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Leh Violence: वांगचुक गिरफ्तार, NSA लगाया; राजस्थान की जोधपुर जेल में शिफ्ट, प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप

Fri, 26 Sep 2025 10:35 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 26 Sep 2025 10:35 PM IST
सार

लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग पर हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा। उन पर एनएसए लगाए जाने की आशंका है। लेह में इंटरनेट सेवाएं बंद, वहीं सरकार ने उनके संगठन SECMOL का एफसीआरए लाइसेंस भी रद्द किया।

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Rajasthan News: There was a sudden commotion outside Jodhpur jail, security arrangements were increased.
सोनम वांगचुक को लद्दाख से जोधपुर शिफ्ट करने की खबर, समर्थकों ने गिरफ्तारी का विरोध किया - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई है। 24 सितंबर को हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे। वांगचुक पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप है। उनकी गिरफ्तारी के बाद लेह में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

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जोधपुर जेल किए गए शिफ्ट
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसडी सिंह जामवाल के नेतृत्व में पुलिस ने शुक्रवार दोपहर ढाई बजे वांगचुक को हिरासत में लिया। बाद में, गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल भेजा गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वांगचुक को लेह हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, वांगचुक ने आरोपों को खारिज किया था।
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वांगचुक लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के वरिष्ठ सदस्य हैं। एलएबी कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के साथ लद्दाख को राज्य का दर्जा देने एवं संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने को लेकर पांच साल से आंदोलन कर रही है। 2019 में पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के विभाजन के बाद केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख बना। इन मांगों को लेकर वांगचुक दस सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठे थे, पर हिंसा के बाद उन्होंने इसे वापस ले लिया था। हिंसा में भाजपा दफ्तर में आग लगा दी गई थी और कई वाहन फूंक दिए थे। लेह में कर्फ्यू जारी है और अगले आदेश तक के लिए स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं।
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वांगचुक की पत्नी बोलीं-अपराधियों जैसा बर्ताव, पुलिस ने घर में की तोड़फोड़  
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने कहा कि उनके पति के साथ बेवजह अपराधी जैसा व्यवहार किया जा रहा। उन्होंने सरकार पर वांगचुक की छवि खराब करने के लिए झूठी कहानियां गढ़ने का आरोप लगाया। आरोप लगाया, घर में पुलिस ने तोड़फोड़ की और वांगचुक को अनुचित रूप से राष्ट्र-विरोधी के रूप में चित्रित किया जा रहा है। यह लोकतंत्र का सबसे निकृष्ट रूप है।

उम्मीद से ज्यादा भीड़ जुटी...गिरफ्तारी से जटिल हो सकते हैं हालात
एलएबी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और बंद में उम्मीद से ज्यादा भीड़ जुट गई। वरिष्ठ सदस्यों के प्रयास के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने भाजपा दफ्तर में तोड़फोड़ थी। प्रदर्शनकारी बेकाबू हो गए थे। इसमें वांगचुक की कोई भूमिका नहीं थी। एलएबी के कानूनी सलाहकार हाजी गुलाम मुस्तफा ने वांगचुक की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण और नासमझी भरा फैसला बताया। कहा, इससे स्थिति और जटिल हो सकती है। मुस्तफा ने कहा, एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से आंदोलन नहीं रुक सकता। वहीं, एलएबी ने सह-अध्यक्ष चेरिंग दोर्जे ने हिंसा की न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर गृह मंत्रालय हमें बातचीत के लिए नहीं बुलाता है, तो हम अपना आंदोलन और तेज कर देंगे।

यह क्रांति नहीं, साजिश : उपराज्यपाल
हिंसक विरोध प्रदर्शन को प्रदर्शनकारियों की ओर से क्रांति बताए जाने पर लद्दाख के उपराज्यपाल (एलजी) कविंद्र गुप्ता ने कहा कि इसे क्रांति नहीं, साजिश कहा जा सकता है। उन्होंने कहा, माहौल बिगाड़ने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उपराज्यपाल ने कहा, शांति बहाली के लिए प्रयास जारी हैं और जल्द स्थिति में सुधार की उम्मीद है।




 
इसे भी पढ़ें- Leh Violence: सोनम वांगचुक NSA के तहत गिरफ्तार, लेह में इंटरनेट सेवा बंद; हिंसा में गई थी चार की जान

वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस, गिरफ्तारी को बताया गैरजरूरी
कांग्रेस ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को 'गैरवाजिब' बताते हुए लद्दाख प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि प्रशासन ने पूरे मामले को गलत तरीके से संभाला है और अब अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश कर रहा है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव गुलाम अहमद मीर ने अनंतनाग में मीडिया से बात करते हुए कहा, सोनम वांगचुक एक सम्मानित और गांधीवादी विचारधारा वाले व्यक्ति हैं, जिन्होंने हमेशा लद्दाख के हितों के लिए काम किया है। उनकी गिरफ्तारी की कोई जरूरत नहीं थी। मीर ने यह भी कहा कि यह वही एनडीए सरकार है जिसने वांगचुक को विदेशी फंडिंग की अनुमति दी थी, और अब उस फंडिंग को रद्द करके यह दिखाना चाह रही है कि जैसे वह पहले की सरकार की गलती थी।

