फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jodhpur News ›   Asaram Bapu Gets Bail From SC Jodhpur Case That Trapped Him Know Details in Hindi

Asaram: जोधपुर का वो केस जिसमें फंसा आसाराम, ऐसे चर्चा में आया था मणाई आश्रम; जानिए सबकुछ

Tue, 07 Jan 2025 04:31 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 07 Jan 2025 04:31 PM IST
सार

Asaram Bapu Bail: जोधपुर के मणाई आश्रम में आसाराम ने अपनी कुटिया में अंधेरे में नाबालिग पीड़िता के साथ गलत काम किया। पीड़िता के विरोध करने पर आसाराम ने उसके माता-पिता को मरवाने की धमकी तक दे डाली थी। आज आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है…आइये जानते है मणाई आश्रम में उस दिन क्या कुछ हुआ था।

विज्ञापन
Asaram Bapu Gets Bail From SC Jodhpur Case That Trapped Him Know Details in Hindi
आसाराम बापू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के परसरिया रोड पर स्थित छिंदवाड़ा आश्रम में एक छात्रा अचानक बेहोश होकर गिर गई थी, जिसके बाद आसाराम की अनुयायी शिल्पी ने उस छात्रा के माता-पिता को कहा कि इस छात्रा पर भूत प्रेत का साया है और उसके निराकरण के लिए बाबा यानी कि आसाराम की मदद लेनी पड़ेगी। नाबालिग छात्रा के माता-पिता घबरा गए और उसे अपने साथ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर अपने निवास पर लेकर आ गए। इसके बाद उन्हें जानकारी मिली कि आसाराम जोधपुर के मणाई आश्रम में है, अब यहां से शुरू होती है कहानी, जिसके बाद आसाराम की मुश्किलें खड़ी हो गई थी। 

विज्ञापन


तारीख थी 14 अगस्त और साल था 2013...छात्रा के माता-पिता छात्रा को लेकर जोधपुर के मणाई आश्रम पहुंचे। इस छात्रा को आसाराम के पास इलाज के लिए लाया गया था। नाबालिग के माता-पिता का यह कहना था कि इस छात्रा के ऊपर भूत है और आसाराम पर उन्हें विश्वास था कि वह भूत को उतार देंगे।
विज्ञापन


क्या हुआ था उस दिन मणाई आश्रम में ?
बताया जा रहा है कि आसाराम के कहने पर नाबालिग छात्रा को उसके माता-पिता ने आसाराम की कुटिया में भेज दिया और खुद कुटिया के बाहर जप करने बैठ गए। आसाराम पर आरोप यह था कि कुटिया में जब बच्ची पहुंची तो आसाराम ने उसके साथ करीब डेढ़ घंटे तक दुष्कर्म किया, आसाराम की इन हरकतों से जब छात्रा डर गई तो आसाराम ने उसे डराया-धमकाया और इस घटना के बारे में किसी को भी न बताने की हिदायत दी और कहा कि यदि वह किसी को बताएगी तो उसके माता-पिता की हत्या कर दी जाएगी। इसके बाद पीड़ित छात्रा घबरा गई और उसने किसी को कुछ नहीं बताया, लेकिन जब अपने घर पहुंची तो उसने सारी बात अपने माता-पिता को बताई तो उसके माता-पिता सन्न रह गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


जोधपुर में हुई घटना की दिल्ली में करवाई गई एफआईआर
इस घटना की जीरो नंबर एफआईआर 19 अगस्त 2013 को दिल्ली के कमला नगर थाने में पेश की गई। मुकदमा दर्ज होने के बाद तुरंत पीड़िता का मेडिकल करवाया गया और उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
आसाराम को किया गया गिरफ्तार
दिल्ली के कमला नगर थाने से एफआईआर जोधपुर ट्रांसफर की गई। इसके बाद जोधपुर पुलिस हरकत में आई और 31 अगस्त और 1 सितंबर की मध्य रात में आसाराम को इंदौर के आश्रम से गिरफ्तार कर जोधपुर लाया गया। जहां कोर्ट में पेश करने के बाद, कोर्ट ने आसाराम को जेल भेज दिया।

जमानत के लिए नामचीन वकीलों की कर दी फौज खड़ी
इसके बाद आसाराम ने जमानत हासिल करने के लिए अधीनस्थ न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कई याचिकाएं पेश की। लेकिन आसाराम को कभी भी अंतरिम जमानत तक नहीं मिली। आसाराम ने जमानत हासिल करने के लिए दिग्गज वकीलों की फौज खड़ी कर दी, जिसमें राम जेठमलानी, सुब्रमण्यम स्वामी, मुकुल रोहतगी, केटीएस तुलसी और सिद्धार्थ लूथरा सहित कई नामी गिरामी विधि विशेषज्ञ वकीलों ने आसाराम की पैरवी अधीनस्थ न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट में की लेकिन आसाराम को कभी आंशिक राहत तक नहीं मिली।

सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया झूठा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
आसाराम को जमानत दिलाने के लिए आसाराम के पैरोकार रवि राय वागे ने सुप्रीम कोर्ट में जोधपुर सेंट्रल जेल डिस्पेंसरी का एक झूठा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र पेश कर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आसाराम का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, ऐसे में उसे जमानत दी जानी चाहिए, लेकिन जांच में वह स्वास्थ्य प्रमाण पत्र झूठा पाया गया, जिसके बाद आसाराम के खिलाफ जोधपुर में एक और केस दर्ज किया गया, लेकिन आसाराम ने इस मामले में रवि राय वागे को अपना पैरोकार नियुक्त करने को लेकर मना कर दिया। आसाराम ने कोर्ट को बताया कि वह रवि राय वागे से कभी नहीं मिले और ना ही उसे पैरोकार नियुक्त किया।

जज मधुसूदन शर्मा की कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
करीब 5 सालों तक लंबी सुनवाई चलने के बाद एससी एसटी कोर्ट जज मधुसूदन शर्मा की कोर्ट ने आसाराम के मामले में 453 पेज का ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आसाराम को जिंदगी की आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुना दी।

दो बार मिली आसाराम को पैरोल
आसाराम को 5 महीने पहले 7 दिन की पैरोल मिली थी, जिसे 5 दिन और बढ़ाया गया था। इसके बाद आसाराम को 10 दिसंबर 2024 को 17 दिन की पैरोल मिली। इस दौरान आसाराम ने कई बार सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और अधीनस्थ न्यायालय के दरवाजे खटखटाया, लेकिन आसाराम को कहीं भी राहत नहीं मिली।


आखिर सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी अंतरिम राहत
आखिर मंगलवार को वह दिन आ गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम के मेडिकल रिकॉर्ड को देखते हुए अंतरिम जमानत 31 मार्च तक स्वीकार की है, लेकिन इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आसाराम इस दौरान सबूत के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं करेगा। इसके अलावा अपने अनुयायियों से नहीं मिलेगा। ऐसे में 12 साल बाद वह दिन आ गया जब आसाराम अंतिम जमानत प्राप्त कर जेल से बाहर आएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed