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बारा जिलयां दी बांकी क्यारी..ने किया मंत्रमुग्ध
Updated Wed, 01 Nov 2017 10:59 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। गेयटी थियेटर में भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से बुधवार को राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इसमें वित्त एवं भाषा संस्कृति विभाग के श्रीकांत बाल्दी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। वरिष्ठ पहाड़ी कवि जयदेव किरण ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि डा. बाल्दी ने कहा कि पहली नवंबर का दिन हिमाचल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए बड़ा महत्वपूर्ण दिन है, जब राज्यों का पुनर्गठन भाषाओं, बोलियों और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर हुआ था। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी अनूठी लोक संस्कृति और विभिन्न बोलियों के लिए अलग पहचान बनाए हुए है। वहीं पहाड़ी कवि सम्मेलन में प्रदेश के लगभग एक दर्जन से अधिक कवियों ने अपनी बोलियों में कविताएं प्रस्तुत कीं। सन छयासठ को याद करते हुए अश्वनी कुमार गर्ग ने ‘सन छयासठ तेरा गुण किंया गाईए, तैं बिछड़े इन्सान मलाए, किच्छ कण्डे थे, किच्छ फुल्ल थे, कण्डे बी तै फुल्ल बणाए’, अर्पणा धीमान ने ‘बारा जिलयां दी बांकी क्यारी, महकदी रहे म्हाचले दी धरती प्यारी’, कमल कुमार प्यासा ने ‘बापू तेरे देसा च, लगी लड़ाई कुरसी री’ गानों ने लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर सीआरबी ललित, कमल कुमार प्यासा, डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. राकेश कपूर, राम लाल पाठक, नवीन हल्दूनवी देव राज संसालवी, रमेश चंद मस्ताना, किरण ठाकुर, भूप रंजन, प्रभात शर्मा, हेत राम पहाड़िया, हेमंत अत्री, नारायण सिंह, प्रेम लाल वर्मा, वंदना राणा, रती राम, अजीत दिवान, संदीप शर्मा, एमएस मेहता, युवा कवि स्पर्श चौहान ने पहाड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर अकादमी के सचिव डॉ. कर्म सिंह, विभाग के उप निदेशक बाल कृष्ण शर्मा, सहायक निदेशक कर्नल नेगी, सहायक निदेशक भीम सिंह चौहान, अलका कैथला तथा अन्य लोग मौजूद रहे।
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शिमला। गेयटी थियेटर में भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से बुधवार को राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इसमें वित्त एवं भाषा संस्कृति विभाग के श्रीकांत बाल्दी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। वरिष्ठ पहाड़ी कवि जयदेव किरण ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि डा. बाल्दी ने कहा कि पहली नवंबर का दिन हिमाचल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए बड़ा महत्वपूर्ण दिन है, जब राज्यों का पुनर्गठन भाषाओं, बोलियों और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर हुआ था। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी अनूठी लोक संस्कृति और विभिन्न बोलियों के लिए अलग पहचान बनाए हुए है। वहीं पहाड़ी कवि सम्मेलन में प्रदेश के लगभग एक दर्जन से अधिक कवियों ने अपनी बोलियों में कविताएं प्रस्तुत कीं। सन छयासठ को याद करते हुए अश्वनी कुमार गर्ग ने ‘सन छयासठ तेरा गुण किंया गाईए, तैं बिछड़े इन्सान मलाए, किच्छ कण्डे थे, किच्छ फुल्ल थे, कण्डे बी तै फुल्ल बणाए’, अर्पणा धीमान ने ‘बारा जिलयां दी बांकी क्यारी, महकदी रहे म्हाचले दी धरती प्यारी’, कमल कुमार प्यासा ने ‘बापू तेरे देसा च, लगी लड़ाई कुरसी री’ गानों ने लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर सीआरबी ललित, कमल कुमार प्यासा, डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. राकेश कपूर, राम लाल पाठक, नवीन हल्दूनवी देव राज संसालवी, रमेश चंद मस्ताना, किरण ठाकुर, भूप रंजन, प्रभात शर्मा, हेत राम पहाड़िया, हेमंत अत्री, नारायण सिंह, प्रेम लाल वर्मा, वंदना राणा, रती राम, अजीत दिवान, संदीप शर्मा, एमएस मेहता, युवा कवि स्पर्श चौहान ने पहाड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर अकादमी के सचिव डॉ. कर्म सिंह, विभाग के उप निदेशक बाल कृष्ण शर्मा, सहायक निदेशक कर्नल नेगी, सहायक निदेशक भीम सिंह चौहान, अलका कैथला तथा अन्य लोग मौजूद रहे।