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पहाड़ी शैली में नहीं बन रहा मंदिर
Updated Tue, 13 Jun 2017 09:03 PM IST
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रामपुर बुशहर।
उपमंडल रामपुर के वर्षों पुराने श्राईकोटी मंदिर के पुन निर्माण में प्रयोग की जा रही शैली सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने साफ शब्दों में कहा था कि श्राईकोटी मंदिर का पुन निर्माण पुरानी पहाड़ी शैली से ही किया जाएगा, जिससे इसकी सुंदरता को बरकरार रखा जा सके। हैरानी की बात है कि इस मंदिर के पुन निर्माण में ईंटों और सीमेंट का ढांचा खड़ा कर दिया है। इससे श्राईकोटी मंदिर की पुरानी शैली छिपने लगी है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह किसी भी मंदिर के निर्माण कार्य में सीमेंट और ईंटों के इस्तेमाल के पक्ष में नहीं रहे हैं। रामपुर क्षेत्र में अभी तक जितने भी मंदिरों का पुन निर्माण किया गया है, उनमें सिर्फ पत्थरों और लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है। मंदिरों में लकड़ी के खंभे ही लगाए जाते रहे हैं। मंदिरों में लगाई जाने वाली लकड़ी की नक्काशी कर मंदिरों की खूबसूरती को बरकरार रखा जाता है। श्राईकोटी मंदिर के पुननिर्माण में पहाड़ी शैली की उपेक्षा की जा रही है और मंदिर के बाहर कंकरीट का ढांचा खड़ा किया जा रहा है। पहाड़ी शैली में मंदिर के पुन निर्माण के नाम पर सीमेंट के खंभे और ईंटों की दीवारें खड़ी कर दी गई हैं। मंदिर का पुन निर्माण लोक निर्माण विभाग की ओर से किया जा रहा है। यह मंदिर भीमाकाली मंदिर ट्रस्ट के अधीन है। ग्रामीण पवन राही, प्रकाश, मनमोहन नेगी, रवि शिरशु, बिट्टु, गुमान, राजेंद्र और बीरू का कहना है कि श्राईकोटी मंदिर का पुन निर्माण पहाड़ी शैली में ही होना चाहिए। मंदिर के पुन निर्माण में ईंट और सीमेंट के प्रयोग पर रोक लगनी चाहिए। लकड़ी पर की गई नक्काशी को भी छुपाया जा रहा है।
ड्राइंग के अनुसार कर रहे निर्माण
लोक निर्माण विभाग के एसडीओ किशोरी लाल ने कहा कि श्राईकोटी मंदिर का निर्माण ड्राइंग के अनुसार पहाड़ी शैली में कर रहे हैं। ड्राइंग में निर्माण के बारे में दिए दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
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उपमंडल रामपुर के वर्षों पुराने श्राईकोटी मंदिर के पुन निर्माण में प्रयोग की जा रही शैली सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने साफ शब्दों में कहा था कि श्राईकोटी मंदिर का पुन निर्माण पुरानी पहाड़ी शैली से ही किया जाएगा, जिससे इसकी सुंदरता को बरकरार रखा जा सके। हैरानी की बात है कि इस मंदिर के पुन निर्माण में ईंटों और सीमेंट का ढांचा खड़ा कर दिया है। इससे श्राईकोटी मंदिर की पुरानी शैली छिपने लगी है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह किसी भी मंदिर के निर्माण कार्य में सीमेंट और ईंटों के इस्तेमाल के पक्ष में नहीं रहे हैं। रामपुर क्षेत्र में अभी तक जितने भी मंदिरों का पुन निर्माण किया गया है, उनमें सिर्फ पत्थरों और लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है। मंदिरों में लकड़ी के खंभे ही लगाए जाते रहे हैं। मंदिरों में लगाई जाने वाली लकड़ी की नक्काशी कर मंदिरों की खूबसूरती को बरकरार रखा जाता है। श्राईकोटी मंदिर के पुननिर्माण में पहाड़ी शैली की उपेक्षा की जा रही है और मंदिर के बाहर कंकरीट का ढांचा खड़ा किया जा रहा है। पहाड़ी शैली में मंदिर के पुन निर्माण के नाम पर सीमेंट के खंभे और ईंटों की दीवारें खड़ी कर दी गई हैं। मंदिर का पुन निर्माण लोक निर्माण विभाग की ओर से किया जा रहा है। यह मंदिर भीमाकाली मंदिर ट्रस्ट के अधीन है। ग्रामीण पवन राही, प्रकाश, मनमोहन नेगी, रवि शिरशु, बिट्टु, गुमान, राजेंद्र और बीरू का कहना है कि श्राईकोटी मंदिर का पुन निर्माण पहाड़ी शैली में ही होना चाहिए। मंदिर के पुन निर्माण में ईंट और सीमेंट के प्रयोग पर रोक लगनी चाहिए। लकड़ी पर की गई नक्काशी को भी छुपाया जा रहा है।
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ड्राइंग के अनुसार कर रहे निर्माण
लोक निर्माण विभाग के एसडीओ किशोरी लाल ने कहा कि श्राईकोटी मंदिर का निर्माण ड्राइंग के अनुसार पहाड़ी शैली में कर रहे हैं। ड्राइंग में निर्माण के बारे में दिए दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
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