में खराबी आने या उसके पुर्जे टूटने अथवा घिसने पर पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो जाती थी। इस समस्या के समाधान के लिए अंग्रेज यह लेथ मशीन शिमला लेकर आए थे। इस मशीन की मदद से पंपिंग मशीनरी की मरम्मत के साथ-साथ उसके पुर्जों का निर्माण भी शिमला में ही होने लगा था। इससे पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में काफी सहायता मिली। अब दशकों से बंद पड़ी यह ऐतिहासिक मशीन एक बार फिर तकनीकी प्रशिक्षण के काम आएगी।
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