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हिदायत की मुकद्दस किताब है कुरान
Updated Fri, 09 Jun 2017 12:39 AM IST
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हिदायत की मुकद्दस किताब है कुरान
मस्जिदे अक्सा में भी नमाजे तरावीह में कुरान मुकम्मल
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर। रमजानुल मुबारक के महीने में ही कुरान हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम पर नाजिल फरमाया। कुरान मुसलमानों के लिए हिदायत की मुकद्दस किताब है। जो शख्स एक भी तरावीह छोड़ता है वह शरीयत की नजर में गुनाहगार है। रमजान का पहला अशरा पूरा और दूसरा शुरू हो गया। दूसरा अशरा मगफिरत का होता है। इसमें बंदे खुदा की बागराहे में अपने गुनाहों से तौबा करते हैं। मिस्टनगंज चौराहा स्थित मस्जिद में नमाजे तरावीह में कुरान मुकम्मल हो गया। नायब मुफ्ती शहर मोहम्मद मकसूद ने कुरान सुनाया। समाअत के फराइज हाफिज मोहम्मद फुरकान ने अंजाम दिए। जश्न-ए- खत्म कुरान में मुफ्ती मोहम्मद मकसूद ने कहा कि अल्लाहतआला ने कुरान करीम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम पर रमजान के मुबारक महीने में नाजिल फरमाया। कुरान करीम मुसलमानों के लिए हिदायत की मुकद्दस किताब है। मुसलमानों को इस मुकद्दस किताब के अहकाम पर अमल करना चाहिए। मुफ्ती ने कहा कि जो लोग दस या इससे ज्यादा दिनों की तरावीह की नमाज पढ़ते हैं और फिर छोड़ देते हैं उन्हें चाहिए पूरे महीने तरावीह की नमाज पढ़े। मुफ्ती ने कहा कि जो शख्स एक भी तरावीह छोड़ दे वो शरीयत की नजर में गुनाहगार है। मौलाना ने कहा कि रमजान का मुकद्दस महीना तीन अशरों में तकसीम किया गया है। हर अशरे में खुदा की रहमत बरसती है। पहला असरा पूरी शिद्दत के साथ मुकम्मल कर लिया है। दूसरे अशरे का आगाज हो चुका है। यह अशरा मगफिरत का होता है। इसमें बंदे खुदा की बारगाह में अपने गुनाहों से तौबा करते हैं।
पीला तालाब स्थित मदीना मस्जिद में मौलाना उवैस नदवी ने कुरान सुनाया। समाअत के फराइज मोम्मद नोमान ने अंजाम दिए। जश्न-ए- खत्म कुरान में मौलाना उवैस ने कहा कि कुरान को अपने घर की जीनत न बनाओ, बल्कि इसे पढ़ो और अपने मसलों का हल निकालो। कहा जब-जब कौम कुरान से दूर हुई उस पर अजाब और परेशानियां आईं। वहीं शाहबाद के मोहल्ला नई बस्ती स्थित मस्जिद उमर में नमाजे तरावीह में कुरान मुकम्मल हो गया। कारी सलमान ने कुरान की सुनाया गया। समाअत के फरायज हाफिज सरफराज अंजाम दिए। हाफिज अब्दुल रऊफ ने ब्यान फरमाया। इस मौके पर सूफी फारूख बेग, कारी यासीन, नन्हे खान, मुर्तजा, शराफत भी थे।
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मस्जिदे अक्सा में भी नमाजे तरावीह में कुरान मुकम्मल
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर। रमजानुल मुबारक के महीने में ही कुरान हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम पर नाजिल फरमाया। कुरान मुसलमानों के लिए हिदायत की मुकद्दस किताब है। जो शख्स एक भी तरावीह छोड़ता है वह शरीयत की नजर में गुनाहगार है। रमजान का पहला अशरा पूरा और दूसरा शुरू हो गया। दूसरा अशरा मगफिरत का होता है। इसमें बंदे खुदा की बागराहे में अपने गुनाहों से तौबा करते हैं। मिस्टनगंज चौराहा स्थित मस्जिद में नमाजे तरावीह में कुरान मुकम्मल हो गया। नायब मुफ्ती शहर मोहम्मद मकसूद ने कुरान सुनाया। समाअत के फराइज हाफिज मोहम्मद फुरकान ने अंजाम दिए। जश्न-ए- खत्म कुरान में मुफ्ती मोहम्मद मकसूद ने कहा कि अल्लाहतआला ने कुरान करीम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम पर रमजान के मुबारक महीने में नाजिल फरमाया। कुरान करीम मुसलमानों के लिए हिदायत की मुकद्दस किताब है। मुसलमानों को इस मुकद्दस किताब के अहकाम पर अमल करना चाहिए। मुफ्ती ने कहा कि जो लोग दस या इससे ज्यादा दिनों की तरावीह की नमाज पढ़ते हैं और फिर छोड़ देते हैं उन्हें चाहिए पूरे महीने तरावीह की नमाज पढ़े। मुफ्ती ने कहा कि जो शख्स एक भी तरावीह छोड़ दे वो शरीयत की नजर में गुनाहगार है। मौलाना ने कहा कि रमजान का मुकद्दस महीना तीन अशरों में तकसीम किया गया है। हर अशरे में खुदा की रहमत बरसती है। पहला असरा पूरी शिद्दत के साथ मुकम्मल कर लिया है। दूसरे अशरे का आगाज हो चुका है। यह अशरा मगफिरत का होता है। इसमें बंदे खुदा की बारगाह में अपने गुनाहों से तौबा करते हैं।
पीला तालाब स्थित मदीना मस्जिद में मौलाना उवैस नदवी ने कुरान सुनाया। समाअत के फराइज मोम्मद नोमान ने अंजाम दिए। जश्न-ए- खत्म कुरान में मौलाना उवैस ने कहा कि कुरान को अपने घर की जीनत न बनाओ, बल्कि इसे पढ़ो और अपने मसलों का हल निकालो। कहा जब-जब कौम कुरान से दूर हुई उस पर अजाब और परेशानियां आईं। वहीं शाहबाद के मोहल्ला नई बस्ती स्थित मस्जिद उमर में नमाजे तरावीह में कुरान मुकम्मल हो गया। कारी सलमान ने कुरान की सुनाया गया। समाअत के फरायज हाफिज सरफराज अंजाम दिए। हाफिज अब्दुल रऊफ ने ब्यान फरमाया। इस मौके पर सूफी फारूख बेग, कारी यासीन, नन्हे खान, मुर्तजा, शराफत भी थे।
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