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फिटनेस सर्टिफिकेट के बाद ही आजाद होगी मादा तेंदुआ
Updated Mon, 30 Oct 2017 10:47 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। ढैंडा में पकड़ी गई मादा तेंदुआ अगर इंसानों के साथ घुल मिल गई तो उसे चिड़ियाघर में कैद रखा जाएगा। वन्य प्राणी प्रभाग के चिकित्सकों के फिटनेस प्रमाणपत्र देने के बाद ही प्रभाग उसे दोबारा आजाद करेगा।
सोमवार को टूटीकंडी रिसर्च सेंटर में चिकित्सकों ने एक साल की इस मादा तेंदुआ की जांच की। चिकित्सकों और प्रभाग की टीम इस बात से हैरान हैं कि तेंदुआ भरी दोपहर आवासीय क्षेत्र में कैसे आ गया। राजधानी शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों के लोगों में तेंदुओं का खौफ बना हुआ है। तेंदुओं को कैद करने के लिए वन्य प्राणी प्रभाग ने शहर में आठ जगह पिंजरे लगा रखे हैं। इसी बीच बीते शनिवार को ढैंडा में स्थानीय लोगों को दोपहर के समय ही बस्ती में तेंदुआ दिख गया। लोग उसके खौफ से घरों में कैद हो गए। वन विभाग को इसकी सूचना दी गई और टीम ने पहुंचकर बस्ती के आसपास उसे खोजा और शाम के वक्त इंजेक्शन लगाकर उसे बेहोश कर कैद कर दिया।
अभी शिकार से अंजान है तेंदुआ
वन्य प्राणी प्रभाग ने जिस मादा तेंदुआ को पकड़ा है, वह अभी शिकार से पूरी तरह से अंजान है। पकड़े गए तेंदुए की उम्र एक साल से भी कम आंकी जा रही है। प्रभाग के चिकित्सकों के मुताबिक उसने अभी तक शिकार नहीं किया।
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क्या तेंदुआ कर पाएगा शिकार
चिकित्सकों की जांच में खास तौर पर यह देखा जाएगा कि तेंदुआ शिकार करने लायक है कि नहीं। कहीं तेंदुए को इंसानों के साथ घुलने मिलने की आदत तो नहीं पड़ गई। ऐसा होने पर यदि उसे जंगल में छोड़ा गया तो वह इंसानों के पीछे चलना और बस्ती में जाना शुरू कर देगा। अगर वह शिकार करने के लायक नहीं है तो वह भूख मिटाने के लिए बस्तियों का रुख कर सकता है।
कोट्स
जांच के बाद ही छोड़ा जाएगा तेंदुआ
वन्य प्राणी प्रभाग के डीएफो राजेश शर्मा ने बताया कि पहले चिकित्सक पूरी तरह से तेंदुए की जांच करेंगे। चिकित्सकों के फिटनेस प्रमाण पत्र देने के बाद ही इसे जंगल में छोड़ा जाएगा।
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शिमला। ढैंडा में पकड़ी गई मादा तेंदुआ अगर इंसानों के साथ घुल मिल गई तो उसे चिड़ियाघर में कैद रखा जाएगा। वन्य प्राणी प्रभाग के चिकित्सकों के फिटनेस प्रमाणपत्र देने के बाद ही प्रभाग उसे दोबारा आजाद करेगा।
सोमवार को टूटीकंडी रिसर्च सेंटर में चिकित्सकों ने एक साल की इस मादा तेंदुआ की जांच की। चिकित्सकों और प्रभाग की टीम इस बात से हैरान हैं कि तेंदुआ भरी दोपहर आवासीय क्षेत्र में कैसे आ गया। राजधानी शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों के लोगों में तेंदुओं का खौफ बना हुआ है। तेंदुओं को कैद करने के लिए वन्य प्राणी प्रभाग ने शहर में आठ जगह पिंजरे लगा रखे हैं। इसी बीच बीते शनिवार को ढैंडा में स्थानीय लोगों को दोपहर के समय ही बस्ती में तेंदुआ दिख गया। लोग उसके खौफ से घरों में कैद हो गए। वन विभाग को इसकी सूचना दी गई और टीम ने पहुंचकर बस्ती के आसपास उसे खोजा और शाम के वक्त इंजेक्शन लगाकर उसे बेहोश कर कैद कर दिया।
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अभी शिकार से अंजान है तेंदुआ
वन्य प्राणी प्रभाग ने जिस मादा तेंदुआ को पकड़ा है, वह अभी शिकार से पूरी तरह से अंजान है। पकड़े गए तेंदुए की उम्र एक साल से भी कम आंकी जा रही है। प्रभाग के चिकित्सकों के मुताबिक उसने अभी तक शिकार नहीं किया।
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क्या तेंदुआ कर पाएगा शिकार
चिकित्सकों की जांच में खास तौर पर यह देखा जाएगा कि तेंदुआ शिकार करने लायक है कि नहीं। कहीं तेंदुए को इंसानों के साथ घुलने मिलने की आदत तो नहीं पड़ गई। ऐसा होने पर यदि उसे जंगल में छोड़ा गया तो वह इंसानों के पीछे चलना और बस्ती में जाना शुरू कर देगा। अगर वह शिकार करने के लायक नहीं है तो वह भूख मिटाने के लिए बस्तियों का रुख कर सकता है।
कोट्स
जांच के बाद ही छोड़ा जाएगा तेंदुआ
वन्य प्राणी प्रभाग के डीएफो राजेश शर्मा ने बताया कि पहले चिकित्सक पूरी तरह से तेंदुए की जांच करेंगे। चिकित्सकों के फिटनेस प्रमाण पत्र देने के बाद ही इसे जंगल में छोड़ा जाएगा।