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कनपुरिया महिलाओं के लिए अभी दूर है दिल्ली, 67 सालों में सिर्फ एक महिला सांसद बनकर पहुंची लोकसभा
Wed, 27 Mar 2019 05:12 PM IST
दुष्यंत शर्मा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 27 Mar 2019 05:12 PM IST
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लोकसभा चुनावों में पिछले 67 सालों में मात्र एक ही महिला सांसद के रूप में दिल्ली का रुख कर पाई है। जीतने हारने की बात तो दूर की है, महिला अधिकार, 33 फीसदी महिला आरक्षण में कसीदे पढ़ने वाली प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने 67 सालों में एक बार भी महिला प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया गया है। इसे दुर्भाग्य कहें या राजनीतिक पार्टियों की रणनीति, लेकिन सच यही है कि आधी आबादी आज भी राजनीतिक क्षेत्र में अपनी पहचान के लिए संघर्षरत है।
1952 से शुरू हुए लोकसभा चुनावों में अभी तक केवल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सुभाषिनी अली को लोकसभा प्रत्याशी बनाया और चुनाव में उन्हें जीत भी हासिल हुई। सुभाषिनी अली को उनकी पार्टी ने लोकसभा चुनाव का टिकट कई बार दिया, लेकिन जीत एक बार ही हो सकी।
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1952 से शुरू हुए लोकसभा चुनावों में अभी तक केवल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सुभाषिनी अली को लोकसभा प्रत्याशी बनाया और चुनाव में उन्हें जीत भी हासिल हुई। सुभाषिनी अली को उनकी पार्टी ने लोकसभा चुनाव का टिकट कई बार दिया, लेकिन जीत एक बार ही हो सकी।
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मजे की बात यह है कि कम्युनिस्ट पार्टी के अलावा कांग्रेस, भाजपा, सपा, और बसपा जैसी पार्टियों ने इतने वर्षों में एक भी महिला को अपनी पार्टी से लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाया।
2009 के लोकसभा चुनाव में एक महिला निशा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव में खड़ी हुईं थीं, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सकीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कानपुर से तो नहीं लेकिन अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र से बसपा ने महिला (निशा सचान) को प्रत्याशी बनाया है।
2009 के लोकसभा चुनाव में एक महिला निशा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव में खड़ी हुईं थीं, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सकीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कानपुर से तो नहीं लेकिन अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र से बसपा ने महिला (निशा सचान) को प्रत्याशी बनाया है।
कानपुर से टिकट नहीं मिला है, लेकिन यह भी सही है कि आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं को टिकट मिला है। पार्टी जब भी टिकट देती है तो सिर्फ महिला और पुरुष ही नहीं कई और पहलुओं के बारे में विचार किया जाता है। संगठन का निर्णय मान्य होता है। फिर भी महिलाओं को उनका उचित सम्मान और अधिकार मिलना जरूरी है। इसके लिए समाज से भी आवाज उठनी चाहिए। - पूनम कपूर, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य
वैसे तो 33 फीसदी आरक्षण की बात करते हैं, लेकिन टिकट देने के समय पता नहीं क्या हो जाता है। सच तो यह है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी महिलाओं का विकास नहीं चाहती है। संसद में महज 10-12 फीसदी ही महिलाएं नजर आती हैं। बड़ी पार्टियों को अब तो महिलाओं पर भरोसा दिखाना चाहिए। - नीलम चतुर्वेदी, संचालिका सखी केंद्र
वैसे तो 33 फीसदी आरक्षण की बात करते हैं, लेकिन टिकट देने के समय पता नहीं क्या हो जाता है। सच तो यह है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी महिलाओं का विकास नहीं चाहती है। संसद में महज 10-12 फीसदी ही महिलाएं नजर आती हैं। बड़ी पार्टियों को अब तो महिलाओं पर भरोसा दिखाना चाहिए। - नीलम चतुर्वेदी, संचालिका सखी केंद्र
एक मात्र महिला सांसद सुभाषिनी अली का राजनीतिक करियर
1989, 1991, 1996 और 2004 में सुभाषिनी अली को लोकसभा चुनाव में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से टिकट मिला। 1989 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जीत मिली। उन्होंने बीजेपी के जगतवीर सिंह द्रोण को 56,587 वोटों से हराया था। इसके अलावा 1991 में वह तीसरे स्थान पर रहीं थीं, उनको 70,912 वोट मिले थे। 1996 और 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जीत हासिल नहीं हो सकी।
लोकसभा से ज्यादा विधानसभा में है उपस्थिति
लोकसभा चुनाव की अपेक्षा विधानसभा के चुनाव में महिलाओं की भागेदारी अपेक्षाकृत अच्छी है। भाजपा की तरफ से प्रेमलता कटियार विधायक बनीं और प्रदेश सरकार में उन्हें मंत्री का भी दर्जा मिला। इसी तरह वर्तमान में नीलिमा कटियार भाजपा से विधायक चुनीं गई हैं। सपा से अरुणा कोरी विधायक बनीं उन्हें सरकार में मंत्री बनने का भी अवसर मिला। इसी तरह 2017 के विधानसभा चुनाव में घाटमपुर सीट से कमलरानी वरुण भाजपा से विधायक चुनी गई हैं।
1989, 1991, 1996 और 2004 में सुभाषिनी अली को लोकसभा चुनाव में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से टिकट मिला। 1989 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जीत मिली। उन्होंने बीजेपी के जगतवीर सिंह द्रोण को 56,587 वोटों से हराया था। इसके अलावा 1991 में वह तीसरे स्थान पर रहीं थीं, उनको 70,912 वोट मिले थे। 1996 और 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जीत हासिल नहीं हो सकी।
लोकसभा से ज्यादा विधानसभा में है उपस्थिति
लोकसभा चुनाव की अपेक्षा विधानसभा के चुनाव में महिलाओं की भागेदारी अपेक्षाकृत अच्छी है। भाजपा की तरफ से प्रेमलता कटियार विधायक बनीं और प्रदेश सरकार में उन्हें मंत्री का भी दर्जा मिला। इसी तरह वर्तमान में नीलिमा कटियार भाजपा से विधायक चुनीं गई हैं। सपा से अरुणा कोरी विधायक बनीं उन्हें सरकार में मंत्री बनने का भी अवसर मिला। इसी तरह 2017 के विधानसभा चुनाव में घाटमपुर सीट से कमलरानी वरुण भाजपा से विधायक चुनी गई हैं।