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कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर फिर छुक-छुक करता दौड़ा स्टीम इंजन

Fri, 15 Feb 2019 11:05 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 15 Feb 2019 11:05 AM IST
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ट्रैक पर उतरा स्टीम इंजन

रेलवे का 114 साल पुराना इतिहास ‘स्टीम लोकोमोटिव इंजन’ बुधवार को एक बार फिर ट्रैक पर उतरा। आस्ट्रेलिया और यूके से आए सैलानियों ने शिमला से कैथलीघाट तक 22 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर स्टीम इंजन से जोड़े सीटी 12,13 कोच में सफर किया। सुबह करीब 9:20 बजे रेलवे यार्ड से निकल कर 114 साल पुराना ऐतिहासिक स्टीम इंजन प्लेटफार्म पर पहुंचा। तीखी सिटी और छुक छुक की आवाज सुनते ही रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्री तथा रेलवे स्टॉफ टकटकी लगाए स्टीम इंजन की ओर देखने लगे।

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प्लेटफार्म पर पहुंचने के बाद स्टीम इंजन में कोच जोड़े गए और इसके बाद विदेशी सैलानी कोच में सवार हो गए। स्टीम इंजन को चलाने के लिए तीन कर्मचारियों की तैनाती की थी। ड्राइवर ने इंजन स्टार्ट किया, फर्स्ट फायर मैन ने कोयला डाल कर स्टीम तैयार की और सेकेंड फायरमैन ने केबिन तक कोयला पहुंचाया। 9:32 बजे स्टीम लोकोमोटिव इंजन शिमला से कैथलीघाट की ओर रवाना हो गया।
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स्टीम इंजन के रवाना होने से पहले सैलानियों ने शिमला रेलवे स्टेशन और स्टीम इंजन की खूबसूरती को अपने कैमरों में कैद किया। शिमला से कैथलीघाट तक स्टीम इंजन के टूअर का आयोजन ‘ट्रेवल पलज इंडिया’ की ओर से किया गया। ‘ट्रेवल पलज इंडिया’ के डायरेक्टर अमित चोपड़ा ने बताया कि विदेशी सैलानियों ने इस सफर का भरपूर आनंद लिया। पिछले कल विदेशी सैलानी रेल कार में कालका से शिमला पहुंचे थे।
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पिस्टन से निकलती है ‘छुक-छुक’ की आवाज, स्टीम से बजती है सिटी
रेल का पर्याय मानी जाने वाली छुक-छुक की आवाज सिर्फ स्टीम इंजन से पैदा होती है। स्टीम इंजन में भाप के पिस्टन में आगे पीछे चलने और बाहर निकलने से छुक-छुक की आवाज पैदा होती है। स्टीम इंजन में बजने वाली सीटी भाप के दबाव से बजती है। डीजल इंजन के मुकाबले स्टीम इंजन की सीटी ज्यादा तीखी और दूर तक सुनाई देने वाली होती है।

विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाली तीसरी रेल लाइन
शिमला-कालका रेल लाइन विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाली तीसरी रेल लाइन है। 8 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। दार्जिलिंग रेलवे और नीलगिरि रेलवे को भी विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।


96 किलोमीटर में 102 सुरंगें और 800 पुल
1903 में बिछाई गई 96 किलोमीटर कालका से शिमला तक रेल लाइन में 102 सुरंगें, 800 पुल, 919 मोड़ और 18 रेलवे स्टेशन हैं। समुद्र तल से ट्रैक की ऊंचाई 2800 फुट से लेकर 7 हजार फुट है।

स्टीम इंजन का इतिहास आंकड़ों की जुबानी
113 साल पुराना है केसी-520 स्टीम लोकोमोटिव इंजन
1905 में अंग्रेजों ने शिमला से कैथलीघाट के बीच चलाया
1971 के बाद 30 सालों तक वर्कशॉप में खड़ा रहा
2001 में दोबारा बनाकर तैयार किया गया
41 टन है इंजन का वजन
80 टन तक खींचने की क्षमता

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