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कारगिल के हीरो: 11 गोलियां खाकर भी दुश्मनों से लड़ते रहे कुलदीप गौतम, आज लोगों को सिखा रहे ड्राइविंग स्किल

Fri, 26 Jul 2024 06:59 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 26 Jul 2024 06:59 PM IST
सार

देश के वीर सैनिकों ने अपना सर्वस्व कुर्बान कर दिया, ताकि दुश्मन के नापाक पैर हिंदुस्तान की जमीन पर न पड़ पाए। कई जवानों ने अपनी शहादत दी थी। इस युद्ध में देश के कई जांबाज दुश्मन की गोली लगने से घायल भी हुए थे।

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Bikaner Kargil hero Kuldeep Gautam kept fighting enemies after being hit by 11 bullets teaching driving skills
बीकानेर के वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश आज कारगिल विजय दिवस मना रहा है। यह दिन 'ऑपरेशन विजय' की शौर्य गाथा को बताता है। कारगिल दिवस के मौके पर हम आपको भारत के ऐसे जांबाज की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने कारगिल युद्ध में लड़ाई के दौरान दुश्मनों की 11 गोलियां खाई थी। लेकिन फिर भी वह मैदान में डटे रहे। आज वो वीर बीकानेर के लगभग बारह सौ से ज्यादा युवकों को ड्राइविंग के गुर सिखा रहा है। 11 गोलियां खाकर भी दुश्मनों से लड़ते रहे।

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बता दें, साल 1999 में भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच कारगिल युद्ध हुआ था। इस युद्ध में देश के वीर सैनिकों ने अपना सर्वस्व कुर्बान कर दिया, ताकि दुश्मन के नापाक पैर हिंदुस्तान की जमीन पर न पड़ पाए। कई जवानों ने अपनी शहादत दी थी। इस युद्ध में देश के कई जांबाज दुश्मन की गोली लगने से घायल भी हुए थे। उनमें से एक यूपी के कुलदीप गौतम भी थे। जो पिछले कई साल से बीकानेर में रह रहे हैं। कारगिल युद्ध के जांबाज सिपाही कुलदीप गौतम के शरीर पर दुश्मनों ने राइफल से 11 गोलियां मारी थी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भी गौतम दुश्मनों से लड़ते रहे।
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हैरत की बात है कि पूरा शरीर छलनी होने होने बाद आज रिटायर्ड सूबेदार कुलदीप गौतम बीकानेर में रहकर ड्राइविंग सिखा रहे हैं। आज कारगिल विजय दिवस पर कुलदीप को युद्ध क्षेत्र में अपनी वीरता के लिए सम्मानित किया गया। अपने इस सम्मान के बाद कुलदीप ने कारगिल युद्ध के बारे में बताते हुए कहा कि दुश्मन टाइगर हिल पर कब्जा कर बैठा था। सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, उसे वापस अपने कब्जे में लेने की। दुश्मन पहाड़ों से गोलियां दाग रहे थे। लेकिन भारतीय जवानों ने वीरता दिखाते हुए टाइगर हिल पर कब्जा कर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया।
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युद्ध में उनके पूरे शरीर में ग्यारह गोली लगी थी, जिसके बाद करीब साढ़े तीन साल वे हास्पिटल में रहे। कई साल व्हील चेयर पर बिताए। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी। सालों के शारीरिक कष्ट झेलने के बाद कुलदीप ने बीकानेर में अपना एक ड्राइविंग स्कूल खोला, जहां वे ड्राइविंग सिखाने के साथ-साथ लोगों में राष्ट्रभक्ति की देश प्रेम अलख जगा रहे हैं।

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