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इस कार्यक्रम के तहत सांस्कृतिक पर्यटन से जुड़ेंगी 1200 धरोहरें

Sun, 10 Jun 2018 10:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बिलासपुर
अमर उजाला ब्यूरो, बिलासपुर Updated Sun, 10 Jun 2018 10:04 AM IST
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1200 heritage sites of will be connected with cultural tourism

सूबे की करीब 1200 धरोहरों को सांस्कृतिक पर्यटन के साथ जोड़ा जाएगा। इन पर्यटन स्थलों को ‘आज पुरानी राहों से’ कार्यक्रम के तहत देश और दुनिया के सामने लाया जाएगा।

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इससे जहां सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों को नई पहचान मिलेगी, वहीं प्रदेश भर में सैकड़ों युवाओं को सांस्कृतिक गाइड बन कर रोजगार मुहैया होगा। भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है।
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बिलासपुर में पत्रकारों के साथ बातचीत में यह जानकारी भाषा एवं संस्कृति विभाग की सचिव पूर्णिमा चौधरी ने साझा की।उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। 

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युवाओं को गाइड की ट्रेनिंग देगी सरकार  

1200 heritage sites of will be connected with cultural tourism

यह स्थल सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनाए जाएंगे। प्रदेश में हर साल दो करोड़ सैलानी आते हैं। यदि धरोहरों को पर्यटन से जोड़ा जाए तो इससे लाभ होगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत छोटी-छोटी सांस्कृतिक धरोहरें भी विकसित होंगी।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों से ऐसे 100 स्थलों की सूची मांगी गई है जो अभी तक लोगों की पहुंच से दूर हैं। जब सांस्कृतिक पर्यटन को बल मिलेगा तो इसके साथ युवाओं के लिए भी रोजगार के द्वार खुलेंगे।

सरकार युवाओं को गाइड की ट्रेनिंग देगी। ये गाइड अपने क्षेत्र में सैलानियों को सांस्कृतिक पर्यटन स्थानों का भ्रमण करवाएंगे। इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न स्थानों में बच्चों की प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। 

शिमला के मास्टर मदन की गजलें, घर होंगे शामिल 

1200 heritage sites of will be connected with cultural tourism

इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश की प्रमुख हस्तियां, खान पान, पांडुलिपियां, नर सिंघे, मिठाइयां आदि को भी ‘आज पुरानी राहों से’ कार्यक्रम के तहत लोगों के सामने लाया जाएगा। 

कार्यक्रम के तहत शिमला के मास्टर मदन को भी शामिल किया जाएगा। पंद्रह वर्ष की उम्र में मास्टर मदन का देहांत हो गया था लेकिन उनकी आठ गजलें आज भी लोगों के जेहन में हैं। कार्यक्रम में उनके घर को भी शामिल किया जाएगा।

बिलासपुर के ऋषिकेष के मिल्क केक के अलावा वहां की हरकी पौड़ी, बिलासपुर में गोबिंदसागर झील में समा चुके मंदिर, चैनाली गांव जहां आज भी लोग संस्कृत में बात करते हैं।

लोगों के पहनावे, प्रदेश में महात्मा गांधी ने नौ बार प्रवास किया, उन तमाम स्थानों को शामिल किया जाएगा। ऐसे करीब 1200 स्थल हैं जो ऐतिहासिक महत्व होने के बावजूद पर्यटन विकास से अछूते हैं।

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