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नाबालिग बच्चों को गाड़ी चलाने के लिए न दें अभिभावक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 24 Sep 2018 11:14 AM IST
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बसंतपुर ग्राम पंचायत में रविवार को विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विवेक शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य मानव जीवन के दो पहलु हैं। प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्य और अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों का प्रयोग और दायित्वों का निर्वहन भली भांति कर सके। उन्होंने कहा कि कानून की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं।
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समाज के गरीब, बेसहारा, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिला, नाबालिग बच्चे, औद्योगिक कामगारों के हितों की रक्षा के लिए विधिक साक्षरता प्राधिकरण की ओर से नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि न्यायालय की ओर से एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती, इसलिए एक्सीडेंट होने की स्थिति में सड़क पर घायल व्यक्ति को तुरंत उपचार के लिए पास के अस्पताल तक पहुंचाएं ताकि उसके जीवन की रक्षा हो सके।
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उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने नाबालिग बच्चों को दोपहिया वाहन या गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए अन्यथा किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर कानून के तहत अभिभावकों को दंडित किया जा सकता है। वाहन का प्रयोग करने से पूर्व उसका पंजीकरण, वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस और बीमा संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का निरीक्षण अवश्य करें। शीघ्र और सस्ता न्याय प्राप्त करने के लिए लोगों को आपसी मामले पंचायत स्तर, लोक अदालतों और मध्यस्थता प्रणाली के माध्यम से सुलझाने की पहल करनी चाहिए।
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लोक अदालतों और मध्यस्थता प्रणाली से मामलों का निपटारा दोनों पक्षों की रजामंदी से किया जाता है। उन्होंने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए जिला न्यायालय में फ्रंट ऑफिस स्थापित किए गए हैं जहां लोग अपने मामलों के बारे में मुफ्त कानूनी सलाह प्राप्त कर सकते हैं। शिविर में अधिवक्ता रीता ठाकुर तथा अधिवक्ता टेकचंद ने भी कानूनी पहलुओं की जानकारी दी।