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स्मार्ट सिटी से बाहर होंगे 300 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट

Fri, 10 Dec 2021 10:30 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Dec 2021 10:30 PM IST
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300 Project out from smart city mission
प्रोजेक्ट की समय सीमा खत्म होता देख स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने तैयार किया प्रस्ताव
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क्रॉसर
एक हजार करोड़ की जगह अब सात सौ करोड़ के होंगे काम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी को स्मार्ट बनाने के लिए तैयार किए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर सरकार बड़ा फैसला लेने जा रही है। एनजीटी, फॉरेस्ट क्लीयरेंस और एनओसी के फेर में फंसे कई मेगा प्रोजेक्टों के काम अब शहर में नहीं होंगे। इन्हें सूची से बाहर किया जा रहा है।
स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने इस बारे में प्रस्ताव तैयार कर लिया है। तीन सौ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट सूची से बाहर करने की तैयारी है। सोमवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली निदेशक मंडल की बैठक में इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। चार साल पहले राजधानी को स्मार्ट बनाने के लिए नगर निगम ने 2905 करोड़ रुपये का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसमें शहरवासियों को कई बड़े सपने दिखाए। शहर में आधा दर्जन एस्केलेटर, गोल्फ कार्ट, माडर्न बसस्टैंड, स्मार्ट स्टॉपेज, स्मार्ट पार्किंग, न्यू ट्रांसपोर्ट सिस्टम, गरीबों के लिए नए आवास जैसे प्रोजेक्ट करने की योजना बनी थी। लेकिन बीते सालों में महज एक हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्टों पर ही काम हो पाया। इनमें भी तीन सौ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिनमें एनजीटी, फोरेस्ट क्लीयरेंस और दूसरे महकमों से एनओसी लेने के कारण टेंडर प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो पा रही है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से शिमला स्मार्ट सिटी प्रबंधन को पत्र मिला है जिसमें मार्च तक इस प्रोजेक्ट पूरा करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में स्मार्ट सिटी प्रबंधन भी क्लीयरेंस के फेर में फंसे प्रोजेक्टों पर समय बर्बाद करने की बजाय उन कामों पर ध्यान देने जा रहा है, जिनके काम पूरे हो सकते हैं। यदि बाद में समय बचता है तो इन पर काम किया जा सकता है।
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इन प्रोजेक्टों में नहीं मिली है क्लीयरेंस
शहर में जाखू मंदिर एस्केलेटर, खलीनी में वेंडिंग जोन प्रोजेक्ट में फोरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिली है। कई पार्किंग भी क्लीयरेंस के कारण शुरू नहीं हो पा रही। कृष्णानगर समेत शहर के कोर एरिया में व्यावसायिक भवन बनाने जैसे कई प्रोजेक्ट एनजीटी की पाबंदी से अटके पड़े हैं। कृष्णानगर और काम्बरमेयर नाले को स्मार्ट बनाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी से एनओसी नहीं आ रही। रिज को बचाने के लिए बने 25 करोड़ के प्रोजेक्ट को भी क्लीयरेंस नहीं मिली है। यह अब सूची से बाहर किए जा सकते हैं।
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आपस में लड़ते रहे महकमे, लैप्स होगा करोड़ों रुपया
राजधानी को स्मार्ट बनाने के लिए केंद्र से करोड़ों रुपया मिलना है लेकिन सरकारी महकमों की आपसी लड़ाई में कई सौ करोड़ रुपया लैप्स हो जाएगा। नगर निगम और लोनिवि ने शहर में बिना वन विभाग की मंजूरी लिए कई प्रोजेक्ट बनाए। कई का काम भी शुरू कर दिया जो लटका पड़ा है। इसमें जिन कामों के लिए सरकारी दफ्तर या स्टोर शिफ्ट होने थे वह शिफ्ट करने को तैयार नहीं। ढली टनल के लिए एफसीआई का स्टोर खाली नहीं हो रहा तो निगम से एक करोड़ का पार्क नहीं बन पा रहा। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कई बार इन महकमों को मिलकर काम करने को कहा, लेकिन इनकी आपसी लड़ाई से शहर को नुकसान होने जा रहा है।
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