उफनती नदी में 10 घंटे तक जिंदगी के लिए जूझते रहे 21 लोग
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उत्तराखंड और हिमाचल को विभाजित करने वाली यमुना नदी का जलस्तर एकाएक बढ़ने से गुज्जर समुदाय के 21 लोग करीब दस घंटे तक बीच में फंसे रहे।
गुज्जर समुदाय के दो परिवार मवेशियों को लेकर नदी के बीच डेरा डालकर रह रहे थे। मूसलाधार बारिश से अचानक जलस्तर बढ़ गया और वे फंस गए। शुक्रवार देर रात को उत्तराखंड और हिमाचल प्रशासन को इसकी सूचना दी गई।
एनडीआरएफ की टीम ने चार घंटे के रेस्क्यू के बाद नदी के बीच स्थित टापू में फंसे 4 महिलाओं, 12 बच्चों समेत सभी 21 लोगों की जान बचाई। वहीं, 7 घोड़ों को सुरक्षित निकाला गया।
उत्तराखंड से एनडीआरएफ टीम भी मौके पर पहुंची
उत्तराखंड से एनडीआरएफ टीम एसआई नरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में पहुंची। पांवटा से एसडीएम एचएस राणा, डीएसपी प्रमोद चौहान और उत्तराखंड से विकासनगर के तहसीलदार प्रकाश साह पहुंचे।
एसडीएम एचएस राणा ने बताया कि सूचना मिलने पर देहरादून से पहुंची एनडीआरएफ, विकासनगर प्रशासनिक टीम, सिंगपुरा चौकी पुलिस, स्थानीय गोताखोर-ग्रामीण तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से टापू में फंसे 21 लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका।
उधर, चंडीगढ़-मनाली एनएच पर बिलासपुर के जामली के पास एक ट्रक पहाड़ी से गिरी चट्टानों की चपेट में आ गया। चट्टान इतनी भारी भरकम थी कि अपने साथ ट्रक को खाई में ले गई।
हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रक चालक गंभीर घायल हो गया। हादसा शनिवार सुबह करीब 11.30 बजे के करीब हुआ है।