{"_id":"5ade148f4f1c1b360b8b6297","slug":"101524503695-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"MC Shimla: घोटाला करने वाले दस सुपरवाइजरों की छुट्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MC Shimla: घोटाला करने वाले दस सुपरवाइजरों की छुट्टी
Updated Tue, 24 Apr 2018 12:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
शिमला। शहरवासियों से वसूली कूड़े की फीस में लाखों का घपला करने के मामले में सैहब सोसायटी के दस सुपरवाइजरों पर गाज गिरी है। जांच में इनके खिलाफ पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद इनकी सेवाएं खत्म की जा रही हैं।
सोमवार को निगम आयुक्त रोहित जमवाल के साथ हुई सैहब गवर्निंग कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया है। बैठक में फैसला लिया गया कि सभी सुपरवाइजरों को नियमानुसार अब आखिरी नोटिस दिया जाएगा। पूछा जाएगा कि गड़बड़ी की है तो क्यों न सेवाएं खत्म की जाए। साथ ही इनसे रिकवरी भी की जाएगी। नोटिस के 15 दिन के बाद इनकी सेवाएं खत्म हो जाएंगी। नगर निगम ने इस महीने की तनख्वाह भी रोक दी है। बैठक से पहले ही मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने आयुक्त को अपनी रिपोर्ट दे दी थी। इसमें साफ पाया गया कि सुपरवाइजरों ने फर्जी रसीदें बनाकर भारी गड़बड़ी की है।
विज्ञापन
पहले सात सुपरवाइजरों का नाम सामने आया था लेकिन जांच पूरी होने तक यह आंकड़ा दस तक पहुंच गया। इसी गड़बड़ी के चलते निगम का लाखों रुपया डूब गया। कुछेक रसीदें पिछले साल की है जिससे पता चलता है कि गड़बड़ी का खेल कई महीने से चल रहा था। भविष्य में ऐसा घपला न हो, इसके लिए सख्ती कार्रवाई की गई है।
विज्ञापन
अमर उजाला ने सबसे पहले किया था खुलासा
शहर में कूड़े की फीस में हो रहे घोटाले का खुलासा सबसे पहले अमर उजाला ने किया था। 26 मार्च को इस घपले से जुड़ी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई। जनवरी में निगम प्रशासन ने कोर्ट के आदेशों पर व्यावसायिक संस्थानों का शुल्क दोगुना कर दिया था। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं की फीस 50 से बढ़ाकर 75 रुपये की गई थी। रेट बढ़ाने से पहले निगम को हर महीने 28 लाख रुपये की आय होती थी। वहीं, रेट बढ़ाने के बाद यह कमाई 40 लाख होनी थी। लेकिन जनवरी में निगम के खाते में महज 22 लाख रुपये जमा हुए। बाकी 18 लाख गायब थे। निगम ने इस मामले की जांच शुरू करवाई तो एक एक कर सात सुपरवाइजरों की गड़बड़ी सामने आ गई।
ऐसे खुली सुपरवाइजरों के खेल की पोल
न्यू शिमला पार्षद कुसुमलता ठाकुर ने सदन के भीतर सुपरवाइजरों के खेल की पोल खोली थी। उनके वार्ड के एक निजी स्कूल से सुपरवाइजर तीन हजार रुपये वसूल रहा था जबकि निगम के खाते में महज 60 रुपये जमा हो रहे थे। मामला सामने आने के बाद निगम ने सभी वार्डों में जांच शुरू करवाई जिसमें सात सुपरवाइजरों की गड़बड़ी पाई गई।
क्या कहते हैं आयुक्त
जांच में दस सुपरवाइजरों की गड़बड़ी पाई गई है। कई फर्जी रसीदें मिली हैं जिससे पता चलता है कि लोगों से वसूला गया पूरा पैसा खाते में जमा नहीं किया गया। आखिरी नोटिस देकर इन सुपरवाइजरों की सेवाएं खत्म की जा रही हैं।
रोहित जमवाल, नगर निगम आयुक्त