फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   शहरवासियों को मिलेगा शुद्ध पानी, निगम ने तैयार किया मास्टर प्लान

शहरवासियों को मिलेगा शुद्ध पानी, निगम ने तैयार किया मास्टर प्लान

Wed, 06 Dec 2017 10:54 PM IST
Updated Wed, 06 Dec 2017 10:54 PM IST
विज्ञापन
शहरवासियों को मिलेगा शुद्ध पानी, निगम ने तैयार किया मास्टर प्लान
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

शिमला।
शहरवासियों को शुद्ध पानी मुहैया करवाने और पीलिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए नगर निगम ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इसके लिए निगम का ग्रेटर वाटर सर्कल वर्ल्ड बैंक की मदद से दो साफ्टवेयर तैयार करने जा रहा है।
वाटर जर्म सॉफ्टवेयर और बेंटले वाटर सॉल्यूशन नाम से दो प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। इसमें क्लोरीन सेंसर के जरिये निगम को तुरंत पता चल सकेगा कि पानी में क्लोरीन की कितनी मात्रा है। ऐसे में शहर में होने वाली गंदे पानी की सप्लाई को रोका जा सकेगा। वर्तमान में आईजीएमसी अस्पताल शहर में पानी की सैंपलिंग करता है। साफ पानी की रिपोर्ट तो 10 से 12 घंटे में मिल जाती है। लेकिन अनसेटिस्फेक्ट्री या यानि गंदे पानी की रिपोर्ट 24 घंटे बाद ही मिलती है। तब तक शहर में पानी बंट जाता है। अब नए सिस्टम से तुरंत पता चल सकेगा कि किस स्टोरेज टैंक में पानी पीने लायक नहीं है। ऐसे में पानी की सप्लाई रोकी जा सकेगी। इसके अलावा आईजीएमसी अस्पताल के सुझाव पर निगम सर्कल के तहत शुद्घ पानी की सप्लाई देने के लिए वाटर बैक्टीरियोलॉजिकल लैब स्थापित करने की भी योजना बना रहा है। आईजीएमसी ने इस लैब के तहत तीन डॉक्टर और स्टाफ तैनात करने का सुझाव दिया है।
विज्ञापन


पीलिया रोकने के लिए निगम ने लिए अहम फैसले
सर्दियों के मौसम में पीलिया फैलने की संभावनाओं को देखते हुए निगम प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं। पेयजल परियोजनाओं में क्लोरीनेशन का समय आधा घंटा से बढ़ाकर एक घंटा कर दिया गया है। यानि सप्लाई देने से एक घंटे पहले अब स्टोरेज टैंकों में क्लोरीन मिलाई जाएगी। तय मानकों से कम या ज्यादा क्लोरीन न मिले, इसके लिए पुख्ता जांच के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा शहरवासियों को एडवाइजरी भी जारी कर दी गई है। लोगों को हल्का सफेद पानी आने की स्थिति में पानी उबालकर पीने को कहा गया है। पाइपलाइनों में सप्लाई के वक्त सीवरेज और गंदा पानी मिलने की संभावनाओं को देखते हुए क्लोरिनेशन का समय बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में कई जगह शुरू में हल्का सफेद पानी आ सकता है। दिसंबर माह में पीलिया फैलने की संभावनाएं ज्यादा रहती है। साल 2015 में फैले पीलिया से सबक लेते हुए निगम इस बार पहले ही हरकत में आ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


....
एक साल में 51 सैंपल हुए फेल
इस समय आईजीएमसी रोजाना शहर से छह सैंपल लेता है। इसके अलावा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी सैंपलिंग करता है। हर तीसरे महीने कुछ सैंपल पुणे लैब भी भेजे जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में 2050 सैंपलों में से 51 सैंपल फेल हुए हैं।

.....
पहली बार हुई कार्यशाला, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव
पानी की गुणवत्ता को लेकर पहली बार नगर निगम की ओर से इस तरह की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें आईआईटी दिल्ली से आए डॉ. अरविंद नेमा, आईजीएमसी अस्पताल से डॉ. बलराज, डॉ. दिग्विजय, आईपीएच विभाग से मुख्य अभियंता एके महाजन, शिमला ग्रेटर वाटर सर्कल से अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल, अधिशासी अभियंता राजेश कश्यप, निगम अभियंता विजय गुप्ता शामिल हुए। विशेषज्ञों ने क्लोरिनेशन की टाइमिंग, वाटर सैंपलिंग आदि को लेकर अहम सुझाव दिए। कहा कि यदि साफ पानी है तो क्लोरीन की मात्रा 0.5 पीपीएम तक चल सकती है। निगम वर्तमान में एक पीपीएम तक क्लोरीनेशन करता है। पानी में क्लोरीन की सामान्य मात्रा 0.5 से एक पीपीएम होती है। तय सीमा से कम मात्रा मिलाने से पीलिया फैलने का खतरा रहता है जबकि ज्यादा होने पर दिमाग, फेफड़े से जुड़ी बीमारियां बढ़ने की संभावना होती है।
0000
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed