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रिपन अस्पताल की डिस्पेंसरी में नहीं मिल रही मुफ्त दवाएं
Fri, 28 Jun 2019 10:52 PM IST
शिमला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jun 2019 10:52 PM IST
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दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) की डिस्पेंसरी में मरीजों को आधी अधूरी दवाएं मिल रही हैं। पर्ची पर डॉक्टरों द्वारा लिखी अधिकांश दवाएं मरीजों को बाहर से ही लानी पड़ती हैं। डॉक्टरों द्वारा डिस्चार्ज स्लिप पर लिखी बलगम को पतला करने, आंखों और आर्थो के मरीजों की आम दवाएं भी डिस्पेंसरी में नहीं हैं।
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जोनल अस्पताल डीडीयू में दूरदराज के क्षेत्रों से इलाज करवाने आए ऐसे ही सैकड़ों मरीजों को शुक्रवार को डिस्पेंसरी से खाली हाथ लौटना पड़ा। दवा न मिलने से मरीजों को बाहर से यह दवाएं लेनी पड़ी। वहीं प्रबंधन का दावा है कि 330 तरह की दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं। लेकिन यह दवाएं क्या यह किसी को कोई पता नहीं। मरीजों को सोजिश और आंखों की दवाओं के लिए भी निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है।
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डीडीयू अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र शर्मा ने बताया कि सरकार ने जो दवाइयां उपलब्ध करवाई हैं वह सभी अस्पताल में उपलब्ध हैं। अगर कोई दवा नहीं मिल पाती है तो मरीज इसकी शिकायत करें, उसे भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
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बाहर से खरीदनी पड़ीं दवाएं
सुंदरनगर के बुधिश चंद अपने बेटे से मिलने आए हैं। आंखों में समस्या आई तो डॉक्टरी जांच करवाई लेकिन डॉक्टरों की लिखी दवाएं यहां नहीं मिली। अब बाहर से महंगी दरों पर खरीदनी पड़ रही है।
डिस्सपेंसरी में दो दवाएं ही मिलीं
कुपवी के वीरेंद्र ने बताया कि मेडिसन वार्ड में पापा दाखिल हैं। शुक्रवार को छुट्टी हुई लेकिन छह में से दो दवाएं ही डिस्पेंसरी में मिलीं। इनमें इंफेक्शन के लिए दी जाने वाली अमोक्सीक्लेव शामिल है। बाकी दवाएं बाहर से ही खरीदनी होगी।
मजबूरी में बाहर से खरीदनी पड़ रहीं दवाएं
चायल की लता देवी कहती है कि उन्हें अर्थराइटिस की बीमारी है। पिछले तीन दिनों से अस्पताल आ रही थीं आज उपचार मिला। अब डॉक्टरों ने कईं दवाएं लिखी लेकिन डिस्पेंसरी में एक भी नहीं मिली। मजबूरी में दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
डिस्पेंसरी में नहीं यह दवाएं
अस्पताल में अस्थमा रोगियों को दी जाने वाली इटोफायलिन और थियोफाइलिन दवाएं भी डिस्पेंसरी में नहीं हैं। इसके अलावा बलगम को पतला करने के लिए दी जाने वाली आम दवाएं भी डिस्पेंसरी में नहीं मिल रहीं। अर्थराइटिस के दौरान डॉक्टरों द्वारा लिखी मारकल और दर्द के लिए दी जाने वाली रोजीचेंप दवाएं तक डिस्पेंसरी में नहीं है।