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एचपीयू का पुस्तकालय भवन होगा चकाचक
Updated Wed, 22 Nov 2017 10:26 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। रूसा की केंद्र से मिली ग्रांट के सही इस्तेमाल करने और विवि में आधारभूत ढांचागत सुविधाएं बढ़ाने के लिए बुधवार को विवि में प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग कमेटी की कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें अब तक रूसा से मिली कुल 18 करोड़ की ग्रांट में शेष बची राशि को खर्च करने के लिए कई प्लानों पर चर्चा की गई। इसमें फैसला लिया गया कि सालों से मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए तरस रहे एचपीयू की पहचान पुस्तकालय भवन की मरम्मत को अलग से प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए निर्माण विंग की रिपेयर एंड मेंटेनेंस विंग को जल्द बाहरी विशेषज्ञों की सेवाएं लेकर कम से कम खर्च में बेहतरीन रेनोवेशन प्रोजेक्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसमें पुस्तकालय भवन के सभी छह से सात मंजिल की पूरी तरह से मरम्मत, रखरखाव और रंगरोगन किया जाना प्रस्तावित है। निर्माण विंग के अधिकारियों के आर्किटेक्ट के पद रिक्त होने की बात पर निर्णय हुआ कि इसके लिए अन्य विभाग या निजी वास्तुकारों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं। बैठक में आम सहमति से निर्णय हुआ कि यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल एमबीए विभाग के सामने पड़ी खाली जमीन पर एक रूसा की ग्रांट से अकादमिक ब्लॉक बने। इसमें परीक्षा हॉल, परीक्षा संबंधित सामग्री, सेमीनार हॉल और अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बैठने के लिए कमरों का निर्माण किया जाए। बैठक में कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने कहा कि रूसा में मिले बजट का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों से रूसा के तहत प्रतिवेदन तैयार कर न केवल शैक्षणिक अधोसंरचना बल्कि स्वच्छता अभियान के तहत कार्यक्रम करने को कहा। वहीं बैठक में रूसा की मिली कुल 18 करोड़ की ग्रांट में से बची करीब 10 करोड़ से लैब के उपकरणों की खरीद आदि पर भी निर्णय हुए हैं।
फैसलों पर हुए कार्य को लेकर जल्द प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी। अधिष्ठाता अध्ययन आचार्य गिरिजा शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी, अधिष्ठाता योजना आचार्य एमएस चौहान, अधिशासी अभियंता ईं. संजय शर्मा और ईं. अशोक राणा के अतिरिक्त भंडार क्रय अधिकारी रवि पटियाल मौजूद रहे।
अब तक रूसा के तहत मिला 18 करोड़
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को 2015 से यूजी में रूसा लागू होने के बाद से लेकर अब तक कुल 18 करोड़ का बजट मिला है। इसमें से करीब एक करोड़ परिसर के भवनों की मरम्मत और सफेदी रंग रोगन पर खर्च हुए हैं। वहीं कुछ ब्वॉयज और गर्ल्स छात्रावासों के किचन, टॉयलेट, बाथरूम मरम्मत, विद्योत्तमा छात्रावास की एक मंजिल का निर्माण किए जाने के साथ ही कई विभागों में स्मार्ट क्लास रूम बनाने के साथ लैब आदि बनाने पर भी करोड़ों में बजट खर्च हुआ है। जगह के अभाव के चलते कोई बड़ा ढांचागत विकास कार्य नहीं हो पाया है। अभी तक करीब 10 करोड़ की राशि शेष बची है।
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शिमला। रूसा की केंद्र से मिली ग्रांट के सही इस्तेमाल करने और विवि में आधारभूत ढांचागत सुविधाएं बढ़ाने के लिए बुधवार को विवि में प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग कमेटी की कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें अब तक रूसा से मिली कुल 18 करोड़ की ग्रांट में शेष बची राशि को खर्च करने के लिए कई प्लानों पर चर्चा की गई। इसमें फैसला लिया गया कि सालों से मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए तरस रहे एचपीयू की पहचान पुस्तकालय भवन की मरम्मत को अलग से प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए निर्माण विंग की रिपेयर एंड मेंटेनेंस विंग को जल्द बाहरी विशेषज्ञों की सेवाएं लेकर कम से कम खर्च में बेहतरीन रेनोवेशन प्रोजेक्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसमें पुस्तकालय भवन के सभी छह से सात मंजिल की पूरी तरह से मरम्मत, रखरखाव और रंगरोगन किया जाना प्रस्तावित है। निर्माण विंग के अधिकारियों के आर्किटेक्ट के पद रिक्त होने की बात पर निर्णय हुआ कि इसके लिए अन्य विभाग या निजी वास्तुकारों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं। बैठक में आम सहमति से निर्णय हुआ कि यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल एमबीए विभाग के सामने पड़ी खाली जमीन पर एक रूसा की ग्रांट से अकादमिक ब्लॉक बने। इसमें परीक्षा हॉल, परीक्षा संबंधित सामग्री, सेमीनार हॉल और अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बैठने के लिए कमरों का निर्माण किया जाए। बैठक में कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने कहा कि रूसा में मिले बजट का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों से रूसा के तहत प्रतिवेदन तैयार कर न केवल शैक्षणिक अधोसंरचना बल्कि स्वच्छता अभियान के तहत कार्यक्रम करने को कहा। वहीं बैठक में रूसा की मिली कुल 18 करोड़ की ग्रांट में से बची करीब 10 करोड़ से लैब के उपकरणों की खरीद आदि पर भी निर्णय हुए हैं।
फैसलों पर हुए कार्य को लेकर जल्द प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी। अधिष्ठाता अध्ययन आचार्य गिरिजा शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी, अधिष्ठाता योजना आचार्य एमएस चौहान, अधिशासी अभियंता ईं. संजय शर्मा और ईं. अशोक राणा के अतिरिक्त भंडार क्रय अधिकारी रवि पटियाल मौजूद रहे।
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अब तक रूसा के तहत मिला 18 करोड़
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को 2015 से यूजी में रूसा लागू होने के बाद से लेकर अब तक कुल 18 करोड़ का बजट मिला है। इसमें से करीब एक करोड़ परिसर के भवनों की मरम्मत और सफेदी रंग रोगन पर खर्च हुए हैं। वहीं कुछ ब्वॉयज और गर्ल्स छात्रावासों के किचन, टॉयलेट, बाथरूम मरम्मत, विद्योत्तमा छात्रावास की एक मंजिल का निर्माण किए जाने के साथ ही कई विभागों में स्मार्ट क्लास रूम बनाने के साथ लैब आदि बनाने पर भी करोड़ों में बजट खर्च हुआ है। जगह के अभाव के चलते कोई बड़ा ढांचागत विकास कार्य नहीं हो पाया है। अभी तक करीब 10 करोड़ की राशि शेष बची है।
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