ब्रिटेन में पांच करोड़ से लगेगी 18वीं शताब्दी की दुर्लभ कांगड़ा पेंटिंग की बोली
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कांगड़ा शैली में 18वीं शताब्दी में बनाई गई नायाब पेंटिंग की नीलामी ब्रिटेन में पांच करोड़ से शुरू होगी। इस दुर्लभ पेंटिंग को देहरा तहसील के गुलेर गांव के रहने वाले चित्रकार नैनसुख ने बनाया गया था। ब्रिटेन का संग्रहालय इस चित्र की नीलामी कराने जा रहा है।
वर्तमान में यह पेंटिंग ब्रिटेन में ही एक व्यक्ति के पास है, जिसकी बोली लगाकर संग्रहालय न्यूनतम 5 लाख 50 हजार पाउंड (करीब पांच करोड़ रुपये) में खरीदने की तैयारी में है।
बोली अधिक लगने पर इस पेंटिंग को कोई और भी खरीद सकता है। पद्मश्री विजय शर्मा ने बताया कि यह पेंटिंग बेहद दुर्लभ है। इस चित्र को सियाल कोटी कागज पर प्राकृतिक खनिज रंगों से तैयार किया गया है। चित्र में मध्य भारत में पारंपरिक संगीत को प्रदर्शित किया गया है।
महानतम चित्रकारों में शुमार रहे नैनसुख ने कई नायाब चित्र बनाए
इसमें सात गांवों के अलग-अलग वादक छत पर खड़े होकर तुरही बजाते दर्शाए गए हैं। भारत के महानतम चित्रकारों में शुमार रहे नैनसुख ने कई नायाब चित्र बनाए थे। यह चित्र उन्हीं में से एक है, जो ब्रिटेन में किसी व्यक्ति के पास था। शर्मा ने बताया कि इस चित्र को वह व्यक्ति बेचना चाहता था।
इसकी जानकारी मिलते ही वहां के कला मंत्रालय ने चित्र को बेचने अथवा देश से बाहर ले जाने पर पाबंदी लगा दी। अब 15 फरवरी 2019 को संग्रहालय की ओर से पेंटिंग की नीलामी कराई जाएगी। पेंटिंग नीलामी की राशि उस व्यक्ति को दी जाएगी।
1770 में हुआ था नैनसुख का जन्म
गुलेर शैली के माहिर चित्रकार नैनसुख (1770-1778) अपने समय के बेहतरीन चित्रकारों में से एक थे। नैनसुख के बड़े बेटे निक्का की बेहतरीन चित्रकला से प्रभावित होकर चंबा रियासत के राजा राज सिंह ने कांगड़ा सीमा के रेहलू परगना केे तहत राजौल में उन्हें जमीन दी थी।
देश-दुनिया में है बेमिसाल चित्रों का संग्रह
देश के चंडीगढ़, बनारस, कोलकाता, मुंबई सहित अन्य संग्रहालयों में नैनसुख द्वारा बनाए गए नायाब चित्र संग्रहित किए गए हैं। लंदन, स्विट्जरलैंड और लाहौर में उनके द्वारा बनाए गए चित्र आज भी मौजूद हैं। नैनसुुख को लघु चित्रकला की एक प्रमुख और लोक प्रिय शैली पहाड़ी आंदोलन के प्रमुख कलाकारों में माना जाता है।