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बंद होंगे पांच गेस्ट हाउस, कोचिंग सेंटर से भी उतरने लगे बोर्ड
Updated Wed, 28 Mar 2018 10:35 PM IST
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घरों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के मामले में सुनवाई आज
नगर निगम हाईकोर्ट में पेश करेगा अपनी रिपोर्ट
भवन मालिक भी न्यायालय में रख सकते हैं पक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। न्यू शिमला के रिहायशी भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के मामले में वीरवार को प्रदेश हाईकोर्ट अहम फैसला सुना सकता है। नगर निगम से लेकर इलाके के सैकड़ों भवन मालिकों की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं।
इस मामले को लेकर नगर निगम अब तक की रिपोर्ट कोर्ट में रखने वाला है। नगर निगम ने इस मामले में अब तक 215 भवन मालिकों को नोटिस जारी किए हैं जिन्होंने अपने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चला रखी हैं। इन्हें सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। जवाब के तौर पर भवन का नक्शा और चेंज ऑफ लैंड यूज के दस्तावेज दिखाने होंगे। ऐसा न करने पर भवन का बिजली और पानी काट दिया जाएगा। उधर, इलाके के भवन मालिक खुद भी इस मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं। वीरवार को ये भी कोर्ट में राहत की मांग कर सकते हैं। अब तक 50 भवन मालिक नगर निगम के नोटिस का जवाब दे चुके हैं। इनमें ज्यादातर वे लोग हैं जिन्होंने बाकायदा निगम से अनुमति ले रखी है। डीएवी न्यू शिमला, प्रिंसटन स्कूल समेत कई स्कूलों, हेल्थ सेंटर, बैंकों और हिमुडा के भवनों में चल रही दुकानों की अनुमति सही पाई गई है। इन पर कार्रवाई नहीं होगी।
बिना अनुमति चला रखे थे पांच गेस्ट हाउस, होंगे बंद
इलाके में पांच भवनों में बिना अनुमति चल रहे गेस्ट हाउस जल्द बंद होंगे। भवन मालिकों ने नगर निगम से दो से तीन माह का समय मांगा है। इसके अलावा कई कोचिंग सेंटर भी खाली करवाने की तैयारी है। कई संस्थानों ने अभी से अपने बोर्ड भी हटा दिए हैं।
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बेरोजगारी में लोन लेकर बनाया मकान, अब कैसे चुकाएंगे
नोटिस का जवाब देने के लिए न्यू शिमला के दर्जनों लोग नगर निगम कार्यालय पहुंच रहे हैं। बुधवार को कुछ युवक भी निगम कार्यालय पहुंचे। इन्होंने माना कि उनके पास व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि वे बेरोजगार हैं। पहले लोन लेकर मकान बनाया और उसमें कुछ दुकानें खोल दीं। इसके किराए से बैंक की किस्तें दे रहे हैं। अब अगर यही बंद हो गईं तो लोन कैसे चुकाएंगे। कहा कि हम बेरोजगारी में अब कहां से पैसा लाएंगे? उधर, नगर निगम अधिकारियों का कहना था कि कोर्ट के निर्देशानुसार ही कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री से मिले लोग, सुनाया अपना दर्द
मंगलवार देर शाम न्यू शिमला इलाके के दर्जनों लोग स्थानीय पार्षदों के साथ विधानसभा में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिले और राहत की मांग की। इन्होंने कहा कि पहले सरकार ने जबरन उनकी जमीनें ले लीं, अब उनकी कमाई का जरिया भी छीना जा रहा है। लोगों ने ऐसे परिवारों को राहत देने की मांग की। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 30 ऐसे परिवार हैं जिनकी जमीन सरकार ने अधिग्रहण कर ली थी। ये परिवार दशकों से न्यू शिमला में रह रहे हैं।
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नगर निगम हाईकोर्ट में पेश करेगा अपनी रिपोर्ट
भवन मालिक भी न्यायालय में रख सकते हैं पक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। न्यू शिमला के रिहायशी भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के मामले में वीरवार को प्रदेश हाईकोर्ट अहम फैसला सुना सकता है। नगर निगम से लेकर इलाके के सैकड़ों भवन मालिकों की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं।
इस मामले को लेकर नगर निगम अब तक की रिपोर्ट कोर्ट में रखने वाला है। नगर निगम ने इस मामले में अब तक 215 भवन मालिकों को नोटिस जारी किए हैं जिन्होंने अपने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चला रखी हैं। इन्हें सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। जवाब के तौर पर भवन का नक्शा और चेंज ऑफ लैंड यूज के दस्तावेज दिखाने होंगे। ऐसा न करने पर भवन का बिजली और पानी काट दिया जाएगा। उधर, इलाके के भवन मालिक खुद भी इस मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं। वीरवार को ये भी कोर्ट में राहत की मांग कर सकते हैं। अब तक 50 भवन मालिक नगर निगम के नोटिस का जवाब दे चुके हैं। इनमें ज्यादातर वे लोग हैं जिन्होंने बाकायदा निगम से अनुमति ले रखी है। डीएवी न्यू शिमला, प्रिंसटन स्कूल समेत कई स्कूलों, हेल्थ सेंटर, बैंकों और हिमुडा के भवनों में चल रही दुकानों की अनुमति सही पाई गई है। इन पर कार्रवाई नहीं होगी।
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बिना अनुमति चला रखे थे पांच गेस्ट हाउस, होंगे बंद
इलाके में पांच भवनों में बिना अनुमति चल रहे गेस्ट हाउस जल्द बंद होंगे। भवन मालिकों ने नगर निगम से दो से तीन माह का समय मांगा है। इसके अलावा कई कोचिंग सेंटर भी खाली करवाने की तैयारी है। कई संस्थानों ने अभी से अपने बोर्ड भी हटा दिए हैं।
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बेरोजगारी में लोन लेकर बनाया मकान, अब कैसे चुकाएंगे
नोटिस का जवाब देने के लिए न्यू शिमला के दर्जनों लोग नगर निगम कार्यालय पहुंच रहे हैं। बुधवार को कुछ युवक भी निगम कार्यालय पहुंचे। इन्होंने माना कि उनके पास व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि वे बेरोजगार हैं। पहले लोन लेकर मकान बनाया और उसमें कुछ दुकानें खोल दीं। इसके किराए से बैंक की किस्तें दे रहे हैं। अब अगर यही बंद हो गईं तो लोन कैसे चुकाएंगे। कहा कि हम बेरोजगारी में अब कहां से पैसा लाएंगे? उधर, नगर निगम अधिकारियों का कहना था कि कोर्ट के निर्देशानुसार ही कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री से मिले लोग, सुनाया अपना दर्द
मंगलवार देर शाम न्यू शिमला इलाके के दर्जनों लोग स्थानीय पार्षदों के साथ विधानसभा में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिले और राहत की मांग की। इन्होंने कहा कि पहले सरकार ने जबरन उनकी जमीनें ले लीं, अब उनकी कमाई का जरिया भी छीना जा रहा है। लोगों ने ऐसे परिवारों को राहत देने की मांग की। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 30 ऐसे परिवार हैं जिनकी जमीन सरकार ने अधिग्रहण कर ली थी। ये परिवार दशकों से न्यू शिमला में रह रहे हैं।