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प्रदेश में 1.6 फीसदी लोग दृष्टि बाधित रोग का शिकार
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आईजीएमसी में विश्व दृष्टि दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों ने दी जानकारी
बोले, आंखों की अच्छी तरह से करें देखभाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल में 1.6 फीसदी लोग दृष्टि बाधित हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इलाज के दौरान यह आंकड़ा जुटा है। राष्ट्र स्तर पर यह संख्या पांच फीसदी है। बुजुर्गों के अलावा बच्चे भी इस बीमारी की जद में आ रहे हैं। चिकित्सकों ने लोगों को आंखों की अच्छी तरह से देखभाल करने की हिदायत दी।
विश्व दृष्टि दिवस पर आईजीएमसी के नेत्ररोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. रामलाल शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को सफेद मोतिया, काला मोतिया, पुतली का रोग और डायबिटीज की समस्या है उनमें दृष्टि बाधित की समस्या अधिक है। आईजीएमसी में राज्य स्वर्ण जयंती समारोह और स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के सभागार में विश्व दृष्टि दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉ. रामलाल शर्मा ने बताया कि बहुत से बच्चों को ब्लैक बोर्ड तक नहीं दिख पाता है। इसकी वजह से उन्हें चश्मे लगाकर उपचार दिया जा सकता है। इसके अलावा बुजुर्ग लोगों को सफेद मोतिया की शिकायत रहती है। चालीस साल से अधिक आयु के लोगों में काले मोतिया की शिकायतें अधिक आती हैं। कई लोगों को आंखों में चोट लगने से पुतली का रोग हो जाता है। इसके अलावा शुगर के कारण भी दृष्टि बाधित होने की समस्या पेश आती है। इस अवसर पर कार्यकारी प्राचार्य डॉ. दलीप गुप्ता, नेत्ररोग विभाग से डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. यशपाल रांटा, डॉ. विनय, डॉ. कल्पना शर्मा, डॉ. प्रवीण पंवर और डॉ. दीप्ति परमार मौजूद रहीं।
प्रश्नोत्तरी में दिवांश और जान्हवी प्रथम
नेत्ररोग विभाग की ओर से प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें दिवांश और जान्हवी कटोच विजेता रहीं। विभाग के अध्यक्ष डॉ. आरएल शर्मा ने यह जानकारी दी।
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बोले, आंखों की अच्छी तरह से करें देखभाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल में 1.6 फीसदी लोग दृष्टि बाधित हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इलाज के दौरान यह आंकड़ा जुटा है। राष्ट्र स्तर पर यह संख्या पांच फीसदी है। बुजुर्गों के अलावा बच्चे भी इस बीमारी की जद में आ रहे हैं। चिकित्सकों ने लोगों को आंखों की अच्छी तरह से देखभाल करने की हिदायत दी।
विश्व दृष्टि दिवस पर आईजीएमसी के नेत्ररोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. रामलाल शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को सफेद मोतिया, काला मोतिया, पुतली का रोग और डायबिटीज की समस्या है उनमें दृष्टि बाधित की समस्या अधिक है। आईजीएमसी में राज्य स्वर्ण जयंती समारोह और स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के सभागार में विश्व दृष्टि दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉ. रामलाल शर्मा ने बताया कि बहुत से बच्चों को ब्लैक बोर्ड तक नहीं दिख पाता है। इसकी वजह से उन्हें चश्मे लगाकर उपचार दिया जा सकता है। इसके अलावा बुजुर्ग लोगों को सफेद मोतिया की शिकायत रहती है। चालीस साल से अधिक आयु के लोगों में काले मोतिया की शिकायतें अधिक आती हैं। कई लोगों को आंखों में चोट लगने से पुतली का रोग हो जाता है। इसके अलावा शुगर के कारण भी दृष्टि बाधित होने की समस्या पेश आती है। इस अवसर पर कार्यकारी प्राचार्य डॉ. दलीप गुप्ता, नेत्ररोग विभाग से डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. यशपाल रांटा, डॉ. विनय, डॉ. कल्पना शर्मा, डॉ. प्रवीण पंवर और डॉ. दीप्ति परमार मौजूद रहीं।
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प्रश्नोत्तरी में दिवांश और जान्हवी प्रथम
नेत्ररोग विभाग की ओर से प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें दिवांश और जान्हवी कटोच विजेता रहीं। विभाग के अध्यक्ष डॉ. आरएल शर्मा ने यह जानकारी दी।
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