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खुलासा! फर्जी है इन अध्यापकों की डिग्री, अब जाएगी नौकरी और होगी रिकवरी

Tue, 27 Mar 2018 12:41 PM IST
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर Updated Tue, 27 Mar 2018 12:41 PM IST
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21 TGT ang PGT teachers degrees are fake himachal vigilance bureau investigation

हिमाचल के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत 21 टीजीटी और पीजीटी शिक्षकों की डिग्रियों को बिहार मगध यूनिवर्सिटी ने फर्जी करार दिया है। जांच के लिए बिहार गई विजिलेंस टीम को इन शिक्षकों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। लिहाजा, टीम लौट आई है।

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अब जल्द ही राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इन शिक्षकों की नौकरी से छुट्टी तय मानी जा रही है। धोखाधड़ी का केस दर्ज कर इनसे वेतन की रिकवरी भी की जा सकती है। ‘अमर उजाला’ ने  25 मार्च के अंक में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। 

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मगध यूनिवर्सिटी में मिले ये सबूत

21 TGT ang PGT teachers degrees are fake himachal vigilance bureau investigation

विजिलेंस के सूत्र डिग्रियां फर्जी होने की बात मान रहे हैं लेकिन अफसर खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं। डीएसपी विजिलेंस हमीरपुर बीडी भाटिया ने कहा कि इस मामले में केवल उच्च अधिकारी ही बता पाएंगे।

उधर, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो मंडी के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु वर्मा ने कहा कि विजिलेंस को दो दर्जन अध्यापकों की फर्जी डिग्रियों की शिकायत मिली है।

विशेष जांच यूनिट को बिहार मगध यूनिवर्सिटी भेजा गया था। टीम लौट आई है, लेकिन सारा रिकॉर्ड जांच अधिकारी के पास है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट आने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।  

यह है मामला

21 TGT ang PGT teachers degrees are fake himachal vigilance bureau investigation

राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो शिमला हेडक्वार्टर में एक व्यक्ति ने फर्जी डिग्रियों की शिकायत की है। आरोप है कि वर्ष 2004-05 में प्रदेश शिक्षा विभाग में टीजीटी की भर्तियों में करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों ने फर्जी डिग्रियां दिखाकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।

शिकायत में बताया गया है कि 22 अध्यापकों में से 12 पूर्व सैनिक कोटे से भर्ती हुए हैं जबकि 10 ओपन कैटेगिरी के हैं। टीजीटी भर्ती के बाद कुछेक अध्यापक बाद में पदोन्नत होकर पीजीटी बन गए।

शिकायत के बाद हमीरपुर विजिलेंस विभाग की एक टीम बिहार स्थित मगध यूनिवर्सिटी के लिए रवाना हुई। लंबी जांच पड़ताल के बाद 22 में से 21 अध्यापकों का विश्वविद्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। 

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