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Shimla News: चेक बाउंस मामले में 6 महीने की कैद, 10 लाख का जुर्माना
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न्यायिक मजिस्ट्रेट विभूति की अदालत का फैसला
साल 2019 में बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक से लिया था ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने चेक बाउंस मामले में ठियोग निवासी रमेश शर्मा को दोषी करार देते हुए छह महीने की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 10 लाख रुपये की राशि का जुर्माना भी देना होगा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट विभूति बहुगुणा की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। मुआवजे का भुगतान न करने पर दोषी को एक महीने की अवधि के लिए साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। दोषी रमेश शर्मा ने व्यावसायिक उद्देश्य के लिए बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक से 45 लाख का ऋण लिया था जिसे वह ब्याज सहित चुकाने में असमर्थ हो गया। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने 31 अक्तूबर 2011 में बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक शाखा संजौली से 45 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण मासिक किस्तों के साथ 10 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ चुकाने के लिए समझौता हुआ था। लेकिन आरोपी भुगतान करने में विफल रहा। 6 नवंबर 2019 को शिकायतकर्ता को 8.61 लाख की राशि का एक चेक जारी किया लेकिन चेक बाउंस हो गया। इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत न्यायालय के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते यह फैसला सुनाया है।
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साल 2019 में बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक से लिया था ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने चेक बाउंस मामले में ठियोग निवासी रमेश शर्मा को दोषी करार देते हुए छह महीने की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 10 लाख रुपये की राशि का जुर्माना भी देना होगा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट विभूति बहुगुणा की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। मुआवजे का भुगतान न करने पर दोषी को एक महीने की अवधि के लिए साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। दोषी रमेश शर्मा ने व्यावसायिक उद्देश्य के लिए बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक से 45 लाख का ऋण लिया था जिसे वह ब्याज सहित चुकाने में असमर्थ हो गया। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने 31 अक्तूबर 2011 में बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक शाखा संजौली से 45 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण मासिक किस्तों के साथ 10 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ चुकाने के लिए समझौता हुआ था। लेकिन आरोपी भुगतान करने में विफल रहा। 6 नवंबर 2019 को शिकायतकर्ता को 8.61 लाख की राशि का एक चेक जारी किया लेकिन चेक बाउंस हो गया। इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत न्यायालय के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते यह फैसला सुनाया है।
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