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तीन दिन में पचास बंदर किए पिंजरे में कैद
Updated Thu, 26 Oct 2017 10:59 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में तीन दिन में 50 बंदरों को पकड़ा गया है। पहले चरण में जाखू, यूएस क्लब, लक्कड़ बाजार और इसके आसपास के इलाकों में बंदरों को पिंजरे में कैद किया जा रहा है। वन विभाग ने शहर के उत्पाती बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से तीन विशेषज्ञों की टीम का दस्ता शिमला बुलाया था। इसके साथ ही विभाग ने तेजी के साथ अधिक से अधिक बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से ही इनके तीन और साथियों का दस्ता बुला लिया है। विभाग इन बंदरों को पकड़ कर ट्रामा सेंटर में भेज कर इनकी नसबंदी करवा रहा है। तीन दिन बाद इन्हें उन्हीं जगह पर छोड़ा जाएगा, जहां से इन्हें कैद किया गया। मथुरा से बुलाए गई टीम और वन्य प्राणी प्रभाग की टीम ने 50 के करीब बंदरों को पकड़ लिया है। प्रत्येक बंदर के पकड़ने पर विभाग 700 रुपये की रकम अदा करेगा।
शहर के लोगों में बंदरों ने अपना इतना खौफ पैदा कर दिया है कि लोग घरों में पिंजरे की तरह कैद होने को मजबूर हो गए हैं। लोग घरों की बालकनी को जाली से बंद कर रहे हैं। सुबह-शाम महिलाओं और बुजुर्गों को स्कूल से बच्चों को लाते समय अक्सर बंदर इन्हें अपना शिकार बना लेते हैं।
शहरी वन विभाग के डीएफओ इंद्र कुमार ने बताया कि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से 50 बंदर पिंजरे में कैद कर नसबंदी के लिए ट्रामा सेंटर भेज दिए गए हैं।
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शिमला। शहर में तीन दिन में 50 बंदरों को पकड़ा गया है। पहले चरण में जाखू, यूएस क्लब, लक्कड़ बाजार और इसके आसपास के इलाकों में बंदरों को पिंजरे में कैद किया जा रहा है। वन विभाग ने शहर के उत्पाती बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से तीन विशेषज्ञों की टीम का दस्ता शिमला बुलाया था। इसके साथ ही विभाग ने तेजी के साथ अधिक से अधिक बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से ही इनके तीन और साथियों का दस्ता बुला लिया है। विभाग इन बंदरों को पकड़ कर ट्रामा सेंटर में भेज कर इनकी नसबंदी करवा रहा है। तीन दिन बाद इन्हें उन्हीं जगह पर छोड़ा जाएगा, जहां से इन्हें कैद किया गया। मथुरा से बुलाए गई टीम और वन्य प्राणी प्रभाग की टीम ने 50 के करीब बंदरों को पकड़ लिया है। प्रत्येक बंदर के पकड़ने पर विभाग 700 रुपये की रकम अदा करेगा।
शहर के लोगों में बंदरों ने अपना इतना खौफ पैदा कर दिया है कि लोग घरों में पिंजरे की तरह कैद होने को मजबूर हो गए हैं। लोग घरों की बालकनी को जाली से बंद कर रहे हैं। सुबह-शाम महिलाओं और बुजुर्गों को स्कूल से बच्चों को लाते समय अक्सर बंदर इन्हें अपना शिकार बना लेते हैं।
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शहरी वन विभाग के डीएफओ इंद्र कुमार ने बताया कि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से 50 बंदर पिंजरे में कैद कर नसबंदी के लिए ट्रामा सेंटर भेज दिए गए हैं।