फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Jaipur News: MP Rajkumar Raut raised questions on the government's conversion bill

Jaipur News: सांसद रौत ने पूछा- जब धर्मांतरण जैसी घटना नहीं तो कानून की आवश्यकता क्यों? बिल का आधार बताए सरकार

Tue, 01 Apr 2025 04:33 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Tue, 01 Apr 2025 04:33 PM IST
सार

राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तावित धर्मांतरण बिल को लेकर सांसद राजकुमार रौत ने सरकार से जनवरी 2025 से पहले दर्ज हुए मुकदमों की संख्या सार्वजनिक करने का आग्रह किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास जबरन धर्मांतरण के कोई ठोस आंकड़े नहीं हैं।

विज्ञापन
Jaipur News: MP Rajkumar Raut raised questions on the government's conversion bill
सांसद राजकुमार रोत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तावित धर्मांतरण बिल को लेकर सांसद राजकुमार रौत ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट रूप से यह पूछने की मांग की है कि इस बिल को लाने के पीछे उसका आधार क्या है? उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताएं कि राजस्थान में अब तक कितने धर्मांतरण के मामले दर्ज हुए हैं, जिसके चलते यह बिल लाया जा रहा है।

विज्ञापन


विज्ञापन


सांसद रौत ने दावा किया कि उनके पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में जबरन धर्मांतरण का कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति ने ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं कराया है, जिसमें यह बताया गया हो कि उसे जबरदस्ती धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने सवाल किया कि जब इस तरह की कोई घटना सामने नहीं आई है तो फिर इस कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी? उन्होंने इसे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का एक फार्मूला करार दिया, जिसका उद्देश्य मुसलमानों, आदिवासियों और पिछड़े समुदाय के लोगों के बीच वैमनस्य पैदा करना है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बिना आंकड़ों के बिल लाने पर सवाल
सांसद रौत ने कहा कि सरकार ने आनन-फानन में कैबिनेट में यह बिल प्रस्तुत कर दिया है, जबकि कोई ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी बिल को तब लाया जाता है, जब संबंधित घटनाएं प्रदेश में हो रही हों, लेकिन यहां तो कोई मामला दर्ज ही नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने बिल पेश कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जबरदस्ती ट्राइबल बेल्ट में धर्मांतरण के मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं, ताकि सरकार अपनी नीतियों को सही ठहरा सके।

ये भी पढ़ें: डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का गद्दी उत्सव कल, सिटी पैलेस में होंगे रस्म अदायगी के कार्यक्रम

सांसद ने सरकार से यह भी पूछा कि जिस दिन यह धर्मांतरण कानून कैबिनेट में लाया गया, उस दिन से दस साल पहले तक कितने ऐसे मुकदमे दर्ज हुए थे? उन्होंने मांग की कि सरकार जनवरी 2025 से पहले दर्ज हुए मुकदमों की संख्या सार्वजनिक करे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास जबरन धर्मांतरण के कोई ठोस आंकड़े नहीं हैं, इसलिए वह ट्राइबल बेल्ट में अधिकारियों पर दबाव बना रही है, ताकि जबरदस्ती धर्मांतरण के मुकदमे दर्ज कराए जाएं और एक कृत्रिम आंकड़ा प्रस्तुत किया जा सके।


ये भी पढ़ें: करोड़ों के कीमती आभूषणों से सजी, कड़ी सुरक्षा के बीच निकलती है गणगौर की सवारी

सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास
राजकुमार रौत ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और सरकार से जुड़े कुछ लोग इस प्रकार की घटनाओं को गढ़ने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई गरीब व्यक्ति बीमार होता है, तो वह अपनी आस्था के अनुरूप किसी गिरजाघर, दरगाह या मंदिर में जाता है। लेकिन अब इस तरह की गतिविधियों पर भी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे सरकार अपनी मंशा के अनुरूप आंकड़ा तैयार कर सके। उन्होंने कहा कि सरकार केवल धर्मांतरण बिल के लिए आंकड़े जुटाने में लगी हुई है ताकि इसे लागू करने के लिए एक तर्क प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को आदिवासी लोगों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं देनी चाहिए, लेकिन वह ऐसा करने के बजाय धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है और ट्राइबल बेल्ट के लोगों को आपस में लड़वाने का काम कर रही है।

विजयनगर ब्लैकमेल कांड पर प्रतिक्रिया
विजयनगर ब्लैकमेल कांड पर बोलते हुए सांसद रौत ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं के लिए पहले से ही कई धाराएं हैं, जिनके तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। लेकिन आदिवासी बेल्ट को जबरदस्ती निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां ऐसे कई मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें आम आदमी को मारपीट कर जबरदस्ती स्वीकारोक्ति कराई जा रही है और मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुकदमों का उद्देश्य केवल एक खास समुदाय को दबाने और डराने का है।

आदिवासियों के विकास पर जोर
सांसद रौत ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में आदिवासियों का भला चाहती है तो उन्हें अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि जब आदिवासी पढ़-लिख जाएगा, तो वह खुद समझ पाएगा कि क्या सही है और क्या गलत। लेकिन सरकार ऐसा करने के बजाय धर्म के आधार पर राजनीति कर रही है। उन्होंने दोहराया कि आदिवासी समाज को लड़ाने के बजाय, सरकार को उनके उत्थान की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से आदिवासी समाज को नुकसान हो रहा है और अगर सही समय पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समाज को तोड़ने का कार्य करेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed