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Shimla News: शिमला रोपवे प्रोजेक्ट के लिए काटे जाएंगे 1423 पेड़
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शिमला शहरी और ग्रामीण वन मंडल क्षेत्र से होकर बनेगा 13. 79 किलोमीटर लंबा रोपवे
केंद्रीय पर्यावरण वन मंत्रालय ने दी प्रथम चरण की मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में शिमला रोपवे के निर्माण के बड़े प्रोजेक्ट के लिए शिमला शहरी और ग्रामीण वन मंडल में 1423 पेड़ कटेंगे। 13.79 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार के केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ की ओर से प्रथम चरण की क्लीयरेंस मिल चुकी है।
1734.70 करोड़ के इस रोपवे का निर्माण वन मंडल शिमला शहरी ग्रामीण के क्षेत्र में किया जाना है। इसमें शिमला शहरी वन मंडल में किए रोपवे सर्वे में 983 और शिमला ग्रामीण वन मंडल में 440 पेड़ काटे जाने है। मंत्रालय से अभी एफसीए की पहले चरण की मंजूरी दी है। रोपवे का निर्माण कर रहे रोपवे-रेपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डवेलपमेंट कार्पोरेशन को इस निर्माण कार्य में कटने वाले पेड़ों की एवज में निर्धारित राशि सहित अन्य औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। इसके बाद ही मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय से दूसरे चरण की वन मंजूरी मिलेगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। वन मंडल अधिकारी शिमला शहरी पवन चौहान ने माना कि मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय चंड़ीगढ़ से रोपवे प्रोजेक्ट को मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस में इस निर्माण में दोनों वन मंडलों के 1423 पेड़ों को काटा जाना है। रोपवे प्रोजेक्ट में शिमला शहरी का 4.5639 हेक्टेयर और शिमला ग्रामीण का 1. 6270 हेक्टेयर एरिया शामिल होगा। इस पर निर्माण कार्य होना है।
बरसात में गिर चुके हैं 1000 से अधिक पेड़ विकासात्मक कार्यों के लिए शहर में हर साल पेड़ काटे जा रहे हैं। पिछली दो से तीन बरसातों में राजधानी के करीब एक हजार से अधिक पेड़ गिरे हैं। यही नहीं भवनों के लिए प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा घोषित किए खतरनाक करीब पांच सौ पेड़ कट चुके हैं। इससे शिमला शहर में पेड़ और कम हो जाएंगे।
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यह है रोपवे प्रोजेक्ट का प्रस्तावित रूट
राजधानी के 13.79 किलोमीटर का रोपवे प्रोजेक्ट तारादेवी से चक्कर-आईएसबीट तक बनाया जाना है। इसके बाद रोपवे का रूट दो जगह के लिए डायवर्ट होगा, एक आईएसबीटी से 103 टनल-विक्ट्री टनल-आईजीएमसी-संजौली-नवबहार से होते हुए छोटा शिमला तक। दूसरा डायवर्ट होने वाला रोपवे का रूट आईएसबीटी से रेलवे स्टेशन, ओल्ड बस अड्डा, लिफ्ट और वहां से सचिवालय तक बनाया जाना है।
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केंद्रीय पर्यावरण वन मंत्रालय ने दी प्रथम चरण की मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में शिमला रोपवे के निर्माण के बड़े प्रोजेक्ट के लिए शिमला शहरी और ग्रामीण वन मंडल में 1423 पेड़ कटेंगे। 13.79 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार के केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ की ओर से प्रथम चरण की क्लीयरेंस मिल चुकी है।
1734.70 करोड़ के इस रोपवे का निर्माण वन मंडल शिमला शहरी ग्रामीण के क्षेत्र में किया जाना है। इसमें शिमला शहरी वन मंडल में किए रोपवे सर्वे में 983 और शिमला ग्रामीण वन मंडल में 440 पेड़ काटे जाने है। मंत्रालय से अभी एफसीए की पहले चरण की मंजूरी दी है। रोपवे का निर्माण कर रहे रोपवे-रेपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डवेलपमेंट कार्पोरेशन को इस निर्माण कार्य में कटने वाले पेड़ों की एवज में निर्धारित राशि सहित अन्य औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। इसके बाद ही मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय से दूसरे चरण की वन मंजूरी मिलेगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। वन मंडल अधिकारी शिमला शहरी पवन चौहान ने माना कि मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय चंड़ीगढ़ से रोपवे प्रोजेक्ट को मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस में इस निर्माण में दोनों वन मंडलों के 1423 पेड़ों को काटा जाना है। रोपवे प्रोजेक्ट में शिमला शहरी का 4.5639 हेक्टेयर और शिमला ग्रामीण का 1. 6270 हेक्टेयर एरिया शामिल होगा। इस पर निर्माण कार्य होना है।
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बरसात में गिर चुके हैं 1000 से अधिक पेड़ विकासात्मक कार्यों के लिए शहर में हर साल पेड़ काटे जा रहे हैं। पिछली दो से तीन बरसातों में राजधानी के करीब एक हजार से अधिक पेड़ गिरे हैं। यही नहीं भवनों के लिए प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा घोषित किए खतरनाक करीब पांच सौ पेड़ कट चुके हैं। इससे शिमला शहर में पेड़ और कम हो जाएंगे।
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यह है रोपवे प्रोजेक्ट का प्रस्तावित रूट
राजधानी के 13.79 किलोमीटर का रोपवे प्रोजेक्ट तारादेवी से चक्कर-आईएसबीट तक बनाया जाना है। इसके बाद रोपवे का रूट दो जगह के लिए डायवर्ट होगा, एक आईएसबीटी से 103 टनल-विक्ट्री टनल-आईजीएमसी-संजौली-नवबहार से होते हुए छोटा शिमला तक। दूसरा डायवर्ट होने वाला रोपवे का रूट आईएसबीटी से रेलवे स्टेशन, ओल्ड बस अड्डा, लिफ्ट और वहां से सचिवालय तक बनाया जाना है।