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बिना अनुमति घरों में खोल दिए ढाबे, दफ्तर और दुकानें
Updated Thu, 08 Mar 2018 10:16 PM IST
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अशोक चौहान
शिमला। शहर के हजारों रिहायशी भवनों में बेरोकटोक व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। खुद के रहने के लिए बनाए ज्यादातर भवनों को कमाई का जरिया बनाकर इनमें बिना अनुमति सरकारी दफ्तर, कंपनियां, क्लीनिक, होटल और दुकानें खोल दी गई हैं। ये भवन मालिक खुद तो जमकर कमाई कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम को हर साल लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं। यह न सिर्फ टैक्स की चोरी कर रहे हैं बल्कि सस्ती घरेलू दरों पर बिजली-पानी भी ले रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि निगम को इसका पता नहीं है, लेकिन फिर भी इन भवन मालिकों पर खूब मेहरबानी दिखाई जा रही है। निगम की नाकामी के बाद अब खुद प्रदेश हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा है। न्यू शिमला इलाके में रिहायशी भवनों में बिना अनुमति चलाई जा रही व्यावसायिक गतिविधियों को तुरंत बंद करने और इनके बिजली-पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जारी किए गए हैं। इस इलाके में करीब आधे से ज्यादा भवन ऐसे हैं, जिनमें बेरोकटोक व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।
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अमर उजाला ने जमीनी हकीकत जानने के लिए न्यू शिमला इलाके का जायजा लिया। इस दौरान एक के बाद एक पोल खुलने लगी। सरकारी दफ्तर, दुकानें, क्लीनिक चलाने वाले ज्यादातर भवन मालिकों के पास चेंज ऑफ लैंड यूज की अनुमति नहीं थी।
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1. शर्त के कारण नहीं ली परमिशन
न्यू शिमला के सेक्टर वन। लेन वन के पहले ही भवन में स्टेट रोड प्रोजेक्ट के कार्यकारी अभियंता का कार्यालय चल रहा है। भवन मालिक राजेश कुमार ने बताया कि चेंज ऑफ लैंड यूज के लिए निगम में आवेदन किया था। लेकिन पता चला कि दफ्तर के साथ पूरे भवन का बिजली-पानी कॉमर्शियल हो जाएगा। इसीलिए अनुमति नहीं ली। निगम की शर्तें ऐसी हैं कि यहां ज्यादातर लोग अनुमति नहीं ले रहे। अब जो भी आदेश होंगे, हम मानेंगे।
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2. बिना अनुमति भवन में चल रही दुकानें, हेल्थ सेंटर
कंगनाधार में फेज थ्री स्थित मेदराम बिल्डिंग। इसमें न सिर्फ दुकानें, ढाबे चल रहे हैं बल्कि एक हेल्थ सेंटर और कोचिंग सेंटर भी हैं। भवन मालिक दिनेश कुमार ने कहा कि परमिशन के लिए भी आवेदन किया है। कहा कि यह एरिया पहले गांव में था, अब हमें एमसी में लिया गया। इसीलिए हमारे पास अनुमति नहीं। हम निगम को टैक्स देते हैं। हमारी जमीनें अधिग्रहण की गई है, ऐसे में निगम को हमें टैक्स आदि में छूट देनी चाहिए।
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3. एक भवन में सरकारी दफ्तर और प्राइवेट कंपनी
शर्मा निवास कंगनाधार। इस रिहायशी भवन में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अलावा एक निजी कंपनी का दफ्तर भी है। भवन मालिक हेमराज शर्मा ने माना कि उनके पास भी चेंज और लैंड यूज की परमिशन नहीं है। कहा कि पहले परमिशन लेने जैसी कोई व्यवस्था ही नहीं थी। हम बाकायदा कॉमर्शियल टैक्स भरते हैं। लेकिन टैक्स जमा करवाते वक्त भी कभी निगम कर्मचारियों ने नहीं बताया कि चेंज ऑफ लैंड यूज की अनुमति लेना भी जरूरी है।
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4. परमिशन के लिए दफ्तर के चक्कर कटवाता है निगम
सेक्टर वन, मधान बिल्डिंग। भवन के ग्राउंड फ्लोर में आई क्लीनिक चल रहा है जबकि टॉप फ्लोर में पहले कोचिंग सेंटर चल रहा था। भवन मालिक राजेश मधान ने कहा कि उन्होंने अनुमति के लिए आवेदन किया था। लेकिन निगम की बहुत प्रक्रिया लंबी है। कहा कि जेई और एसडीओ के चक्कर काटने के बाद भी काम नहीं बनता। आम जनता इससे परेशान है। निगम को सिंगल विंडो पर इसकी सुविधा देनी चाहिए। हम सारी औपचारिकताएं पूरी करने को तैयार है।
