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पिछले साल दे दी थी शिकायत, फिर भी होती रही डंपिंग
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अफसरों की ढील से खड़े हुए
गिरि के पास मलबे के पहाड़
पेयजल कंपनी ने पिछले साल लिखित में दी थी मलबा फेंकने की शिकायत
सोये रहे अफसर, अब लोगों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा
बरसात में बिगड़ सकते हैं हालात, खड्डे किनारे डंप हैं मलबा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना गिरि खड्ड के किनारे हो रही अवैध डंपिंग का पता प्रशासन को पिछले साल चल गया था। लेकिन प्रशासन सोया रहा और गिरि खड्ड के किनारे मलबे के पहाड़ खड़े हो गए। अब बरसात से पहले ही मलबा गिरकर नदी में पहुंचकर पेयजल दूषित कर रहा है। बरसात में हालात और बिगड़ने का अंदेशा है। पेयजल कंपनी प्रबंधन ने पिछले साल ही इसकी शिकायत प्रशासन को कर दी थी।
पेयजल कंपनी के अनुसार भलयोग स्थित गिरि पंपिंग स्टेशन से करीब एक किलोमीटर पीछे मलबे का एक पहाड़ खड़ा हो गया है। यह मलबा सीधे गिरि के पानी में मिल रहा है। पिछले साल कंपनी ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को इस बारे में पत्र लिखकर सूचित किया था। लेकिन अवैध डंपिंग नहीं रुकी। सड़क चौड़ा करने के काम में जो भी मलबा निकला है उसे खड्ड किनारे निजी और सरकारी जमीन में डंप किया जाता रहा। यही नहीं, खड्ड से जुड़ने वाले ज्यादातर नालों में भी जगह-जगह मलबा फेंका है। बरसात में यह मलबा सीधे गिरि खड्ड में पहुंचेगा जिससे गाद आने का खतरा काफी बढ़ गया है।
बरसात में मलबा मचा सकता है तबाही
शिमला शहर में इस बार गर्मियों में तो पेयजल संकट नहीं हुआ लेकिन सरकारी महकमों की लापरवाही से बरसात में पानी की सप्लाई ठप हो सकती है। मलबे से तबाही मचने का अंदेशा है। बरसात से पहले ही मलबे को खड्ड में जाने से रोकने के लिए पेयजल कंपनी ने शुक्रवार को दोबारा लोनिवि को लिखित शिकायत दे दी है।
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कार्रवाई तो दूर, मलबा फेंकने
वालों को ही बचा रहे अफसर
गिरि खड्ड के किनारे मलबे के पहाड़ खड़े करने वालों पर कार्रवाई करने की बजाय अफसर इन्हें बचाने में जुट गए हैं। पेयजल स्रोतों के किनारे हो रही डंपिंग पर वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि आम आदमी ऐसा करता तो उस पर केस दर्ज हो जाता, डीआर कटती। लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। सीसीएफ वन विभाग शिमला आरके गुप्ता ने कहा कि जिस जगह डंपिंग हुई है, डीएफओ से उसकी रिपोर्ट ले ली है। यह निजी जमीन है जिसे लोक निर्माण विभाग ने अपनी डंपिंग साइट बनाया है। निजी जमीन होने के कारण हम कार्रवाई नहीं कर सकते। मलबा पानी में न जाए, इसके लिए लोनिवि को नदी किनारे रिटेनिंग वॉल लगाने को कहा है।
पिछले साल की थी शिकायत
पेयजल कंपनी के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र गिल ने कहा कि गिरि खड्ड के किनारे अवैध डंपिंग और सड़क का मलबा फेंकने को लेकर पिछले साल स्थानीय प्रशासन को शिकायत की थी। अब दोबारा लोक निर्माण विभाग को शिकायत दे रहे हैं।
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गिरि के पास मलबे के पहाड़
पेयजल कंपनी ने पिछले साल लिखित में दी थी मलबा फेंकने की शिकायत
सोये रहे अफसर, अब लोगों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा
बरसात में बिगड़ सकते हैं हालात, खड्डे किनारे डंप हैं मलबा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना गिरि खड्ड के किनारे हो रही अवैध डंपिंग का पता प्रशासन को पिछले साल चल गया था। लेकिन प्रशासन सोया रहा और गिरि खड्ड के किनारे मलबे के पहाड़ खड़े हो गए। अब बरसात से पहले ही मलबा गिरकर नदी में पहुंचकर पेयजल दूषित कर रहा है। बरसात में हालात और बिगड़ने का अंदेशा है। पेयजल कंपनी प्रबंधन ने पिछले साल ही इसकी शिकायत प्रशासन को कर दी थी।
पेयजल कंपनी के अनुसार भलयोग स्थित गिरि पंपिंग स्टेशन से करीब एक किलोमीटर पीछे मलबे का एक पहाड़ खड़ा हो गया है। यह मलबा सीधे गिरि के पानी में मिल रहा है। पिछले साल कंपनी ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को इस बारे में पत्र लिखकर सूचित किया था। लेकिन अवैध डंपिंग नहीं रुकी। सड़क चौड़ा करने के काम में जो भी मलबा निकला है उसे खड्ड किनारे निजी और सरकारी जमीन में डंप किया जाता रहा। यही नहीं, खड्ड से जुड़ने वाले ज्यादातर नालों में भी जगह-जगह मलबा फेंका है। बरसात में यह मलबा सीधे गिरि खड्ड में पहुंचेगा जिससे गाद आने का खतरा काफी बढ़ गया है।
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बरसात में मलबा मचा सकता है तबाही
शिमला शहर में इस बार गर्मियों में तो पेयजल संकट नहीं हुआ लेकिन सरकारी महकमों की लापरवाही से बरसात में पानी की सप्लाई ठप हो सकती है। मलबे से तबाही मचने का अंदेशा है। बरसात से पहले ही मलबे को खड्ड में जाने से रोकने के लिए पेयजल कंपनी ने शुक्रवार को दोबारा लोनिवि को लिखित शिकायत दे दी है।
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कार्रवाई तो दूर, मलबा फेंकने
वालों को ही बचा रहे अफसर
गिरि खड्ड के किनारे मलबे के पहाड़ खड़े करने वालों पर कार्रवाई करने की बजाय अफसर इन्हें बचाने में जुट गए हैं। पेयजल स्रोतों के किनारे हो रही डंपिंग पर वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि आम आदमी ऐसा करता तो उस पर केस दर्ज हो जाता, डीआर कटती। लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। सीसीएफ वन विभाग शिमला आरके गुप्ता ने कहा कि जिस जगह डंपिंग हुई है, डीएफओ से उसकी रिपोर्ट ले ली है। यह निजी जमीन है जिसे लोक निर्माण विभाग ने अपनी डंपिंग साइट बनाया है। निजी जमीन होने के कारण हम कार्रवाई नहीं कर सकते। मलबा पानी में न जाए, इसके लिए लोनिवि को नदी किनारे रिटेनिंग वॉल लगाने को कहा है।
पिछले साल की थी शिकायत
पेयजल कंपनी के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र गिल ने कहा कि गिरि खड्ड के किनारे अवैध डंपिंग और सड़क का मलबा फेंकने को लेकर पिछले साल स्थानीय प्रशासन को शिकायत की थी। अब दोबारा लोक निर्माण विभाग को शिकायत दे रहे हैं।