यह पूरी तरह से लद्दाख मामले का गलत प्रबंधन है और इसके लिए केंद्र सरकार और प्रशासन जिम्मेदार है। डोरू से विधायक मीर ने कहा कि लद्दाख की जनता राजनीतिक सशक्तिकरण चाहती है, एक विधानसभा के साथ पूर्ण केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किया जाना, ताकि वहां की जनजातीय और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके।

लद्दाख के लोग हमेशा शांतिप्रिय रहे हैं और उन्होंने कभी हिंसा का समर्थन नहीं किया है। जब बीजेपी द्वारा कांग्रेस पर हिंसा भड़काने के आरोप के बारे में पूछा गया, तो मीर ने साफ कहा कि यह केवल एक झूठा नैरेटिव है। जिस पार्षद पर आरोप लगाया जा रहा है, उसने साफ इनकार किया है कि वह किसी हिंसा में शामिल था।

फोटो में दिख रहे व्यक्ति को लेकर भी साफ किया गया है कि वह पार्षद नहीं हैं। यहां तक कि उस पार्षद के दो नजदीकी रिश्तेदारों की मौत भी हो चुकी है, फिर भी वह शांति बनाए रखे हुए हैं। मीर ने अंत में कहा कि भाजपा अपनी विफलता छिपाने के लिए कांग्रेस पर झूठे आरोप लगा रही है, जबकि हकीकत यह है कि सरकार से लद्दाख की जनता का भरोसा उठता जा रहा है।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने जताई नाराजगी
आम आदमी पार्टी ने लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के साथ केंद्र सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की है। आप ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित केंद्र सरकार वांगचुक जैसे देशभक्त को तुच्छ राजनीति का शिकार बना रही है।

पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन शिक्षा सुधार और नवाचार को समर्पित कर दिया, उसे सरकार का पूरा तंत्र प्रताड़ित कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि जो व्यक्ति देश के बारे में सोचता है, शिक्षा और नए आविष्कारों के बारे में सोचता है, उसे प्रताड़ित करना भाजपा की घटिया राजनीति का उदाहरण है। दुख होता है कि देश की बागडोर ऐसे लोगों के हाथों में है। ऐसे भारत का विकास कैसे संभव है?


वांगचुक की विदेशी फंडिंग को लेकर ED-CBI कसेंगे शिकंजा
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की विदेशी फंडिंग के जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनसे करोड़ों की फंडिंग, खातों को छिपाने के मामले में उनकी नीयत और लद्दाख में हालात बिगाड़ने की साजिश के सूत्र जुड़ते दिख रहे हैं। केंद्र सरकार ने वित्तीय अनियमितताओं के चलते वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया है। दान और आंदोलन के नाम पर जुटाई गई रकम गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) से निकलकर निजी कंपनी में पहुंची, और वहां से सीधे निजी खातों व विदेशों तक। वांगचुक दावा जनहित का करते रहे हैं, पर हकीकत में पैसों का खेल सामने आया है। सीबीआई दो माह से एफसीआरए उल्लंघन मामले की जांच कर रही है। 



सबसे पहले बात सोनम वांगचुक की संस्था हिमालयन इंस्टीट्यूट्स ऑफ अल्टरनेटिव्स (एचआईएएल) की करते हैं। दस्तावेज बताते हैं कि इस संस्था को 2023-24 में करीब 6 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, पर अगले ही साल यह रकम बढ़कर 15 करोड़ से भी ज्यादा हो गई। मतलब एक साल में दान दोगुना। यहीं नहीं, संस्था के पास सात बैंक खाते पाए गए, लेकिन इनमें से चार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। यही नहीं, एचआईएएल ने बिना एफसीआरए पंजीकरण कराए ही डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी चंदा लिया जो कानून का सीधा उल्लंघन है। आरोप है कि इसी एनजीओ से 6.5 करोड़ रुपये सीधे शेश्योन इनोवेशन्स प्रा.लि. नाम की निजी कंपनी के खाते में भेजे गए। शेश्योन इनोवेशन्स में सोनम वांगचुक और गीतांजलि जेबी डायरेक्टर हैं। 2023-24 में कंपनी का कुल लाभ 6.13% था। 2024-25 में कारोबार बढ़कर करीब 9.85 करोड़ रुपये हो गया, पर मुनाफा घटकर सिर्फ 1.14 फीसदी रह गया। यानी टर्नओवर तो बढ़ा, लेकिन मुनाफा गायब। जांच एजेंसियों को शक है कि मुनाफे का पैसा दबाने का खेल किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी के तीन खातों में से दो को छुपा लिया गया। एनजीओ से ट्रांसफर हुए 6.5 करोड़ रुपये इन्हीं खातों में पहुंचे थे। वांगचुक की पुरानी संस्था स्टूडेंट्स एजूकेशनल एंड कल्चर मूवमेंट आफ लद्दाख के नाम पर कुल नौ बैंक खाते हैं, पर इनमें से छह का जिक्र नहीं किया गया। यानी यहां भी परदेदारी है। अब सच्चाई सामने आ रही है।

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