जीएसटी से हिमाचल के राजस्व पर पड़ी जबरदस्त मार, इतने फीसदी घाटा
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इसी साल जुलाई माह से लागू नई कर व्यवस्था जीएसटी की पहाड़ी राज्य हिमाचल के राजस्व पर जबरदस्त मार पड़ी है। चार महीने बाद ही प्रदेश की राजस्व आय में करीब 40 फीसदी की कमी आ गई है। इसमें मुख्य रूप से जीएसटी को ही सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
केंद्र सरकार ने राज्यों में जीएसटी के प्रतिकूल असर की सूरत में घाटा पूरा करने के अलावा हर साल 14 फीसदी की अतिरिक्त क्षतिपूर्ति का प्रावधान रखा है। यह व्यवस्था पांच साल तक लागू रहेगी। इसे देखते हुए हिमाचल सरकार ने केंद्र से अब क्षतिपूर्ति की मांग उठाई है। हिमाचल का वर्तमान में राजस्व लगभग सात हजार करोड़ रुपये है।
इसमें 63 फीसदी सेल्स टैक्स, 17 फीसदी राज्य आबकारी और शेष 20 फीसदी राजस्व अन्य संसाधनों से मिलता है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो राजस्व में कमी के लिए जीएसटी प्रमुख कारण है। हालांकि, इसके अन्य कारण भी हैं।
पर्यटन क्षेत्र में मांगा समान टैक्स स्लैब
आबकारी एवं कराधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर का कहना है कि चूंकि केंद्र ने राजस्व घटने पर वित्तीय सहायता का प्रावधान रखा है इसलिए केंद्र को पिछले चार महीने में राजस्व में हुए वित्तीय नुकसान की जानकारी दी गई है।
साथ ही उनसे वित्तीय मदद देने की मांग की गई है। कपूर ने कहा कि गुवाहाटी की बैठक में हिमाचल की ओर से प्रतिपूर्ति के अलावा हिमाचल ने छोटे व्यवसायियों के लिए जीएसटी जमा करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग की है।
हिमाचल के राजस्व में पर्यटन क्षेत्र का करीब सात फीसदी योगदान है। जीएसटी लागू होने के बाद कई श्रेणी में टैक्स बंटने से सूबे में सबसे ज्यादा यही क्षेत्र प्रभावित हुआ है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने मांग की है कि पर्यटन क्षेत्र में समान टैक्स स्लैब व्यवस्था लागू की जाए ताकि इस क्षेत्र को हो रहे नुकसान को कम किया जा सके।
कर छूट का दायरा भी छोटा
हिमाचल में जीएसटी के अंतर्गत व्यापारियों को छूट का दायरा भी छोटा है। सिर्फ दस लाख सालाना आय वाले व्यापारियों को जीएसटी में छूट दी गई है। ये व्यवस्था हिमाचल समेत कई अन्य राज्यों ने जीएसटी काउंसिल की बैठक के दौरान लागू करने की मांग की थी। इसकी वजह से प्रदेश में व्यापारियों को पहले ही खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।