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भाजपा पार्षद बोले, मंत्री का नाम लेकर धमकाते हैं अधिकारी, कैसे होगा काम
Thu, 30 May 2019 11:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 30 May 2019 11:52 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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शहर में सालों से लटके पड़े पार्किंग, एंबुलेंस रोड, सीवरेज लाइन जैसे कई बड़े प्रोजेक्टों पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने इसके लिए सीधे तौर पर अफसरों को जिम्मेदार ठहरा दिया।
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शुरुआत भाजपा पार्षद संजय परमार ने की। बोले, सदन में बैठा निगम का एक अधिकारी हमें मंत्री का नाम लेकर धमकाता है। अधिकारी ने अपने पालतू लोगों को काम दे रखे हैं जो सालों बाद भी अधूरे हैं।
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काम के बारे में पूछते हैं तो अफसर मंत्री के पास शिकायत करने की धमकी देता है। सैकड़ों लोग सीवरेज लाइन से वंचित है। सदन में सभी पार्षदों की निगाहें अफसर पर टिक गईं। हालांकि, आयुक्त ने मामला शांत कर दिया।
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इसके बाद वन विभाग के अफसर निशाने पर आ गए। डीएफओ के गायब रहने पर कई पार्षद अपनी सीट से खड़े हो गए। पार्षद संजय परमार, शैलेंद्र चौहान, राकेश चौहान, पूरनमल और सिमी नंदा ने कहा कि उनके वार्डों में पार्किंग, एंबुलेंस रोड जैसे 18 प्रोजेक्ट पांच साल से लटके पड़े हैं।
उधर, डीएफओ बैठकों में आना तक जरूरी नहीं समझ रहे। यदि इन अफसरों को काम नहीं करना तो अपना ट्रांसफर करवा लें। इसी बीच मेयर ने पार्षदों को बैठने के लिए कहा तो पार्षद और भड़क गए। बोले, हमें जनता ने सदन में चाय पीने या ढाई घंटे बैठने के लिए नहीं भेजा। दिल्ली से परमिशन मिल जाती है लेकिन शहर के दफ्तरों में सालों बाद मिलती है।
अफसर आयुक्त नहीं सरकार के अंडर : चौहान
कांग्रेस पार्षद राकेश चौहान ने भाजपा पार्षदों को ही निशाने पर ले लिया। पूछा कि अफसर आयुक्त नहीं बल्कि सरकार के अंडर है। बोले, हर बात के लिए सरकार के पास दौड़ते हो। जनता से जुड़े ऐसे मामलों पर सरकार के सामने क्यों भाजपा पार्षदों की बोलती बंद हो जाती है। सदन में पानी के बिलों में देरी पर भी जमकर हंगामा हुआ।