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श्रीखंड महादेव यात्रा: आठ सालों में अब तक इतने लोगों ने गंवाई जान

Sun, 29 Jul 2018 12:46 PM IST
सुभाष सेन, अमर उजाला, ब्रौ (रामपुर बुशहर)
सुभाष सेन, अमर उजाला, ब्रौ (रामपुर बुशहर) Updated Sun, 29 Jul 2018 12:46 PM IST
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27 people died in shrikhand mahadev yatra in Eight years since 2011

देश की कठिन यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव यात्रा के दौरान मरने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है। वर्ष 2011 से प्रशासनिक तौर पर करवाई जा रही इस यात्रा में अब तक कुल 27 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। जिनमें अधिकतर ऑक्सीजन की कमी के कारण हादसे का शिकार बने हैं। वहीं, इस वर्ष यात्रा में अब 4 लोगों की मौत हुई है।

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15 से 31 जुलाई तक चलने वाली यात्रा पर प्रशासन ने भारी बारिश के कारण अब पूरी तरह से रोक लगा दी है। अब यात्रा पर किसी यात्री को नहीं भेजा जा रहा है। कुल्लू जिले के निरमंड खंड के सिंहगाड़ से शुरू होने वाली 35 किलोमीटर की पैदल श्रीखंड महादेव यात्रा में इस वर्ष 5800 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण करवाया है।
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हालांकि प्रशासन की मनाही के बाद भी वाया फांचा-जघोरी होकर श्रद्धालु श्रीखंड यात्रा के लिए जाते रहे हैं। प्रशासनिक तौर पर यह यात्रा वाया जांओं होकर करवाई जाती है। इस यात्रा के दौरान प्रशासन ने जहां इस बार बेस कैंपों की संख्या 4 से बढ़ाकर 5 कर दी गई थी। वहीं अभी भी कई श्रद्धालु वाया ज्यूरी होकर श्रीखंड महादेव के दर्शन को जा रहे हैं।

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यात्रा में ऑक्सीजन की कमी से होती है सबसे अधिक मौतें

27 people died in shrikhand mahadev yatra in Eight years since 2011

समुद्रतल से करीब 18000 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव के दर्शन को हर वर्ष हजारों श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचते हैं। 35 किलोमीटर की इस यात्रा में श्रद्धालुओं की मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी रहती है।

श्वास लेने में सबसे अधिक परेशानी भीमडवार से श्रीखंड महादेव तक आती है। मैदानी इलाकों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस ऊंचाई पर विपरीत परिस्थिति होती है, जिस कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है।

अधिक ऊंचाई होने के कारण यात्रियों का यहां सांस फूलने लगता है, वहीं वे आराम न कर लगातार चलते रहते हैं। प्र्रशासन के अनुसार मैदानी इलाकों से आने वाले यात्रियों को यह यात्रा 5 से 7 दिन में पूरी करनी चाहिए और जगह-जगह आराम करना चाहिए।

प्रशासन यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रयासरत

27 people died in shrikhand mahadev yatra in Eight years since 2011

जिला प्रशासन श्रीखंड यात्रा को सुगम बनाने के लिए हर वर्ष कोई न कोई कार्य कर रहा है। इस यात्रा पर हर वर्ष प्रशासन की ओर से करीब एक करोड़ रुपये का खर्च किया जाता है।

इस वर्ष भी यात्रा को सुगम बनाने के लिए 4 की जगह 5 बेस कैंप, हर बेस कैंप में एक डॉक्टर और दो फार्मासिस्टों की तैनाती की गई थी, लेकिन बावजूद इसके यात्रा में श्रद्धालुओं की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा है।

लोगों के अनुसार प्रशासन को चाहिए कि मैदानी इलाकों से आने वाले यात्रियों को तय समय में यात्रा न कर 5 से 7 दिन में यात्रा करवाएं। इसके अलावा वाया फांचा जघोरी होकर जाने वाले यात्रियों पर रोक लगाई जाए।

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