हिमाचल प्रदेश सरकार के 100 दिन हुए पूरे, ये वायदे अभी अधूरे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सौ दिन पूरे हो गए हैं, मगर जयराम सरकार के बहुत से वायदे अभी अधूरे हैं। सरकार की रफ्तार से लग रहा है कि इन्हें पूरा करने में बहुत वक्त लग सकता है। नई सरकार सत्ता में आते ही पिछली सरकार के कई अहम फैसलों को पलटने को चर्चा में रही।
पिछली सरकार के वक्त में खोले गए सरकारी संस्थानों को बंद करने को आगे बढ़ी सरकार कांग्रेस के निशाने पर रही। इन तीन महीनों में मंत्रियों से लेकर अधिकारीगण तक सचिवालय में बैठकों में व्यस्त और फाइलों में खोए जरूर नजर आए, मगर इन शुरुआती तीन महीनों में महज प्लान ही बन पाया।
वीरभद्र सरकार के कई फैसलों को पलटने, कइयों पर जांच बैठाने का काम सरकार ने किया, लेकिन पार्टी के स्वर्णिम दृष्टिपत्र की कई घोषणाएं अभी चर्चा के स्तर पर हैं।
वीरभद्र सरकार के ये निर्णय पलटे
- पूर्व सरकार की आबकारी नीति पलटी और शराब कारोबार पर बैठाई जांच
- वीरभद्र सरकार के खोले कई सरकारी संस्थानों को बंद करने की अधिसूचनाएं जारी
- जंजैहली में उपमंडल कार्यालय बदलने का विवाद भी सुलगा, बैकफुट पर आई सरकार
- पूर्व वीरभद्र सरकार के वक्त में खुली राजनीतिक जांचें बंद करने का लिया निर्णय
- भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर चल रहे एचपीसीए मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू
- पूर्व सरकार का खेल विधेयक सरकार ने वापस लिया
- बीमार उद्योगों को दिए गए अनावश्यक आर्थिक लाभों को भी वापस लिया
- दो गोल्ड रिफाइनरीज को वित्तीय लाभ का मामला वापस हुआ, बैठाई विजिलेंस जांच
- कुल्लू के रघुनाथ मंदिर के अधिग्रहण का फैसला लिया गया
इन वायदों का क्या
- सरकार के सत्ता में आने पर खर्चे घटाने को व्यय आयोग नहीं बना
- किसानों की जमीन पर मुआवजे को दोगुने से चौगुना करने का एलान नहीं हुआ पूरा
- मार्केटिंग कमेटियों की कार्यप्रणाली सुधारने और कृषि उपकरणों के लिए वाजिब सब्सिडी देना
- प्रदेश में पहले केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय खोलने पर सरकार की धीमी रफ्तार
- स्वास्थ्य क्षेत्र में हिमाचल में हर जिले में नर्सिंग स्कूल खोलना
- चंबा में आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अभी तक घोषणा नहीं
- स्वास्थ्य क्षेत्र में एयर एंबुलेंस और हर जिले में ट्रॉमा सेंटर खोलना
- एक ड्रग कंट्रोल ब्यूरो खोलने की दिशा में नहीं बढ़े कदम
- शिक्षा क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों को वाई-फाई सुविधा से जोड़ना
- मंत्रियों की ओर से मासिक जनमंच शुरू करने की घोषणा भी बजट में की गई है।
जयराम सरकार कहां से लाएगी इतना पैसा
सत्ता के सौ दिन पूरे करने की रस्म निभाते हुए जयराम सरकार इस अल्पकाल में बहुत कुछ कर गुजरने के दावे कर रही है। लेकिन, एक सवाल फिर खड़ा है कि दावे के अनुरूप हिमाचल में विकास के नए प्रतिमान गढ़ने को ये सरकार पैसा कहां से लाएगी? पांच साल में परंपरागत तरीके से ही सरकारी कामकाज चलाने को करीब ढाई लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
इतना सारा धन कैसे आएगा ? इस सवाल पर मौजूदा सरकार के पास वही रटा हुआ जवाब है कि पर्यटन को बढ़ावा देंगे, ऊर्जा क्षेत्र पर काम होगा, कृषि क्षेत्र पर फोकस होगा, नए उद्योग आएंगे आदि-आदि और बाकी केंद्रीय मदद और कर्ज का रास्ता तो है ही। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सत्ता संभालते के बाद से अब तक हिमाचल पर पड़ चुके 47 हजार करोड़ रुपये के कर्ज से चिंतित हैं।
आगामी पांच साल तक चार से पांच हजार करोड़ रुपये मौजूदा उधार के सालाना ब्याज पर ही चुकता करने होंगे। कुल ऋण का औसत निकाला जाए तो हर हिमाचली करीब 70 हजार रुपये का कर्जदार है। राज्य की विकास दर राष्ट्रीय औसत से नीचे चल रही है। ये 6.5 प्रतिशत तक गिर चुकी है। एप्पल स्टेट का तमगा पहने हिमाचल में प्राइमरी सेक्टर यानी कृषि क्षेत्र में विकास दर सबसे ज्यादा गिरी है।
आमदनी बढ़ाने वाले वास्तविक विकास कार्यों को असल में इतना पैसा भी नहीं बच पाता, जितना की बजट में दिखाया जाता है। ऐसे में न तो प्रदेश में आय बढ़ाने के नए साधन विकसित किए जा पा रहे हैं और न ही इसके लिए आधारभूत ढांचा ही खड़ा हो पा रहा है। खास यह है कि जयराम सरकार के वित्तीय सलाहकार भी वही अधिकारी हैं, जो पिछली सरकारों में रहे हैं। इनके आसरे ही ये सरकार भी पिछली धूमल और वीरभद्र सरकारों से बेहतरीन कर गुजरने के इरादे ठाने हैं, मगर ऐसा हो पाएगा कि नहीं, ये भविष्य के गर्भ में है।
पेंशन और वेतन पर 42 प्रतिशत खर्च
कुल बजट में से कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन और पेंशन पर ही 42 फीसदी पैसा खर्च हो जाता है। कर्ज की किस्त और इसके ब्याज की अदायगी के बाद विकास के लिए केवल 40 प्रतिशत से भी कम पैसा बचता है। अमूमन ऐसा होता रहा है कि विकास कार्यों के बजट को भी कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े वित्तीय लाभ में खर्च दिया जाता है।
अपने साधनों से 28.02 प्रतिशत आमदनी
जयराम सरकार के पहले बजट में 26.64 फीसदी बजट की पूर्ति कर्ज से ही होगी। बजट व्यय के लिए जो 73.36 प्रतिशत प्राप्तियां होनी हैं, उनमें 45.34 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार से ही अपेक्षित है। यानी हिमाचल के अपने साधनों से आमदनी केवल 28.02 फीसदी ही मानी जा सकती है।