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विवि में निर्माणाधीन इमारत 31 दिसंबर तक बनाओ
Updated Tue, 29 Aug 2017 11:04 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
उच्च न्यायालय ने प्रदेश विश्वविद्यालय में निर्माणाधीन मल्टी फैकल्टी फेज टू इमारत को पूरा करने को विशेष कदम उठाने के लिए मुख्य सचिव को 5 सदस्यीय कमेटी का गठन करने के आदेश दिए हैं। प्रधान सचिव गृह इस कमेटी के अध्यक्ष होंगे। इनके अलावा जिलाधीश शिमला, आयुक्त नगर निगम, रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय और निदेशक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग इस कमेटी के सदस्य होंगे।
हाईकोर्ट ने कमेटी को आदेश दिए हैं कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि उक्त भवन राजस्व रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के नाम दर्ज हो। नगर निगम इस भवन के नक्शे को जल्द स्वीकृति प्रदान करें। इमारत में बचे काम का अनुमान लगाया जाए। सक्षम अधिकारी के समक्ष उस पर होने वाले अतिरिक्त खर्च की मांग रखी जाए। कमेटी द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि 31 दिसंबर 2017 तक इमारत का कार्य पूरा हो जाए और इस इमारत में कार्य होना शुरूहो जाए।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में इमारत को बनाने का काम वर्ष 2005 में शुरू कर लिया गया था। वर्ष 2010-11 तक इस इमारत का कार्य किया गया। उसके बाद इस भवन का नक्शा सेक्शन न होने के कारण बाकी कार्य अधूरा ही छोड़ दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्य को पूरा करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया। हाईकोर्ट ने इसे बड़ी गंभीरता से लेते हुए उपरोक्त कमेटी का गठन किया जो कि यह सुनिश्चित करेगी कि 31 दिसंबर 2017 तक यह इमारत कार्य करने की स्थिति में हो जाए। मामले पर सुनवाई 19 सितंबर को होगी। मुख्य सचिव व प्रधान सचिव गृह को आदेश दिए गए हैं कि वह उनके द्वारा कोर्ट द्वारा पारित आदेशों की अनुपालना में उठाए गए कदमों की जानकारी हाईकोर्ट को अपने शपथ पत्र के माध्यम से दे।
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शिमला।
उच्च न्यायालय ने प्रदेश विश्वविद्यालय में निर्माणाधीन मल्टी फैकल्टी फेज टू इमारत को पूरा करने को विशेष कदम उठाने के लिए मुख्य सचिव को 5 सदस्यीय कमेटी का गठन करने के आदेश दिए हैं। प्रधान सचिव गृह इस कमेटी के अध्यक्ष होंगे। इनके अलावा जिलाधीश शिमला, आयुक्त नगर निगम, रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय और निदेशक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग इस कमेटी के सदस्य होंगे।
हाईकोर्ट ने कमेटी को आदेश दिए हैं कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि उक्त भवन राजस्व रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के नाम दर्ज हो। नगर निगम इस भवन के नक्शे को जल्द स्वीकृति प्रदान करें। इमारत में बचे काम का अनुमान लगाया जाए। सक्षम अधिकारी के समक्ष उस पर होने वाले अतिरिक्त खर्च की मांग रखी जाए। कमेटी द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि 31 दिसंबर 2017 तक इमारत का कार्य पूरा हो जाए और इस इमारत में कार्य होना शुरूहो जाए।
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याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में इमारत को बनाने का काम वर्ष 2005 में शुरू कर लिया गया था। वर्ष 2010-11 तक इस इमारत का कार्य किया गया। उसके बाद इस भवन का नक्शा सेक्शन न होने के कारण बाकी कार्य अधूरा ही छोड़ दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्य को पूरा करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया। हाईकोर्ट ने इसे बड़ी गंभीरता से लेते हुए उपरोक्त कमेटी का गठन किया जो कि यह सुनिश्चित करेगी कि 31 दिसंबर 2017 तक यह इमारत कार्य करने की स्थिति में हो जाए। मामले पर सुनवाई 19 सितंबर को होगी। मुख्य सचिव व प्रधान सचिव गृह को आदेश दिए गए हैं कि वह उनके द्वारा कोर्ट द्वारा पारित आदेशों की अनुपालना में उठाए गए कदमों की जानकारी हाईकोर्ट को अपने शपथ पत्र के माध्यम से दे।
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