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स्टाफ की कमी से जूझ रहे निगम को मिले छह कनिष्ठ अभियंता
Updated Wed, 28 Mar 2018 10:35 PM IST
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नगर निगम को मिले छह कनिष्ठ अभियंता
कोर्ट के आदेशों के बाद सरकार ने किए तैनात
शिमला। स्टाफ की कमी से जूझ रहे नगर निगम को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के आदेशों के बाद सरकार ने छह कनिष्ठ अभियंताओं को नगर निगम में तैनाती दी है। इनमें से दो ने कार्यभार भी संभाल लिया है।
ये भी नगर निगम की एपी ब्रांच में अपनी सेवाएं देंगे। अब तक नगर निगम के पास 34 वार्डों के लिए सिर्फ छह ही कनिष्ठ अभियंता तैनात थे। इनमें से चार के हाल ही में तबादला आदेश जारी हुए थे। वार्डों में अवैध निर्माण को रोकने, भवनों के नक्शे पास करने, भवन नियमित करने आदि का जिम्मा एपी ब्रांच के इन कनिष्ठ अभियंताओं पर है। यहां कुल 17 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से एक दर्जन पद काफी समय से खाली चल रहे थे। हालत यह थी कि न्यू शिमला को लेकर आए कोर्ट के आदेशों को लागू करवाने के लिए भी निगम के पास महज दो जेई बच गए थे। स्टाफ की कमी को देखते हुए कोर्ट ने सरकार को कर्मचारी तैनात करने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि ये सभी जेई लोनिवि से नगर निगम में ट्रांसफर किए गए हैं। स्टाफ बढ़ने से अब नगर निगम को शहर में अवैध निर्माण पर तुरंत कार्रवाई करने और न्यू शिमला मामले में कोर्ट के आदेशों को लागू करवाने में मदद मिलेगी।
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कोर्ट के आदेशों के बाद सरकार ने किए तैनात
शिमला। स्टाफ की कमी से जूझ रहे नगर निगम को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के आदेशों के बाद सरकार ने छह कनिष्ठ अभियंताओं को नगर निगम में तैनाती दी है। इनमें से दो ने कार्यभार भी संभाल लिया है।
ये भी नगर निगम की एपी ब्रांच में अपनी सेवाएं देंगे। अब तक नगर निगम के पास 34 वार्डों के लिए सिर्फ छह ही कनिष्ठ अभियंता तैनात थे। इनमें से चार के हाल ही में तबादला आदेश जारी हुए थे। वार्डों में अवैध निर्माण को रोकने, भवनों के नक्शे पास करने, भवन नियमित करने आदि का जिम्मा एपी ब्रांच के इन कनिष्ठ अभियंताओं पर है। यहां कुल 17 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से एक दर्जन पद काफी समय से खाली चल रहे थे। हालत यह थी कि न्यू शिमला को लेकर आए कोर्ट के आदेशों को लागू करवाने के लिए भी निगम के पास महज दो जेई बच गए थे। स्टाफ की कमी को देखते हुए कोर्ट ने सरकार को कर्मचारी तैनात करने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि ये सभी जेई लोनिवि से नगर निगम में ट्रांसफर किए गए हैं। स्टाफ बढ़ने से अब नगर निगम को शहर में अवैध निर्माण पर तुरंत कार्रवाई करने और न्यू शिमला मामले में कोर्ट के आदेशों को लागू करवाने में मदद मिलेगी।
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