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जीएसटी से हिमाचल के राजस्व पर पड़ी जबरदस्त मार, इतने फीसदी घाटा

Sun, 12 Nov 2017 04:43 PM IST
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 12 Nov 2017 04:43 PM IST
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40 percent loss of revenue in Himachal after goods and services tax

इसी साल जुलाई माह से लागू नई कर व्यवस्था जीएसटी की पहाड़ी राज्य हिमाचल के राजस्व पर जबरदस्त मार पड़ी है। चार महीने बाद ही प्रदेश की राजस्व आय में करीब 40 फीसदी की कमी आ गई है। इसमें मुख्य रूप से जीएसटी को ही सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

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केंद्र सरकार ने राज्यों में जीएसटी के प्रतिकूल असर की सूरत में घाटा पूरा करने के अलावा हर साल 14 फीसदी की अतिरिक्त क्षतिपूर्ति का प्रावधान रखा है। यह व्यवस्था पांच साल तक लागू रहेगी। इसे देखते हुए हिमाचल सरकार ने केंद्र से अब क्षतिपूर्ति की मांग उठाई है। हिमाचल का वर्तमान में राजस्व लगभग सात हजार करोड़ रुपये है।
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इसमें 63 फीसदी सेल्स टैक्स, 17 फीसदी राज्य आबकारी और शेष 20 फीसदी राजस्व अन्य संसाधनों से मिलता है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो राजस्व में कमी के लिए जीएसटी प्रमुख कारण है। हालांकि, इसके अन्य कारण भी हैं।

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पर्यटन क्षेत्र में मांगा समान टैक्स स्लैब

40 percent loss of revenue in Himachal after goods and services tax

आबकारी एवं कराधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर का कहना है कि चूंकि केंद्र ने राजस्व घटने पर वित्तीय सहायता का प्रावधान रखा है इसलिए केंद्र को पिछले चार महीने में राजस्व में हुए वित्तीय नुकसान की जानकारी दी गई है।

साथ ही उनसे वित्तीय मदद देने की मांग की गई है। कपूर ने कहा कि गुवाहाटी की बैठक में हिमाचल की ओर से प्रतिपूर्ति के अलावा हिमाचल ने छोटे व्यवसायियों के लिए जीएसटी जमा करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग की है।

हिमाचल के राजस्व में पर्यटन क्षेत्र का करीब सात फीसदी योगदान है। जीएसटी लागू होने के बाद कई श्रेणी में टैक्स बंटने से सूबे में सबसे ज्यादा यही क्षेत्र प्रभावित हुआ है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने मांग की है कि पर्यटन क्षेत्र में समान टैक्स स्लैब व्यवस्था लागू की जाए ताकि इस क्षेत्र को हो रहे नुकसान को कम किया जा सके। 

कर छूट का दायरा भी छोटा
हिमाचल में जीएसटी के अंतर्गत व्यापारियों को छूट का दायरा भी छोटा है। सिर्फ दस लाख सालाना आय वाले व्यापारियों को जीएसटी में छूट दी गई है। ये व्यवस्था हिमाचल समेत कई अन्य राज्यों ने जीएसटी काउंसिल की बैठक के दौरान लागू करने की मांग की थी। इसकी वजह से प्रदेश में व्यापारियों को पहले ही खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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