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सदन में भाजपा की तू-तू मैं मैं पर अब सियासी घमासान
Fri, 01 Feb 2019 10:26 AM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 01 Feb 2019 10:26 AM IST
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नगर निगम के सदन में बुधवार को भाजपा पार्षद और उपमहापौर के बीच हुई तू-तू मैं मैं पर अब सियासी रंग चढ़ने लगा है। जिला कांग्रेस कमेटी और शिमला शहरी इकाई ने इस घटना को शर्मनाक करार दिया है। कांग्रेस ने सदन में हुए इस हंगामे के बाद सदन को बर्खास्त करने तक की मांग प्रदेश सरकार से कर डाली है।
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शहरी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप भुज्जा, कार्यकारी अध्यक्ष अरुण शर्मा, पूर्व विधायक हरभजन सिंह भज्जी, पूर्व विधायक एवं नगर निगम के पूर्व में रहे मेयर आदर्श सूद और सोहन लाल सहित पार्षद सुरेंद्र चौहान, जितेंद्र चौधरी ने कहा कि लगातार सदन में भाजपा के चुनकर आए पार्षद अपने अहम की लड़ाई और अपनी कुंठा को समाप्त करने के लिए सदन को जंग को मैदान बना रहे हैं। इससे सदन की गरिमा गिरी है। भाजपा पार्षद बेलगाम हो चुके हैं। वह सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए सदन में हंगामा कर रहे हैं। इसमें शहर की आम जनता के मुद्दों पर चरचा न करके अपनी राजनीतिक चमकाने का प्रयास कर रहे हैं।
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आम जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गर्मियों में पानी के लिए मचे हाहाकार से शिमला बदनाम हुआ और हल्की बर्फबारी होने पर भी इंतजाम धराशायी हो गए। सदन में भाजपा के पार्षद हाथापाई पर उतरने को आमादा हैं। अपनी नाकामियों को दूर कर जनता को राहत देने के बजाय भाजपा शासित नगर निगम में लगातार हंगामे हो रहे हैं। इस पर रोक लगाई जाए और आम जनता के मुद्दों पर बहस चरचा हो ताकि सहमति से फैसला लेकर काम किए जाएं।
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कौड़ियों के भाव दी जा रही जमीनें
शिमला। कांग्रेस ने शहर में निजी संस्थाओं को कौड़ियों के भाव जमीन देने का कड़ा विरोध किया है। कहा कि सदन में हंगामा कर इन मामलों को दबाने की कोशिश हो रही है। बातें स्मार्ट सिटी की होती हैं लेकिन धरातल पर कुछ भी ऐसा नजर नहीं आ रहा है। भाजपा के अपने ही पार्षद अपने ही महापौर के काम से खुश नहीं हैं कई बार अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास कर चुके हैं।
किराया बढ़ोतरी पर भाजपा एकमत नहीं : कांग्रेस
शहरी कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप भुज्जा और कार्यकारी अध्यक्ष अरुण शर्मा तथा दीपक सुंदरियाल का आरोप है कि निगम के किराया बढ़ोतरी के मुद्दे पर भाजपा पार्षदों की एक राय नहीं है। रिमोट कंट्रोल से चलने वाले ऐसे पार्षदों और महापौर की जनता को जरूरत नहीं है। जनता ने इन पार्षदों पर विश्वास जताया था लेकिन आज उनकी उम्मीदों पर वह खरे नहीं उतर रहे हैं और सदन में हंगामा कर रहे हैं।