नई सुविधा: शिमला में लगेंगे 34 हेल्थ एटीएम, सभी टेस्ट होंगे निशुल्क, 20 मिनट में आएगी रिपोर्ट
शहरी विकास, सहकारिता, विधि और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज से अमर उजाला कार्यालय में संवाद हुआ। उन्होंने सरकार की भविष्य की कई योजनाओं का खुलासा किया। सबसे बड़ी राहत शिमला, कुल्लू, मनाली, कसौली और धर्मशाला में
ढाई मंजिला भवन निर्माण को लेकर एनजीटी में फंसे पेच पर सरकार हाईकोर्ट में याचिका दायर करने जा रही है। लखनऊ की तर्ज पर शिमला शहर के सभी 34 वार्डों में हेल्थ एटीएम से निशुल्क टेस्ट सुविधा देने की तैयारी है।
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शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा है कि शिमला नगर निगम की परिधि में आने वाले 34 वार्डों में हेल्थ एटीएम लगाए जाएंगे। इनमें रूटीन के सभी टेस्ट मुफ्त होंगे। बीस मिनट में रिपोर्ट भी मिल जाएगी। एटीएम में एक कर्मचारी होगा, जो टेस्ट से संबंधित सारी औपचारिकताओं को पूरी करेगा। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले वह एक सेमिनार में लखनऊ गए थे। वहां उन्हें इस बारे में जानकारी मिली। यह मुंबई की कंपनी है, जो इस तरह के एटीएम लगाती है। लखनऊ में यह शुरू हो चुका है। इससे मोबाइल टेस्ट वैन की जरूरत भी नहीं रहेगी। लोगों को अस्पतालों में लंबी लाइनों से भी निजात मिल जाएगी। एक एटीएम की कीमत करीब 15 लाख रुपये है। इसको लेकर संबंधित कंपनी ने सरकार के समक्ष प्रस्तुति दे दी है। मंजूरी के बाद ये हेल्थ एटीएम शिमला के हर वार्ड में स्थापित कर दिए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसे शुरू किया जाएगा।
हेल्थ एटीएम में होंगे ये टेस्ट
हेल्थ एटीएम के माध्यम से रैपिड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, गर्भावस्था, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, एचआईवी, ग्लूकोज, हीमोग्लोबिन, लिपिड प्रोफाइल आदि जैसी जांचें सरलता से लोगों को उपलब्ध हो पाएंगी। बॉडी मास इंडेक्स, ब्लड प्रेशर, मेटाबॉलिक ऐज, बॉडी फैट, हाईड्रेशन, पल्स रेट, मसल मास, शरीर का तापमान, शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा, वजन सहित पैरामीटर की जांच भी हो सकेगी। बॉडी स्क्रीनिंग के लिए 16 तरह की जांच भी तत्काल हो सकेगी।
एनजीटी के ऑर्डर को हाईकोर्ट में चुनौती देगी हिमाचल सरकार
हिमाचल प्रदेश सरकार जल्द एनजीटी के ढाई मंजिल से ज्यादा ऊंचे भवन पर रोक के आदेश को हाईकोर्ट में रिट पिटीशन के जरिये चुनौती देगी। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि ट्रिब्यूनल के रोक के आदेश की वजह से राजधानी में सरकारी बिल्डिंगों तक के निर्माण और नक्शे पास कराने में मुश्किल आ रही है। साथ ही आम लोगों को भी इससे खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में कोर्ट में ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अलग से याचिका दाखिल की गई थी। उस केस के लिए सॉलिसिटर जनरल को लगाया गया है। बताया कि चूंकि एनजीटी ने कैंसर अस्पताल के निर्माण में तो इजाजत दे दी, लेकिन अब आईजीएमसी के नए ओपीडी ब्लॉक के लिए रोक के आदेश को आगे कर दिया है, जिससे अब वह फंस गया है। इसी तरह राज्य सचिवालय के नए बन रहे एक्सटेंशन भवन का मामला भी उलझ गया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं बिंदुओं पर एनजीटी के दखल को चुनौती दी जाएगी।