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Jodhpur: 12 साल बाद खुला मुनीम की हत्या का राज, 40-40 हजार के 3 इनामी आरोपी गिरफ्तार, नक्सलियों से संबंध निकले

Wed, 08 May 2024 05:34 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 08 May 2024 05:34 PM IST
सार

पुलिस टीम में शामिल लोगों ने कहीं श्रमिक का रूप धरा, कहीं गायें चराई, तो कहीं खेतों में फसल काट तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इस मिशन को ऑपरेशन ललनटॉप का नाम दिया था।

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Three accused involved in Jodhpur accountant murder case arrested after 12 years
आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जोधपुर के फलोदी थाना क्षेत्र में करीब 12 साल पहले सोनामुखी की फैक्ट्री के मुनीम की हत्या कर डेढ़ लाख की नकदी लूटकर भागे तीन आरोपियों को जोधपुर रेंज पुलिस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस मिशन को ऑपरेशन ललनटॉप का नाम दिया। आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस के अपराधियों तक पहुंचने पर उनके साथ चुनाव चर्चा में फलोदी के सट्टा बाजार और बालों में लगाने के लिए सोजत की मेहंदी पर विशेष जानकारी आरोपियों को होने पर हत्याकांड का खुलासा हुआ।

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जोधपुर रेंज के आईजी विकास कुमार ने बताया, फलोदी थाने के खींचन कस्बे में स्थित सोनामुखी फैक्ट्री में बतौर श्रमिक लगे तीन श्रमिक लालदेव, उदय और नरेश ने फैक्ट्री के ही मुनीम कोजाराम को शराब के नशे में गला घोंटकर हत्या कर दी थी और उसके पास रखी डेढ़ लाख की तकनीक थी और न ही सीसीटीवी कैमरे थे, जिसके चलते वारदात को अंजाम देकर फरार हुए मुल्जिमों के नाम पते और फोटो भी उपलब्ध नहीं थे।
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पुलिस ने करीब बारह साल पूर्व घटित इस हत्या और लूट की वारदात को खोलने के लिए तीनों अज्ञात आरोपियों के खिलाफ 40-40 हजार के इनाम भी रखे थे। काफी समय तक पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बिहार, आंध्र प्रदेश और पंजाब तक तलाश की। इस दौरान पुलिस टीम में शामिल लोगों ने कहीं श्रमिक का रूप धरा, कहीं गायें चराई, तो कहीं खेतों में फसल काटी। आखिर तीनों नामजद आरोपियों लालदेव, उदय और नरेश को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
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आरोपियों के नक्सलियों से संबंध
प्रारंभिक जांच पड़ताल में आरोपियों के नक्सलियों से संबंध भी उजागर हुए और नक्सलियों के लिए वसूली, हत्या, हत्या प्रयास, डरा धमकाकर वसूली करने के भी मुकदमे हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वर्तमान समय में सोशल नेटवर्किंग, आरोपियों के परिवार तक पहुंचने के लिए पुलिसकर्मियों को अपनी वेषभूषा व कार्यप्रणाली भी बदली पड़ी।

आईजी विकास कुमार ने पकड़े गए आरोपियों के बारे में बताया कि तीनों लोग घर परिवार की विपरीत परिस्थितियों के चलते अपना स्तर सुधारने के लिए बड़ा व्यापार करना चाहते थे। लेकिन उनको इसके लिए धन की जरूरत थी और इसीलिए वो फलोदी के खींचन गांव में आए। यहां सोनामुखी फैक्ट्री में बतौर श्रमिक लगे। वहां लाखों के लेन-देन देखकर वारदात को अंजाम देने के लिए टिके रहे। फैक्ट्री का अधिकांश लेन-देन मुनीम कोजाराम करता था, जिसको विश्वास में लेकर साथ खाना-पीना शुरू कर दिया।


लूट की नीयत से गला घोंटकर की थी हत्या
12 दिसंबर 2012 को शराब पार्टी के बाद नशे में धुत कोजाराम की लूट की नीयत से गला घोंटकर हत्या कर दी और फैक्ट्री में ही पड़ी सोनामुखी से भरी बोरियों के नीचे शव दबाकर मुनीम के पास रखी डेढ़ लाख की नकदी लेकर फरार हो गए। इस वारदात को खोलने में जोधपुर रेंज के करीब 12 अधिकारी व जवानों ने भूमिका निभाई। इसके साथ ही बियर, यूपी, रहा। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों आरोपियों ने करीब एक दर्जन वारदातें विभिन्न प्रदेशों व थाना क्षेत्रों में करना कबूल किया है।

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