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शिमला। शहर के हजारों रिहायशी भवनों में बेरोकटोक व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। खुद के रहने के लिए बनाए ज्यादातर भवनों को कमाई का जरिया बनाकर इनमें बिना अनुमति सरकारी दफ्तर, कंपनियां, क्लीनिक, होटल और दुकानें खोल दी गई हैं। ये भवन मालिक खुद तो जमकर कमाई कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम को हर साल लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं। यह न सिर्फ टैक्स की चोरी कर रहे हैं बल्कि सस्ती घरेलू दरों पर बिजली-पानी भी ले रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि निगम को इसका पता नहीं है, लेकिन फिर भी इन भवन मालिकों पर खूब मेहरबानी दिखाई जा रही है। निगम की नाकामी के बाद अब खुद प्रदेश हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा है। न्यू शिमला इलाके में रिहायशी भवनों में बिना अनुमति चलाई जा रही व्यावसायिक गतिविधियों को तुरंत बंद करने और इनके बिजली-पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जारी किए गए हैं। इस इलाके में करीब आधे से ज्यादा भवन ऐसे हैं, जिनमें बेरोकटोक व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।
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अमर उजाला ने जमीनी हकीकत जानने के लिए न्यू शिमला इलाके का जायजा लिया। इस दौरान एक के बाद एक पोल खुलने लगी। सरकारी दफ्तर, दुकानें, क्लीनिक चलाने वाले ज्यादातर भवन मालिकों के पास चेंज ऑफ लैंड यूज की अनुमति नहीं थी।
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1. शर्त के कारण नहीं ली परमिशन
न्यू शिमला के सेक्टर वन। लेन वन के पहले ही भवन में स्टेट रोड प्रोजेक्ट के कार्यकारी अभियंता का कार्यालय चल रहा है। भवन मालिक राजेश कुमार ने बताया कि चेंज ऑफ लैंड यूज के लिए निगम में आवेदन किया था। लेकिन पता चला कि दफ्तर के साथ पूरे भवन का बिजली-पानी कॉमर्शियल हो जाएगा। इसीलिए अनुमति नहीं ली। निगम की शर्तें ऐसी हैं कि यहां ज्यादातर लोग अनुमति नहीं ले रहे। अब जो भी आदेश होंगे, हम मानेंगे।
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2. बिना अनुमति भवन में चल रही दुकानें, हेल्थ सेंटर
कंगनाधार में फेज थ्री स्थित मेदराम बिल्डिंग। इसमें न सिर्फ दुकानें, ढाबे चल रहे हैं बल्कि एक हेल्थ सेंटर और कोचिंग सेंटर भी हैं। भवन मालिक दिनेश कुमार ने कहा कि परमिशन के लिए भी आवेदन किया है। कहा कि यह एरिया पहले गांव में था, अब हमें एमसी में लिया गया। इसीलिए हमारे पास अनुमति नहीं। हम निगम को टैक्स देते हैं। हमारी जमीनें अधिग्रहण की गई है, ऐसे में निगम को हमें टैक्स आदि में छूट देनी चाहिए।
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3. एक भवन में सरकारी दफ्तर और प्राइवेट कंपनी
शर्मा निवास कंगनाधार। इस रिहायशी भवन में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अलावा एक निजी कंपनी का दफ्तर भी है। भवन मालिक हेमराज शर्मा ने माना कि उनके पास भी चेंज और लैंड यूज की परमिशन नहीं है। कहा कि पहले परमिशन लेने जैसी कोई व्यवस्था ही नहीं थी। हम बाकायदा कॉमर्शियल टैक्स भरते हैं। लेकिन टैक्स जमा करवाते वक्त भी कभी निगम कर्मचारियों ने नहीं बताया कि चेंज ऑफ लैंड यूज की अनुमति लेना भी जरूरी है।
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4. परमिशन के लिए दफ्तर के चक्कर कटवाता है निगम
सेक्टर वन, मधान बिल्डिंग। भवन के ग्राउंड फ्लोर में आई क्लीनिक चल रहा है जबकि टॉप फ्लोर में पहले कोचिंग सेंटर चल रहा था। भवन मालिक राजेश मधान ने कहा कि उन्होंने अनुमति के लिए आवेदन किया था। लेकिन निगम की बहुत प्रक्रिया लंबी है। कहा कि जेई और एसडीओ के चक्कर काटने के बाद भी काम नहीं बनता। आम जनता इससे परेशान है। निगम को सिंगल विंडो पर इसकी सुविधा देनी चाहिए। हम सारी औपचारिकताएं पूरी करने को तैयार है।