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राजस्थान: जवाई लेपर्ड क्षेत्र में निर्माण पर हाईकोर्ट की रोक, अभयारण्य बनाने पर विचार का निर्देश
Sat, 05 Sep 2026 09:23 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sat, 05 Sep 2026 09:23 PM IST
सार
Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई के तेंदुआ आवास और संवेदनशील क्षेत्रों में नए निर्माण तथा व्यावसायिक पर्यटन विस्तार पर रोक लगाई है। अदालत ने होटल-रिसॉर्ट समेत नए पर्यटन लाइसेंस पर रोक और खनन गतिविधियों को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं।
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राजस्थान हाईकोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के आवास, गुफाओं, प्रजनन स्थलों और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने जवाई के संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण और व्यावसायिक पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को इस पूरे क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा है। हाईकोर्ट ने तेंदुओं के प्राकृतिक आवास और आवाजाही को सुरक्षित रखने पर जोर दिया है।
होटल-रिसॉर्ट समेत नए निर्माण पर रोक
उच्च न्यायालय ने जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व की घोषित सीमा के आसपास नए व्यावसायिक पर्यटन प्रतिष्ठानों के निर्माण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इनमें होटल, रिसॉर्ट, गेस्ट हाउस, होमस्टे और पर्यटन शिविर जैसी गतिविधियां शामिल हैं। साथ ही नए पर्यटन लाइसेंस जारी नहीं करने को कहा गया है। अदालत ने खनन और ऐसी गतिविधियों पर भी रोक लगाई है, जिनसे तेंदुओं की आवाजाही या उनके प्राकृतिक क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।
गुफाओं और पहाड़ियों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां रहेंगी प्रतिबंधित
अदालत के निर्देश के अनुसार तेंदुओं के प्राकृतिक आवास, उनकी गुफाओं और अन्य संवेदनशील स्थलों को किसी भी तरह से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। पहाड़ियों और तलहटी के क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण तथा पर्यावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर सख्ती बरकरार रहेगी। अदालत ने क्षेत्र की पारिस्थितिकी और वन्यजीवों के संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।
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नाइट सफारी, स्पॉटलाइट और ड्रोन पर भी सख्ती
जवाई क्षेत्र में वन्यजीवों की शांति और प्राकृतिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए नाइट सफारी पर रोक पहले से लागू है। इसके अलावा गुफाओं के आसपास भीड़ जुटाने, स्पॉटलाइट का इस्तेमाल करने और ड्रोन उड़ाने जैसी गतिविधियों पर भी प्रतिबंध जारी रहेगा। इन कदमों का उद्देश्य तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों पर मानवीय हस्तक्षेप का दबाव कम करना है।
सरकार को अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर विचार का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को जवाई क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने माना कि जवाई एक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन गतिविधियों के बीच संतुलन जरूरी है।
तेंदुओं के साथ जंगल और गलियारों की सुरक्षा भी जरूरी
अदालत की चिंता सिर्फ तेंदुओं तक सीमित नहीं है। जवाई के वन्यजीव गलियारों, पहाड़ियों, जलस्रोतों और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों को सुरक्षित रखना भी इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा है। अदालत का जोर इस बात पर है कि अनियंत्रित निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और आवाजाही पर असर न पड़े।
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होटल-रिसॉर्ट समेत नए निर्माण पर रोक
उच्च न्यायालय ने जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व की घोषित सीमा के आसपास नए व्यावसायिक पर्यटन प्रतिष्ठानों के निर्माण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इनमें होटल, रिसॉर्ट, गेस्ट हाउस, होमस्टे और पर्यटन शिविर जैसी गतिविधियां शामिल हैं। साथ ही नए पर्यटन लाइसेंस जारी नहीं करने को कहा गया है। अदालत ने खनन और ऐसी गतिविधियों पर भी रोक लगाई है, जिनसे तेंदुओं की आवाजाही या उनके प्राकृतिक क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।
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गुफाओं और पहाड़ियों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां रहेंगी प्रतिबंधित
अदालत के निर्देश के अनुसार तेंदुओं के प्राकृतिक आवास, उनकी गुफाओं और अन्य संवेदनशील स्थलों को किसी भी तरह से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। पहाड़ियों और तलहटी के क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण तथा पर्यावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर सख्ती बरकरार रहेगी। अदालत ने क्षेत्र की पारिस्थितिकी और वन्यजीवों के संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।
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नाइट सफारी, स्पॉटलाइट और ड्रोन पर भी सख्ती
जवाई क्षेत्र में वन्यजीवों की शांति और प्राकृतिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए नाइट सफारी पर रोक पहले से लागू है। इसके अलावा गुफाओं के आसपास भीड़ जुटाने, स्पॉटलाइट का इस्तेमाल करने और ड्रोन उड़ाने जैसी गतिविधियों पर भी प्रतिबंध जारी रहेगा। इन कदमों का उद्देश्य तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों पर मानवीय हस्तक्षेप का दबाव कम करना है।
सरकार को अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर विचार का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को जवाई क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने माना कि जवाई एक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन गतिविधियों के बीच संतुलन जरूरी है।
तेंदुओं के साथ जंगल और गलियारों की सुरक्षा भी जरूरी
अदालत की चिंता सिर्फ तेंदुओं तक सीमित नहीं है। जवाई के वन्यजीव गलियारों, पहाड़ियों, जलस्रोतों और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों को सुरक्षित रखना भी इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा है। अदालत का जोर इस बात पर है कि अनियंत्रित निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और आवाजाही पर असर न पड़े।